बला (खरैटी) / Sida Cordifolia – खरैटी के गुण, उपयोग एवं फायदे |

बला (खरैटी) / Sidda Cordifolia in Hindi

परिचय – प्राय: सम्पूर्ण भारत में पायी जाने वाली औषधीय उपयोगी वनस्पति है | इसका झाड़ीनुमा क्षुप होता है जो 2 से 5 फीट तक ऊँचा हो सकता है | क्षुप पर हृदय के आकार के गोल और दन्तुर पत्र होते है जिनपर 8 से 10 रेखाएं होती है | इनकी लम्बाई 1 से 3 इंच और चौड़ाई 1 से 2 इंच की होती है |

बला (खरैंटी)

बला के क्षुप पर वर्षा ऋतू के आसपास पुष्प आते है जो पीले और सफ़ेद रंग के पतों की जड़ों में लगते है | खैरटी के बीज छोटे भूरे और काले रंग एक होते है | इनपर 2 – 3 धाराएँ होती है |

बला (खरैटी) के रासायनिक संगठन और गुण – धर्म 

खरैटी (बला) में विभिन्न प्रकार के एल्केलाइडस पाए जाते है | इसकी जडो में अल्कालॉयडस एफेड्रेन, फेनेथेलामाईन आदि पाए जाते है | साथ ही इसमें फायटेस्टोरोल और पोटेशियम नाइट्रेट आदि तत्व भी विद्यमान रहते है |

गुणों में यह लघु , स्निग्ध और पिच्छिल होती है | इसका रस मधुर एवं वीर्य शीत होता है | पचने के बाद बला का विपाक मधुर होता है | अपने इन्ही गुणों के कारण यह वात एवं पित्त का शमन करती है | इसके बीज बलवर्द्धक, वातहर, शुक्राणुओं की संख्या बढाने वाले एवं प्रजास्थापन आदि गुणों से परिपूर्ण होते है |

आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा में बला अर्थात खरैटी के बीज और जड़ का इस्तेमाल किया जाता है | इसके जड़ और बीजों के चूर्ण आदि की सेवन मात्रा 1 से 2 ग्राम तक ली जा सकती है |

बला (खरैटी) के विभिन्न भाषाओँ में नाम 


संस्कृत – बला , वाट्यालिका, खरय्ष्टिका |


हिंदी – खरैटी, बरियारी, वरियारा, सिमक आदि |


मराठी – चिकण, थोरला चिकण आदि |


गुजराती – बला, खरेटी, खपाट आदि |


अंग्रेजी – Country Mallow


लेटिन – Sida Cordifolia

बला (खरैटी) के स्वास्थ्य लाभ और फायदे 

आयुर्वेद में बला की जड़ और बीजों का प्रयोग औषध स्वरुप किया जाता है | प्राचीन समय से ही इस औषधीय क्षुप का प्रयोग वात, पित्त की समस्याओं में , शारीरिक बलवर्द्धन के लिए एवं महिलाओं के रक्तप्रदर और श्वेत प्रदर के रोगों का अंत भी करता है | खरैंटी के कुच्छ घरेलु नुस्खे हम यहाँ दे रहे जो आपके स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए लाभदायक होंगे |

  • पुरुषों के वीर्य में अगर शुक्राणुओं की कमी होतो – बला के बीजों के साथ , कौंच के बीज , शतावरी और गोखरू इन तीनो को मिलाकर चूर्ण बना ले | इस चूर्ण का इस्तेमाल रोज रात्रि को मिश्री मिले दूध के साथ 4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से जल्द ही शुक्राणुओं की बढ़ोतरी होने लगती है |
  • नपुंसकता जैसे रोग में भी इसके बीजों के चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करना लाभदायक होता है |
  • अधिक मूत्र आने पर खरैंटी की जड़ के चूर्ण को मिश्री के साथ सेवन करने से जल्द ही बार – बार पेशाब आने की समस्या में आराम मिलता है |
  • आयुर्वेदिक उपाय एवं घरेलु प्रयोग

  • शारीरिक रूप से कमजोर अगर इसके बीजो के चूर्ण का इस्तेमाल नियमित करे तो जल्द ही बल की वर्द्धि होती है |
  • खरैंटी शीत वीर्य की होती है इसलिए महिलाओं के रक्त प्रदर की समस्या में इसका प्रयोग लाभ देता है | बला की जड़ और कुशा की जड़ को सामान मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना ले और चावल के मांड के साथ इसका प्रयोग करे | जल्द ही आराम मिलेगा | यह नुस्खा मासिक स्राव अधिक आने की समस्या में भी प्रयोग किया जा सकता है |
  • महिलाओं के श्वेत प्रदर के रोग में भी इसकी जड़ का चूर्ण इस्तेमाल लाभदायक होता है | श्वेत प्रदर में बला की जड़ के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रयोग करने से लाभ मिलेगा |
  • ज्वर में इसकी जड़ का स्वरस बना कर पिने से लाभ मिलता है |
  • बला से बने तेल का इस्तेमाल मसाज में करने से मांसपेशियां मजबूत बनती है एवं नसों में रक्त का संचार भी ठीक होता है |
  • पेशाब में अगर रक्त आता हो तो बला की जड़ का क्वाथ बना कर इसका 50 मल की मात्रा में सेवन करने से फायदा मिलता है |

 

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