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भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम कैसे करे ? – इसकी विधि, लाभ एवं सावधानियां |

भ्रामरी प्राणायाम / Bhramri Pranayama

भ्रामरी शब्द भ्रमर से बना है जिसका अर्थ होता है “भौंरा”| भ्रामरी प्राणायाम करते समय साधक भौंरे के समान आवाज करता है , इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है | मन को प्रसन्न करने , क्रोध, मोह एवं परेशानियों से बचने के लिए इस प्राणायाम को अपनाया जा सकता है | इसमें उठने वाली भ्रामरी तरंगे मष्तिष्क को शांत एवं निर्मल करती है |

भ्रामरी प्राणायाम

घेरण्ड संहिता में कहा गया है की जब अर्ध रात्रि को सभी जीव – जंतु सो जाए व कोई शब्द न सुनाई पड़े तब साधक को एकांत में जाकर इसका अभ्यास करना चाहिए | इस प्राणायाम को करने से बहुत सी धवनियाँ जैसे – झींगुर की आवाज, बाँसुरी, बादलों के गरजने की ध्वनी, झांझ की ध्वनी , भौंरे की ध्वनी , तुरही, मृदंग और निरंतर अभ्यास से अंत में अनहद नाद सुनाई पड़ता है जो साधक की अंतिम अवस्था है | इसके पश्चात साधक को एक प्रकाश पुंज दिखलाई पड़ता है, जो साक्षात् परम ब्रह्म का ही एक रूप है |

इस प्रकार घेरण्ड संहिता बताती है की भ्रामरी कुम्भक के सिद्ध होने पर साधक के समाधी की सिद्धि हो जाती है | अनहद नाद के बारे में कहा गया है कि यह जप से आठ गुना उत्तम ध्यान है , ध्यान से आठ गुना तप है एवं तप से आठ गुना उत्तम अन्ह्द नाद (ईश्वरीय संगीत), जिससे बढ़कर उत्तम कुछ भी नहीं है |

भ्रामरी प्राणायाम करने का तरीका / विधि / How to do Bhramri Pranayama

  • सबसे पहले खुले , शांत व एकांत जगह को चुने |
  • सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन किसी एक आसन में बैठ जाए |
  • अब हल्का श्वास अन्दर ले |
  • अब अपनी तर्जनी अंगुली से अपने कानो को बंद कर ले |
  • थोड़ी देर कुम्भक करे |
  • अब एक लम्बी गहरी श्वास ले |
  • श्वास को छोड़ते हुए अपने कानों को बंद रखे या पुन: बंद एवं खोल सकते है | श्वास छोड़ते हुए भिनभिनाने की आवाज निकाले |
  • मन को शांत और ध्यान को अपने आज्ञा चक्र पर रखे |
  • यह पूरा एक चक्र हुआ , इस प्रकार 5 से 10 चक्र पूरा करे |
  • कई साधक तेज आवाज में भ्रामरी प्राणायाम करते है तो कई इसे धीमी आवाज में करते है | हालाँकि दोनों ही फलदायी है , लेकिन तेज स्वर में ज्यादा फायदा होता है |

भ्रामरी प्राणायम के लाभ / फायदे / Benefits of Bhramri Pranayama

  • भ्रामरी प्राणायाम को करने से मन शांत और प्रसन्न रहता है |
  • स्वर मधुर होता है एवं आवाज में मधुरता आती है |
  • सभी प्रकार के मानसिक रोग जैसे – तनाव, क्रोध, चिडचिडापन आदि दोषों का शमन होता है |
  • हृदय रोगी व High blood pressure आदि रोगों में लाभ मिलता है |
  • माइग्रेन जैसे रोगों में भी लाभ मिलता है |
  • मन को एकाग्र करने एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने में यह प्राणायाम लाभकारी है |
  • अनिद्रा रोग से छुटकारा मिलता है |
  • आध्यात्मिकता में भी लाभ मिलता है |

भ्रामरी प्राणायाम करते समय ध्यान रखने योग्य जानकारी

  • गुंजन करते समय ॐ की ध्वनि निकाली जा सकती है |
  • प्राणायाम करते समय मुंह को बंद रखे लेकिन दांतों को आपस में नहीं मिलाना चाहिए |
  • इस प्राणायाम को षणमुखी मुद्रा के साथ भी कर सकते है |
  • कभी – कभी भ्रामरी प्राणायाम करते समय भूलवश कुच्छ अन्य ध्वनियाँ निकलने लगती है | अत: इनका ध्यान रखना चाहिए |
  • हृदय रोगी बिना कुम्भक के भी इस प्राणायाम को कर सकते है |
  • ध्यान दे कानो को बंद करते समय कानो की उपस्थि को ही बंद करना चाहिए एवं इसे भी अधिक जोर से नहीं बंद करे | अर्थात कानो को बंद करते समय उपस्थि को हल्के तरीके से दबा कर बंद करे |

धन्यवाद |

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