मुनक्का (दाख) / Vitis vinifera

दाख / मुनक्का का प्रयोग आयुर्वेद में पुरातन समय से ही होता आया है | मुनक्का की प्रकृति गरम होती है , सर्दियों में इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है | इसका प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सा में हृदय रोगों में , मूत्रल औषध के रूप में , तृष्णा को शांत करने एवं स्त्रियों के रोगों में उपयोग किया जाता है | मुनक्का अंगूर का ही एक रूप है जो अंगूरों के सूखने के बाद प्राप्त किया है | अंगूर की बेल आरोही होती है जिसमे फल गोस्त्नाकार गुच्छों में लगते है | प्रत्येक गुच्छे में लगे फलों को सुखाने पर मुनक्का प्राप्त होती है | किशमिश भी अंगूरों के सूखने पर ही प्राप्त होती है |

मुनक्का / दाख

मुनक्का और किशमिश में अंतर

मुन्नका और किशमिश भले स्वाद में एक जैसे हों लेकिन गुणों में ये कुच्छ भिन्न होती है | मुनक्का और किशमिश में सबसे बड़ा अंतर होता ही की किशमिश में बीज अत्यल्प मात्रा में होते है जबकि मुनक्का में दो तीन मोटे बीज आसानी से मिल जाते है | मुनक्का आकार में भी किशमिश से बड़ी होती है एवं रंग में भी अधिक गहरी होती है | बड़े और पके हुए अंगूरों को सुखाने पर मुनक्का बनती है |

मुनक्का का रासायनिक संगठन

इसमें ग्लूकोज, गोंद, स्टार्च, टार्टरिक और रेशेमिक एसिड पाया जाता है | साथ ही प्रयाप्त मात्रा में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मग्नेशियम, फास्फोरस एवं लौह आदि तत्व मिलते है , जो इसे अधिक औषध उपयोगी एवं स्वास्थ्य रक्षक बनांते है |

मुनक्का / दाख के औषधीय गुण

इसका रस मधुर होता है एवं गुणों में यह स्निग्ध, गुरु और मृदु गुणों से युक्त होती है | शीत वीर्य होने के कारण पित्त का शमन करती है | मुनक्का के पाचन के बाद इसका विपाक भी शरीर में मधुर ही होता है | अपने इन्ही गुणों के कारण यह हृदय, रक्त प्रसादन, मूत्रल, वृष्य, जीवनीय , रक्तपित एवं तृष्णा शामक रोग प्रभावों से युक्त होती है |

मुनक्का से द्राक्षावलेह और द्राक्षारिष्ट आदि विशिष्ट योग बनते है | इससे बने द्राक्षावलेह को 10 से 20 ग्राम की मात्रा में और द्राक्षारिष्ट को 20ml से 30ml की मात्रा में सेवन करना चाहिए |

मुनक्का / दाख के विभिन्न भाषाओँ में नाम


संस्कृत – द्राक्षा, मधुररसा, स्वाद्फुला, गोस्तनी और मृद्वीका आदि |


हिंदी – दाख, मुनक्का आदि |


मलयालम – मुंदिरिंग, चारुफल, गोस्तनी आदि  |


गुजराती – द्राख |


लेटिन – Vitis vinifera |


अंग्रेजी – Grapevine |


मुनक्का / दाख के घरेलु प्रयोग और फायदे (लाभ)

  • वीर्य वर्द्धन(click) – एक गिलास दूध में 10 मुनक्का डालकर अच्छी तरह उबालें | अब इसमें एक चम्मच घी और कुछ मात्रा में देशी खांड मिलाकर ठंडा होने पर नित्य प्रयोग करे | वीर्य से सम्बन्धित सभी विकार दूर होंगे व शरीर में वीर्य भी प्रयाप्त मात्रा में बनेगा |
  • दमा रोग(click) से निजात के लिए मुनक्का को शाम के समय पानी में भिगों दे | दुसरे दिन पुरे दिन इनका प्रयोग करे | एसा नित्य करने से दमा रोग से छुटकारा मिलता है |
  • हृदय दुर्बलता में – 4 मुनक्का के साथ 2 चम्मच शहद और कुछ भर मिश्री मिलाकर नित्य सेवन करने से हृदय की दुर्बलता दूर होती है |
  • मुनक्का के साथ थोड़ी सी मात्रा में भुनी हुई हिंग को लेने से हृदय रोगों में लाभ मिलता है |
  • मोटापा बढाने में  – 15 मुन्नका नित्य रत को सोते समय खा कर ऊपर से पानी पीकर सो जाएँ | इस प्रकार से एक – दो महीने प्रयोग करने से शरीर की सभी दुर्बलता दूर होकर शरीर का वजन बढ़ता है |
  • शक्ति वर्द्धक – सर्दी के मौसम में बीस मुन्नका 250 ग्राम दूध में उबल कर खाएं और ऊपर से दूध पीकर सो जाएँ | पूरी सर्दी एसा करने से शरीर की सभी धातुएं पुष्ट होकर शरीर में शक्ति का संचार होता है |
  • आधे सिरदर्द में – यदि आधे सिर का दर्द सूर्योदय के साथ बढ़ता हो और सूरज ढलने के साथ कम होता हो तो 5 मुनक्का ले | इनके बीज निकाल कर इनमे राई की बराबर मात्रा में कपूर भर कर प्रात: सूरज उदय से पहले एक मुनक्क निगल जाएँ | एसा तीन बार करे और प्रत्येक में आधे घंटे का अन्तराल रखें | आधे सिर का दर्द दूर हो जाएगा |
  • पीलिया होने पर मुनक्का को पानी में भिगो कर पीने से फायदा मिलता है |
  • टायफाईड – इस रोग में रोगी को अन्न बिलकुल न दे | रोगी को पूर्ण आराम करने की सलाह दे और साथ में फलों का रस, पपीता और मुनक्का खाने को दें |
  • दस्तों में दस मुनक्का को बीजों सहित पीसकर ठन्डे पानी के साथ रोगी को देने से दस्त बंद हो  जाते है |
  • रक्त अशुद्धि – मुनक्का के सेवन से रक्त शुद्ध होता है | नित्य रूप से मुन्नका का सेवन करने से रक्त शुद्ध होता है |

धन्यवाद |

Content Protection by DMCA.com
Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Shopping cart

0

No products in the cart.