मूसली पाक (Musli Pak) – बनाने की विधि (भैषज्य रत्नाकर), फायदे एवं सेवन विधि |

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मूसली पाक (Musli Pak)

मूसली पाक – मूसली एवं अन्य द्रव्यों के पाक विधि से तैयार करने से मूसली पाक का निर्माण होता है | इसमें प्रमुख औषध द्रव्य मूसली होती है | इसलिए इस पाक को मूसली पाक कहते है | आयुर्वेद में वाजीकरण, बल वर्द्धन और वीर्य दोषों को दूर करने के लिए मूसली का प्रयोग किया जाता है | प्राचीन समय से ही इस औषध का उपयोग पौरुष शक्ति के लिए होता आया है | हमारे देश के साथ – साथ आज इस औषधि की ख्याति विदेशों में भी फ़ैल रही है | मूसली दो प्रकार की होती है – 1. श्वेत मूसली और 2 श्याम मूसली | दोनों ही प्रकार की मूस्लियाँ गुणकारी है | मूसली पाक में दोनों प्रकार की मूसली प्रधान द्रव्य होती है | अत: इनका संक्षिप्त परिचय भी देखें –

मूसली पाक

  1. श्वेत मूसली (सफ़ेद मूसली) – भारत में प्राय: सभी प्रान्तों में इसकी औषधीय खेती की जा रही है | यह वर्षा ऋतू में बढ़ने वाली वनस्पति है | आयुर्वेद में इसकी जड़ का इस्तेमाल किया जाता है | इसका वीर्य उष्ण एवं रस कषाय होता है | वीर्य दोषों को दूर करने व वाजीकरण के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है |
  2. श्याह मूसली (काली मूसली) – सफ़ेद मूसली से गुणों में थोड़ी अधिक उपयोगी होती है | यह शीत प्रकृति की और स्वाद में मधुर रस की होती है | यह कमोतेजक और पौरुष बल वर्द्धक होती है | कफ एवं पित्त का शमन करती है |

मूसली पाक बनाने की विधि

मूसली पाक के निर्माण में 24 औषधियों की आवश्यकता होती है | अत: पंसारी की दुकान से सबसे पहले इन औषधियों को खरीद ले | यहाँ बताई गई विधि भैषज्यरत्नाकर के अनुसार है अत: मात्रा की निर्धारण भी इसी ग्रन्थ के आधार पर है | वैसे विभिन्न फार्मेसीयों के अनुसार मात्रा में भिन्नता हो सकती है, साथ ही कुछ औषध द्रव्यों में भी परिवर्तन कर दिया जाता है | लेकिन प्रधान द्रव्य सभी में एक सामान होते है |

इस सारणी से आप औषध द्रव्यों के नाम एवं मात्रा देख सकते है –

विधि 

  • सर्वप्रथम दोनों प्रकार की मूसलियों का महीन चूर्ण करले | इस चूर्ण को गो दुग्ध में डालकर अच्छी तरह इसका पाक कर के खोया निकाल ले |
  • अब तैयार खोये को गोघृत में डालकर अच्छी तरह भून ले |
  • एक पात्र में शर्करा को लेकर इसमें पानी डाले और इसका पाक करके , साथ ही इसमें खोये को मिलाकर अग्नि पाक को बंद कर दे |
  • ठंडे होने पर बाकी द्रव्यों का चूर्ण बना कर इनको प्रक्षेप द्रव्यों की तरह मिलाले |
  • अब तैयार मूसली पाक की एक – एक तोला की बर्फी काटले | इस प्रकार आपका मूसली पाक तैयार है |
  • इसे एयरटाइट डब्बे में या कांच के मर्तबान में रखें |

सेवन की विधि और मात्रा 

इस मूसली पाक का सेवन 1 पल की मात्रा में दिन में दो बार करना चाहिए | इसका सेवन सुबह एवं शाम के समय गौदुग्ध के साथ करना चाहिए |

मूसली पाक के फायदे एवं स्वास्थ्य उपयोग 

  • मूसली पाक श्रेष्ठ वाजीकरण औषधि है अत: वाजीकरण के लिए इसका उपयोग करना चाहिए |
  • इसके सेवन से कमजोर पुरुष एवं स्त्रीयों में बल की वृद्धि होती है |
  • वीर्य विकारों में इसके सेवन से चमत्कारिक लाभ मिलते है |
  • जिन पुरुषों की मैथुन शक्ति क्षीण हो चुकी हो वे सर्दियों में इसका सेवन करे | निश्चित ही कुच्छ समय के प्रयोग से जल्द ही मैथुन शक्ति में प्रबलता आएगी |
  • इसका प्रधान औषध द्रव्य मूसली है | मूसली को पौरुष शक्ति को बढ़ाने, कमजोरी दूर करने, वीर्य शुद्धि एवं मैथुन इच्छा को जागृत करने वाली होने के कारण इन सभी प्रकार के विकारों में मूसली पाक का सेवन करने से लाभ मिलता है |
  • शरीर में उर्जा का संचार एवं पुरुषों के यौन विकारों को दूर करने में उपयोगी औषधि योग है |
  • शीघ्रपतन एवं धातु दुर्बलता के रोगी इसका सेवन अवश्य करे |
  • अगर आप नपुंसकता से पीड़ित है तो निश्चित रूप से मूसली पाक का सेवन आपकी इस समस्या को दूर करेगा |

 

Note – यह पोस्ट आपके ज्ञान वर्द्धन के लिए है | अत: उपयोग से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरुर ले | बाज़ार में मिलने वाले मूसली पाक की विधि एवं औषध सामग्री अलग हो सकती है , यहाँ पर बताई गई मूसली पाक भैषज्यरत्नाकर ग्रन्थ में व्रणित है |

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