ब्रोंकाइटिस / Bronchitis के लक्षण, कारण, प्रकार और आयुर्वेदिक इलाज |

ब्रोंकाइटिस / Bronchitis in Hindi

ब्रोन्कियल ट्यूब्स में होने वाली सुजन को ब्रोंकाइटिस कहा जाता है | ब्रोंकियल ट्यूब्स (Bronchial Tubes) एक प्रकार की नालियां होती है जो फेफड़ों (Lungs) तक हवा को पहुँचाने के कार्य करती है | वैसे यह एक सामान्य स्थिति होती है लेकिन जब कभी उपरी श्वसन मार्ग में किसी वायरस के संक्रमण के कारण या हिमोफिलीक इन्फ़्लुएन्जि (Hamophile Influenza) और हिमोफिलीक स्त्रेप्तोकोकाई (Hamophile Streptococcai) के कारण होने वाले संक्रमण से इन नालियों में सुजन हो जाती है तब ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) की समस्या उत्पन्न होती है |

Bronchitis की समस्या में श्वसन मार्ग में तीव्र प्रदाह के साथ सुजन हो जाती है , जिससे रोगी को खांसी, कफ की शिकायत, श्वास लेने में तकलीफ और अस्थमा निमोनिया जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती है |

ब्रोंकाइटिस के प्रकार / Types of Bronchitis

ब्रोंकाइटिस दो प्रकार की होती है | तीव्र ब्रोंकाइटिस और दीर्घ ब्रोंकाइटिस |

  1. तीव्र ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis)
  2. दीर्घ ब्रोंकाइटिस  (Chronic Bronchitis)

तीव्र ब्रोंकाइटिस / Acute Bronchitis in Hindi

ब्रोंकाइटिस में तीव्र ब्रोंकाइटिस अधिक सामान्य स्थिति होती है | यह लम्बे समय तक नहीं चलती बल्कि जल्दी ही ठीक हो जाती है | यह विषाणुओं और सर्दी जुकाम के कारण प्राय: कमजोर रोगप्रतिरोधक (Immune) क्षमता के लोगों, बूढों , बच्चों और वक्ष स्थल की बिमारियों से पीड़ितों को जल्दी ही अपनी चपेट में ले लेती है |

 ब्रोंकाइटिस bronchitis in hindi

साथ ही वे बालक जो संक्रामक बुखारों जैसे मीजल्स, इन्फ्लुएंजा, कुकर खांसी आदि से पीड़ित होते है उनको भी तीव्र ब्रोंकाइटिस होने की सम्भावना रहती है | इसके उचित उपचार से जल्द ही इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है |

तीव्र ब्रोंकाइटिस के लक्षण / Symptoms of Acute Bronchitis

इसके निम्न लक्षण प्रकट होते है –

  • मंद बुखार के लक्षण जैसे – बेचैनी, सिरदर्द और भूख न लगना |
  • आरम्भिक लक्षणों में खांसी उत्पन्न होती है जो मामूली कफ युक्त बलगम के साथ होती है |
  • फ्लू में प्रकट होने वाले लक्षण जैसे – गले में दर्द, जुकाम, बुखार, शरीर में दर्द, घुटन, उल्टी या दस्त भी इसमें दिखाई देते है |
  • स्टर्नम (Sternum) के पीछे जलन और चुभन जैसा दर्द महसूस होता है |
  • बलगम युक्त खांसी अधिकतम 10 से 20 दिन तक रहती है इसके पश्चात सुखी खांसी की समस्या हो सकती है |
  • अगर खांसी में आने वाला बलगम हरे या पीले रंग का है तो निश्चित ही ब्रोंकाइटिस जीवाणु के सक्रमण के कारण पैदा हुई है |
  • रोगी की श्वसन प्रक्रिया कुछ तेज और थोड़ी कठिन हो जाती है |
  • गंभीर मामलों में श्वास लेने में कठिनाई भी अधिक गंभीर हो जाती है जिससे रोगी नीला पड़ जाता है |
  • वक्ष स्थल के परिक्षण में चिकित्सक को फेफड़ों में घरघराहट की हलकी आवाज सुनाई पड़ती है |

तीव्र ब्रोंकाइटिस की अवधि और उपचार की विधि / Period and Treatments of Acute Bronchitis

उचित उपचार से यह बीमारी कुछ ही दिनों में शीघ्रता से खत्म हो जाती है | बच्चो और बूढों में कभी कभार स्थिति गंभीर होने पर अर्थात प्रदाह (सुजन) की अधिकता होने पर निमोनिया जैसी समस्या पैदा कर सकता है | अगर बार – बार तीव्र ब्रोंकाइटिस हो रहा है तो आगे चल कर दीर्घ ब्रोंकाइटिस की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है |

इसके उपचार में रोगी को आराम करने की सलाह और अच्छे वायु संचारित गरम वातावरण में रहने की सलाह दी जाती है | साथ ही अधिक पेय पदार्थों के साथ हलके आहार को ग्रहण करवाना चाहिए | तरल पदार्थों को अधिक मात्रा में सेवन करना फायदेमंद है लेकिन कैफीन और ठंडे पेय पदार्थों का सेवन वर्जित होना जरुरी है , क्योंकि इससे रोग और गंभीर हो सकता है | आधुनिक चिकित्सा में इसके उपचार के लिए ब्रोंकाइटिस की दवा एक्स्पेक्टोरंट्स अर्थात बलगम के निष्काशन को बढाने वाली दवाइयों का सेवन करवाया जाता है | आयुर्वेद के अनुसार इसका उपचार आपको निचे वर्णित मिल जाएगा |

दीर्घ ब्रोंकाइटिस / Chronic Bronchitis

यह ब्रोंकाइटिस का दूसरा प्रकार है | यह भी दीर्घ अवरोधित वायुमार्गीय बीमारी है, जो तीव्र ब्रोंकाइटिस से अधिक गंभीर और अक्षमता दायक रोग है | यह रोग अक्षमता और मृत्यु का एक गंभीर कारण माना जा सकता है | स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषो में अधिक होता है | अधिकतर मध्यायु के पुरुषो में अधिक देखने को मिलता है | इसका मुख्य कारण धुम्रपान करना है |

धुम्रपान मुख्य कारण है लेकिन साथ ही वायु प्रदुषण, धुल – धुंए और सल्फर डाईऑक्साइड आदि के अधिक सम्पर्क में रहना भी इसका एक सहायक कारण बन सकता है | इसका आरंभ प्राय: अचानक होता है और सुबह के समय आने वाली खांसी ( जिसे धुम्रपान करने वालों की खांसी कहते भी कहते है ) , कफ युक्त बलगम की खांसी, कार्य करने पर श्वास फूलना आदि होते है |

दीर्घ ब्रोंकाइटिस के लक्षण / Symptoms of Chronic Bronchitis

  • सुबह के समय आने वाली तीव्र खांसी |
  • खांसी के साथ कफ की अधिकता , साथ ही कभी – कभार बलगम में खून भी दिखाई दे सकता है |
  • थोड़े से परिश्रम से श्वास फूलना |
  • खांसी लगातार आती रहती है | 3 – 4 महीने या इससे भी अधिक समय तक रह सकती है |
  • लक्षण बार – बार प्रकट हो सकते है |
  • धुम्रपान न छोड़ने पर शारीरिक अक्षमता अधि बढ़ जाती है एवं रोग के लक्षण भी अधिक बढ़ जाते है |
  • श्वास लेने में अधिक गंभीर कठिनाई महसूस होती है जिससे रोगी का रंग नीला पड़ जाता है |
  • चिकित्सकीय परीक्षणों से रक्त में ऑक्सीजन की भयंकर कमी देखि जा सकती है |
  • मानसिक भ्रामकता पैदा हो जाती है |
  • गंभीर अवस्था में रोगी मूर्छित होने लगता है उसके चहरे का रंग नीला हो जाता है | अगर समय पर नलिकाओं को फेफड़ों को ओक्सिजिनेट नहीं किया गया तो रोगी की मृत्यु हो सकती है |
  • हार्ट अटैक का खतरा भी रहता है |

दीर्घ ब्रोंकाइटिस का इलाज / Treatments of Chronic Bronchitis

  • शुरूआती अवस्थाओं में रोगी को धुम्रपान बिल्कुल बंद कर देना चाहिए | क्योंकि धुम्रपान करने से फेफड़े और अधिक प्रभावित होंगे | अगर रोगी धुम्रपान छोड़ दे तो समय के साथ उसके फेफड़े ठीक होने लगते है |
  • इस रोग का मुख्य कारण धुम्रपान है , इसलिए रोगी से धुम्रपान को छोड़ने या कम करने की कोशिश की जानी चाहिए |
  • वक्ष स्थल में संक्रमण की स्थिति में चिकित्सक कीमोथेरेपी देते है जो लगभग 10 दिन तक निरंतर दी जाती है |
  • अगर श्वास के साथ घरघराहट सुनाई पड़ता है तो आधुनिक चिकत्सा में श्वासनली को फ़ैलाने वाली दवाइयां दी जाती है |
  • इस रोग में गंभीर स्थिति में हृदय के दाहिने निलय पर अधिक तनाव पड़ता है अत: इसे कम करने के लिए रोगी को मूत्र वर्धक दवाइयां दी जाती है |

ब्रोंकाइटिस का आयुर्वेदिक उपचार / Ayurvedic Treatments of Bronchitis in Hindi

Bronchitis का आयुर्वेद से उपचार करवाने के लिए आप किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सम्पर्क कर सकते है | आयुर्वेद में ब्रोंकाइटिस का पूर्ण इलाज किया जाता है | इस प्रकार के रोगों के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में रोग की अवस्था और मनुष्य की प्रकृति के अनुसार उपचार निर्धारित किया जाता है | आपके शरीर में स्थित दोषों का शमन करके विभिन्न प्राकृतिक पद्धतियों एवं औषधियों से इसका इलाज किया जाता है | रोग की मुख्य जड़ को खत्म करने का कार्य किया जाता है जिससे की आगे चलकर आपको फिर इस रोग से पीड़ित न होना पड़े | साथ ही कुछ परहेज और नियम बताएं जाते है जो आपके स्वास्थ्य को उत्तम रखने में आपकी सहायता करते है |

ब्रोंकाइटिस होने पर घरेलु उपचार में आप इन निम्न को अपना सकते है –

  • सौंठ , कालीमिर्च और हल्दी – इन तीनो को सामान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले | नित्य इस चूर्ण से दो ग्राम की मात्रा में गरम पानी के साथ सेवन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ मिलता है | असमय आने वाली खांसी और कफ की सिकायत कम हो जाती है |
  • ब्रोंकाइटिस से पीड़ित बच्चों को दूध के साथ शहद का इस्तेमाल करवाना चाहिए | इससे उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और वे जल्दी ही इस रोग से मुक्त होंगे |
  • अगर श्लेष्मा की मात्रा अधिक हो तो सूखे आंवले का चूर्ण और मुलेठी का चूर्ण इन दोनों को सामान मात्रा में मिलाकर | सुबह – शाम एक चम्मच चूर्ण का इस्तेमाल गरम पानी के साथ करे | कफ धीरे – धीरे निकल जायेगा |
  • अदरक को कूटकर इसका एक चम्मच रस निकाल ले | अब इसमें एक चम्मच शहद मिलकर चाटें | ब्रोंकाइटिस के कारण आने वाली खांसी में लाभ मिलेगा |
  • तीव्र ब्रोंकाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को सितोपलादि चूर्ण को शहद के साथ इस्तेमाल करना लाभ देता है |
  • प्रारंभिक अवस्था में तुलसी, कालीमिर्च और अदरक को मिलाकर बनाई गई चाय आराम देती है |
  • अगर श्वास लेने में कष्ट हो तो उबलते पानी में कपूर डालकर इसे दिन में दो से तीन बार सूंघे | श्वास खुल कर लेने लगेंगे |
  • Ayurvedic Treatment of Bronchitis में लहसुन और बादाम के तेल की मालिश छाती पर करने से लाभ मिलता है |

और पढ़ें

ऑस्टियोपोरोसिस रोग क्या है ?

लहसुन खाने के फायदे 

पीरियड्स का रुक – रुक के आना 

Related Post

स्वस्थ दिनचर्या और स्वस्थ आहार – विहार = सम्... स्वस्थ दिनचर्या और स्वस्थ आहार - विहार वर्तमान समय में  प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रोग से पीड़ित है , चाहे वो रोग गंभीर हो या अल्प कालिक छोटा रोग ...
आयुर्वेदिक जात्यादि तेल को बनाने की विधि एवं स्वास... जात्यादि तेल / Jatyadi Tailam :- आयुर्वेद चिकित्सा में रोगोंन्मुलन के लिए तेल का प्रयोग भी प्रमुखता से किया जाता है | घावों के लिए , दुष्टव्रण (ठीक न ...
अकरकरा औषधि परिचय एवं स्वास्थ्य उपयोग या फायदे जान... अकरकरा - इस आयुर्वेदिक औषध द्रव्य से कम लोग ही परिचित है | आयुर्वेद के आर्ष संहिताओं में भी इस द्रव्यों का वर्णन उपलब्ध नहीं होता | इसका सर्वप्रथम वर्...
महानारायण तेल (Mahanarayan Tail) बनाने की विधि एवं... महानारायण तेल / Mahanarayan Tail in Hindi इस प्रशिद्ध आयुर्वेदिक तेल का वर्णन भैषज्यरत्नावली - वातव्याधि 26/343-354 में किया गया है | इसे वातव्याधियो...
Content Protection by DMCA.com

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.