मुलेठी – एक चमत्कारिक औषधि एवं इसके फायदे |

परिचय 

मुलेठी आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध जड़ी-बूटी अर्थात एक प्रसिद्ध औषधी है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में मुलेठी का इस्तेमाल कफज और पितज रोगों के निदानार्थ किया जाता है। मुलहठी का 6 फीट ऊँचा बहुवर्षायु झाड़ी नुमा पौधा होता है जो विशेषकर अरब, तुर्कि, मिश्र, ईरान, अफगानिस्तान, रूस, चीन और मध्य ऐशिया में पाया जाता है। हमारे भारत में भी अब जम्मू-कश्मीर, देहरादून और दिल्ली के आस-पास के इलाकों में उगाने की कोशिश की जा रही है। हमारे यहां कम मात्रा में उपलब्ध होने के कारण इसे विदेशों से ही आयात किया जाता है।

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मुलेठी का काण्ड और तना मधुर होता है इसीलिए इसे यष्टिमधु भी कहते हैं। मुलहठी चीनी से अधिक मात्रा में मिठी होती है। इसका झाड़ 6 फीट तक ऊँचा होता है। औषध उपयोग में मुलेठी की जड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी जड़ पीली, रवेदार और एक हल्की गंध वाली होती है। इसके पत्र 4-7 के समूह में लगते हैं। मुलहठी के पुष्प मंजरियों के रूप में लगते हैं जो हल्के गुलाबी या बैंगनी रंग के होते है। फली एक इंच लम्बी होती है जो पूरी तरह चपटी होती जिसमें दो-तीन गोल बीज होते है। मुलेठी की मूल धूसर रंग की होती है जिसका छिलका हटाने पर पीला रशेदार, झुर्रायुक्त जड़े निकलती हैं। इन जड़ों में भूमिगत काण्ड शाखाओं और प्रशाखाओं के रूप में निकलता है जिसे औषध उपयोग में लिया जाता है।

 

 

मुलेठी का रासायनिक संगठन

औषध उपयोगी मुलहठी के काण्ड में ग्लिसिराईजिन नामक मधुर क्षार पाया जाता है। काण्ड में एक स्टेराॅयड इस्ट्रोजन पाया जाता है। इसके अलावा ग्लूकोज, एस्पेरेजिन, राॅल, फाॅस्फोरस, कैल्सियम, विटामिन ए, विटामिन ई और मैग्नीशियम एवं पौटेशियम भी कुछ मात्रा में मिलता है जो इसे अधिक उपयोगी बनाता है।

मुलेठी के गुण – धर्म

यह मधुर रस की होती है। गुणों में यह गुरू और स्निग्ध होती है, मुलेहठी का वीर्य शीत एवं पचने के बाद इसका विपाक भी मधुर ही होता है। मधुर और शीत गुणों की होने के कारण यह वात और पीत शामक होती है। यही गुण इसे दाह-शामक, सुजन घटाने वाली और प्यास को बढाने वाली बनाते हैं। मुलेठी मृदु विरेचक भी होती है एवं यह वमन करवाने में भी सहयागी बनती है। अपने गुणों के कारण यह खांसी, श्वास और खूजली जैसे रोगों में भी बेहतरीन परिणाम देती है।

मुलेठी के पर्याय

संस्कृत – क्लीतनक, यष्टिमधु, मधुयष्टि, मधुक

हिन्दी – मुलेठी, मुलहठी, मीठी लकड़ी, जेठीमद

मराठी – ज्येष्ठि मद

बंगला – यष्टिमधु, मधुयष्टि

तेलगू – यष्टि मधुकम्

तमिल – अब्र मधुरम

अंग्रेजी – Licorice

लेटिन – Glycyrrhiza glabra

आयु वर्धक केशर click here

मुलेठी के फायदे और घरेलु प्रयोग Benefits of Mulethi in Hindi

 

  • अगर सीने में कफ जमा हो और छुटता ना हो तो 1 ग्राम मुलेठी के चूर्ण में चार-पांच कालीमिर्च पीसकर डालकर मिलाकर सेवन करने से कफ पतला होकर अपनी जगह छोड़ देगा। यह प्रयोग सुखी खांसी होने पर भी किया जा सकता है।
  • मुलेहठी की जड़ों को कुटकर क्वाथ स्वरूप करलें। अब एक गिलास पानी में डालकर उबालें जब पानी आधा रह जाये तो इसे ठंडा करके सेवन करने से गिली खांसी में आराम मिलता है।
  • मुंह में छाले हो गये हो तो थोड़ा सा मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ चाटने से छाले ठिक हो जाते हैं।
  • गले मे खराश होतो थोड़ा सा मुलेहठी का चूर्ण खाने से गले की खराश दूर होकर श्वर सुधरता है।
  • महिलाओं के मासिक धर्म सम्बंधी शिकायतों में मुलेठी के चूर्ण का नियमित प्रयोग उनकी सभी मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है।
  • अल्सर जैसी समस्याओं में मुलेहठी चूर्ण का नियमित इस्तेमाल करने से अल्सर और पेट के घावों में राहत मिलती है।
  • टी.बी. रोग में भी मुलेहठी का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। मुलेठी टी.बी. के रोगाणुओं को बढ़ने से रोकती है
  • मुलेठी के चूर्ण को घी के साथ मिलाकर सेवन करने से नपूसंकता मे फायदा होता है। नपूंसकता रोग में नित्य 6 ग्राम चूर्ण को गाय के घी के साथ मिलाकर खायें और ऊपर से मिठा गर्म दुध सेवन करें । जल्द ही नपूंसकता से छूटकारा मिलेगा।
  • शरीर कहीं से जल गया हो तो जले हुए स्थान पर मुलेठी और चंदन का लेप करने से जलन होना बन्द हो जाता है।
  • हिचकी आ रही हो तो मुलेठी का थोड़ा सा चूर्ण चूसलें । हिचकी आना बंद हो जायेगा।
  • धातुदर्बलता में 10 ग्राम मुलेहठी के चूर्ण के साथ 3 ग्राम घी और 2 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से धातु पुष्ट होती है।
  • हार्ट अटैक का खतरा हो तो मुलेहठी के साथ कुटकी चूर्ण मिलाकर सेवन करना शुरू करदें । हार्ट अटैक नही होगा।
  • दमा रोग में भी मुलेठी कारगर औषधी है। दमें रोग में 1 भाग मुलेठी का चूर्ण आधा भाग कालीमिर्च और चैथाई से भी कम सौंठ का चूर्ण – इन सभी को एक गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक पानी चैथाई न रह जाये। इस काढे का इस्तेमाल करने से दमा रोग में राहम मिलती है।
  • 60 ग्राम मुलेह्ठी और 25 ग्राम सनाय इन दोनो का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। दमा ठीक हो जायेगा। यह प्रयोग हल्का विरेचक है अर्थात इसका इस्तेमाल करते समय आपको हल्के दस्त भी लग सकते हैं। जो अच्छा संकेत हैं। यह प्रयोग आपके पुराने से पुराने दमें को भी ठीक कर सकता है।
  • मुलेठी को चबाने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है।
  • पेट में दर्द हो तो मुलेहठी और सौंफ दानो को समान मात्रा में मिलाकर एक गिलास पानी में डालकर पीने से पेट दर्द से राहत मिलती है।
  • मुलेहठी को चूसते रहने से बैठा हुआ गला भी ठीक हो जाता है।

 

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