चाय पीने वाले हो जाएँ सावधान – चाय पीने के नुकसान

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चाय पिने के शरीरिक नुकसान

आज के तीव्र जीवन में हरेक व्यक्ति स्फूर्ति और ताजगी के लिए दिन भर में 2 या 3 चाय तो आसानी से पीजाता है | घर में कोई मेहमान आये या किसी दोस्त का आना हो चाय के अलावा सत्कार के लिए दूसरी कोई चीज नहीं है | हम जाने – अनजाने में एक ऐसा जहर पी रहे है जो हमारे शरीर को खोखला किये जा रहा है | चाय हमारे शरीर में कई प्रकार से नुकसान दाई है | पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने कहा था कि ” यदि कोई मुझसे संसार की विषैली चीजों की सूचि बनाने को कहे तो मैं  ‘चाय’ को प्रथम स्थान पर रखूँगा | ”

चाय पिने के नुकसान

चाय या विष

निश्चित ही चाय ने जितना जनस्वास्थ्य ख़राब किया है उतना किसी अन्य पेय ने नहीं किया | भारत में लगभग 70% जनसँख्या चाय का सेवन करती है | चाय में कुल 10 प्रकार के जहर होते है | आइए जानते है इनके बारे में –

1 . टेनिन – टेनिन चाय में 18 % होता है जो रक्त में हिमोग्लोबिन बढ़ा देता है, पेट में घाव, गैस ( पेप्टिक अल्सर तथा गैस्ट्रेतिस) रोग पैदा करता है , मन्दाग्नि हो जाती है , भोजन पाचन क्रिया कमजोर पड़ती जाती है |

2 . थीन – थीन की मात्रा 3 से 6 % होती है | इसके प्रभाव से शरीर में खुश्की, फेफड़ो और दिमाग में भारीपन पैदा करता है |

3 . कैफीन – चाय में कैफीन की मात्रा 2.75 % होती है | कैफीन के अधिक सेवन से शरीर में तेजाब की मात्रा बढती है | शरीर में तेजाब की वर्द्धि के कारण गठिया , अनिद्रा , कमजोर गुर्दे , सर दर्द आदि लक्षण उभरने लगते है | इससे जल्द ही बाल सफ़ेद हो जाते है |

4 . वोलेटाइल आयल – चाय में पाए जाने वाले इस आयल से आँखे कमजोर होती है | अधिक इस्तेमाल से आँखों की ज्योति कमजोर होती है और अनिद्रा रोग बढ़ता है |

5 . कार्बोलिक एसिड – कार्बोलिक एसिड के कारण शरीर में बुढ़ापा जल्दी आती है एवं शरीर जल्दी बुढा होता है |

6 . पेमिन – पेमिन वैसे तो कोई अधिक नुक्सान नहीं करता लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर की पाचन क्रिया को बिगाड़ सकती है |

7 . एरोमैलिक आयल – चाय की पतियों में पाए जाने वाले इस आयल से आंतो में खुस्की  पैदा होती है |

8 . साईनोजन – चाय में पाए जाने वाले इस तत्व से शरीर में लकवा , चक्कर आना और अनिद्रा रोग बढ़ता है |

9 . ओक्जेलिक एसिड – ओक्जेलिक  एसिड शरीर से जितना दिनभर में ख़ारिज होता है , उसका चार गुना एक चाय के प्याले से शरीर में पंहुच जाता है |

10 . स्ट्रीकनायल – यह रक्त विकार , वीर्यदोष और नपुसकता का मुख्य कारण है | चाय के अधिक सेवन से शरीर में स्ट्रीकनायल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे शरीर की यौन क्रियाशीलता पर विपरीत असर पड़ता है एवं शीघ्रपतन , नपुंसकता और वीर्य विकार से व्यक्ति ग्रशित हो जाता है |

विश्व भर के कुछ प्रसिद्द डोक्टरों ने चाय पर किये गए अध्यनो से निष्कर्ष निकाला की चाय एक भयंकर विष है जो शरीर को धीमी गति से खोखला कर रहा है | यहाँ कुछ डॉ के निष्कर्ष है 

डॉ हैरी मिलर – ” चाय सेवन करने वालों के स्वप्नदोष , वीर्य शैथिल्य , नपुंसकता आदि बीमारियाँ हो जाती है |”

डॉ मारिया फिश्बेन – ” चाय से ब्लड प्रेशर बढ़ता है |”

Dr. B.W. Richardson – ” थके हुए मस्तिष्क को विश्राम की जरुरी होती है तो चाय उसे सुलाने के बजाय , कार्य करने के लिए बाध्य करती है जिसका परिणाम धीरे -धीरे मस्तिष्क को अवरुद्ध बना देता है |”

Dr. Adverd Smith – ” चाय पिने से शरीर को चुस्ती जैसा अहसास होता है लेकिन कुछ देर बाद जो थकान आती है , उससे शरीर बहुत दुर्बल हो जाता है |

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