पेप्टिक अल्सर क्या है ? – कारण , लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

पेप्टिक अल्सर / Peptic Ulcers in Hindi

अल्सर का शाब्दिक अर्थ होता है घाव | पेप्टिक अल्सर एक पारिभाषिक शब्द है जिसके अंतर्गत गैस्ट्रिक अल्सर और ड्यूडिनल अल्सर दोनों आते है | इसमें से गैस्ट्रिक अल्सर अमाशय के छोटे मोड़ (Lesser curve) पर स्थित होता है एवं ड्यूडिनल अल्सर ड्यूडिनम के प्रथम भाग पर होता है | हालाँकि पेप्टिक अल्सर दो प्रकार का होता है लेकिन फिर भी इन दोनों के लक्ष्ण समान होते है और दोनों एक ही रोगी को नहीं होते  | दोनों में से ड्यूडिनल अल्सर दीर्घ एवं मुस्किल से ठीक होने वाला अल्सर होता है |

पेप्टिक अल्सर

सामान्य भाषा में समझे तो पेप्टिक अल्सर एक प्रकार के घाव होते है जो अमाशय की दीवारों पर कई कारणों से हो जाते है | पेट की अंदरूनी दीवारों एवं छोटी आंत आदि पर घाव होने को अल्सर कहा जाता है | यह एक घातक रोग है लेकिन उचित देखभाल और दवाइयों से इस रोग को जल्दी ही ठीक किया जा सकता है |

अल्सर के प्रकार / Types of Peptic Ulcers

पेप्टिक अल्सर दो प्रकार का होता है |

  1.  गैस्ट्रिक अल्सर
  2.  ड्यूडिनल अल्सर

गैस्ट्रिक अल्सर अमाशय या छोटी आंत के उपरी हिस्से में होता है अर्थात जहाँ अमाशय का Lesser Curve होता है वहां पर गैस्ट्रिक अल्सर होता है | ड्यूडिनल अल्सर ज्यादातर ड्यूडीनम के शुरूआती भाग पर होता है | इन दोनों प्रकार के अल्सर में बहुत सी समानताएं होती है लेकिन फिर भी ड्यूडिनल अल्सर ज्यादा गंभीर रोग है जो अधिक समय तक ठीक नहीं होता क्योंकि ड्यूडिनल अल्सर ज्यादातर ड्यूडीनम की Scarring से संभंधित रहता है , जिसके कारण उसका मार्ग संकरा हो जाता है एवं अमाशय देर से खाली होता है |

अल्सर के कारण / Causes of Ulcers

आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं के अनुसार अल्सर के वास्तविक कारण अभी तक अज्ञात है , लेकिन अधिकांस मामलो में कुछ ज्ञात पहलु जरुर होते है जैसे

  • अमाशय में अत्यधिक अम्ल – बहुत से मामलो में एसा ज्ञात हुआ है कि पेप्टिक अल्सर के अधिकांस मामलो में अम्ल का अत्यधिक श्रावन होता है अर्थात अतिअम्लता जिसे हाइपरक्लोरीडरिय भी कहते है |
  • आनुवंशिकता – पेप्टिक अल्सर को आनुवान्सिक रोग कह सकते है , क्योंकि जिन परिवारों में इसका इतिहास रहता है उनके वंशजो में अल्सर होने की सम्भावना अधिक होती है |
  • अत्यधिक धुम्रपान का सेवन करने से भी अल्सर होने की सम्भावना होती है |
  • अल्सर व्यस्को में अधिक होता है | अत: उम्र भी अल्सर का एक कारण माना जा सकता है | क्योंकि बालकों में इसके मामले विरले ही देखने को मिलते है |
  • तनाव , अधिक चिंताग्रस्त व्यक्ति भी इसकी गिरफ्त में आ सकते है |
  • अधिक मात्रा में चाय, कोफ़ी, शराब, खट्टे पदार्थ का सेवन भी इसका कारण बन सकता है |
  • एसे खाद्य पदार्थ जो बहुत अधिक अम्लीय होते है उनके अधिक सेवन से भी अल्सर हो सकता है |

पेप्टिक अल्सर के लक्षण / Symptoms of  Ulcers

दर्द / Pain

यह महत्वपूर्ण लक्षण है | उदर के उपरी भाग में दर्द का महसूस होना , इसकी कुछ विशेषताएँ होती है जैसे –

  1. जब कभी भारी भोजन किया जाता है तो तुरंत दर्द प्रारंभ जो जाता है | कभी कभार भोजन से पहले भी दर्द शुरू हो जाता है एवं कभी भोजन के बाद | ड्यूडिनल अल्सर की अपेक्षा गैस्ट्रिक अल्सर में भोजन के तुरंत बाद दर्द शुरू हो जाता है |
  2. ड्यूडिनल अल्सर में रोगी को भूख लगते ही दर्द शुरू हो जाता है | जब कभी भी रोगी को भूख लगती है उसी समय उसे दर्द शुरू हो जाता है | इस प्रकार का दर्द जलन युक्त होता है |
  3. दर्द रात्रि के समय अचानक से होता है जो रोगी को जगा देता है |

कुछ अन्य लक्षण / Some Other signs

  1. अल्सर का एक महत्वपूर्ण लक्षण यह भी होता है कि इसके लक्षण दौरों में आते है जो कई सप्ताह तक रह सकते है , और फिर बिना किसी इलाज के ही पूर्णतया ठीक भी हो जाते है | ये लक्षण दो या तीन महीनों के अन्तराल के बाद पुन: आ सकते है |
  2. पेट में हर समय जलन रहती है , रोगी को खट्टी डकारें आती रहती है |
  3. खाना खाते ही उल्टी होना एवं दर्द शुरू हो जाना भी इसका एक लक्षण है |
  4. शरीर में पित्त तीव्रता से बढ़ता है |
  5. चक्कर आना , अरुचि और कब्ज |
  6. मल त्याग के समय रक्त का आना |
  7. पेट में होने वाली जलन छाती तक बढ़ जाती है |
  8. रोगी चिडचिडा और अधिक क्रोधी हो जाता है |
  9. अल्सर के रोगी का शरीर हमेशा थका – थका महसूस करता है |
  10. पेप्टिक अल्सर होने पर खून की उलटी हो सकती है एवं मल भी काले रंग का हो जाता है |

अल्सर का आयुर्वेदिक उपचार  – Ayurvedic treatments of Ulcers

पेप्टिक अल्सर में आप इन आयुर्वेदिक उपचार अर्थात घरेलु नुस्खो को अपना सकते है , हालाँकि ये आयुर्वेदिक उपचार अल्सर रोग में फायदेमंद है लेकिन फिर भी अपने चिकित्सक से परामर्श जरुरी है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति , क्षमता और रोग की स्थिति अलग – अलग होती है |

और पढ़े – अस्थमा रोग इन हिंदी 

कुछ आयुर्वेदिक उपचार / घरेलु नुस्खे निम्न है –

  • अल्सर में संतरे के रस का सेवन फायदेमंद होता है | अगर जांच में पेट में घाव का पता चले तो नित्य सुबह – शाम आधा कप संतरे का ज्यूस ले , इससे जल्द ही घाव भर जाते है |
  • पिसे हुए आंवले का दो चम्मच चूर्ण रात को एक कप पानी में भिगों दे | सुबह उसमे आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ, चोथाई चम्मच जीरा और दो चम्मच मिश्री मिलकर सेवन करे |
  • एक छोटी हरड, एक चम्मच अजवायन, एक चम्मच जीरा, दो रति हिंग और दो चम्मच धनिया – इन सभी को मिलाकर इनका चूर्ण बना ले | अब इसकी दो खुराक बना कर , छाछ के साथ सेवन करे |
  • एक चम्मच आंवले के मुर्र्बे का रस और एक कप अनार का रस दोनों को मिलाकर सुबह के भोजन से पहले सेवन करे |
  • कच्चे केले की सब्जी बनाये और उसमे एक चुटकी हिंग मिला दे | इस सब्जी का सेवन करने से भी अल्सर में लाभ मिलता है |
  • एक चम्मच अजवायन, दो छोटी हरड एवं दो मुन्नका – इन तीनो की चटनी बना कर सुबह – शाम सेवन करे |
  • दो रति हिंग को गाय के घी में भुन ले अब इसमें एक चम्मच जीरा और एक चुटकी सेंधा नमक मिलकर इनका चूर्ण बना ले | इसे सुबह – शाम भोजन के बाद सेवन करे | अल्सर में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलेगा |
  • दो केलों को कुचल ले | अब इसमें 15 तुलसी के पतों का रस मिलाकर सेवन करे |
  • हमेशां रात को सोते समय पेट पर सरसों के तेल की मालिश करे |

 अल्सर के रोगियों के लिए सामान्य सलाह / General advice for Ulcers Patients

पेप्टिक अल्सर में भोजन करने के बाद अमाशय के उपरी भाग में दर्द शुरू हो जाता है | इसलिए भोजन के तुरंत बाद थोड़ी से हिंग को पानी में घोल कर सेवन करना चाहिए | इसके आलावा अधिक अम्ल पैदा करने वाले पदार्थो से दुरी बनानी चाहिए | दूध, दही , मावा और मैदा से बनी चीजो से परहेज करे | लौकी , तुरई , पलवल , पालक आदि की उबली सब्जियों का सेवन करने से रोग जल्दी ठीक होता है |

इन नियमो का पालन करे –

  • कभी भी भरपेट भोजन न करे | भोजन को नियमित अन्तराल से ले | क्योंकि जब अमाशय खाली रहता है तब उदर के उपरी भाग में दर्द होने की सम्भावना रहती है | इसलिए दिन में कई बार आहार ग्रहण करे , लेकिन अल्प मात्रा में |
  • तले हुए , अधिक मसालेदार, सिरकायुक्त भोजन से बचे |
  • धुम्रपान , तम्बाकू, शराब , कोफ़ी और अन्य नशीले और अम्लीय पदार्थो का सेवन न करे | क्योंकि इनका सेवन करने से रोग को ठीक होने में समय लगेगा |
  • सिरदर्द , रुमैटिज्म के लिए ली जाने वाली दवाइयों जैसे – एस्प्रिन आदि से दुरी बना ले | क्योंकि ये दवाइयां भी अल्सर पैदा करती है |
  • चिंता , निराशा और तनाव से दूर रहे | क्योंकि ये भावावेष अल्सर के लक्षणों को बढ़ावा देते है |
  • अल्सर में होने वाले दर्द को रोकने में दूध प्रभावी होता है | जब कभी भी अल्सर के कारण दर्द हो तो दूध का सेवन करना चाहिए | मार्किट में कई दवाइयां आती जिनमे दूध और एल्केली ठोस रूप में मिले रहते , अत: इनको चूसने से भी अल्सर का दर्द ठीक हो जाता है |
  • रोगी को व्यायाम करना आवश्यक होता है एवं समय – समय पर चिकित्सक की राय लेना भी आवश्यक है |
  • हमेशां उबले हुए पानी का सेवन करे |
  • चाय की जगह मौसमी , पपीते या सेब आदि के ज्यूस का सेवन किया जा सकता है |
  • बाजार के भोजन से दुरी रखे |

अगर आप कुछ अन्य जानकारी चाहते है तो हमें comment कर सकते है | यथासंभव सहायता की जायेगी |

धन्यवाद |

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