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भांग – नशा नहीं औषधि है | जरुर आजमाए भांग के इन नुस्खों को

भांग / bhang

भांग / Bhang

भांग का क्षुप प्राय भारत में सभी जगह उगता है | भारत के तर क्षेत्रो में यह अधिक होता है | भारत में उत्तर प्रदेश , बिहार , पश्चिमी बंगाल और पंजाब में इसकी खेती सरकार की अनुमति लेकर की जाती है | इसका प्रयोग नशे और औषधियों में किया जाता है | इसका पौधा 3 से 8 फीट ऊँचा हो सकता है | यह वर्षायु क्षुप है जो बरसात के मौसम कई जगह अपने आप ही उग आता है | इसकी पतियाँ नीम की पतियों की तरह समान बनावट की होती है | भांग के ऊपर की पतियाँ 1 – 3 के समूह में लगती है एवं पौधे के निचे के भाग में लगी पतियाँ 3 से 8 खंडो में लगी रहती है |

यह  पौधा नर और मादा दोनों प्रजाति का होता है | भांग के नर पौधे की पतियों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है | इसके फुल छोटे एक लिंगी गुच्छेदार लगते है जो पीत हरिताभ रंग के होते है | भांग , चरस और गांजा तीनो नशीले पदार्थ इसीके पौधे से प्राप्त होते है | इसके मादा पौधे के फूलो को सुखाकर  गांजा तैयार किया जाता है | इसकी पतियों पर लगी राल से चरस प्राप्त की जाती है जो बहुत नशीला पदार्थ होता है |

भांग / bhang

भांग / bhang

भांग के बारे में सभी जानते है की यह एक नशीला पदार्थ होता है जिसको इसकी लत लग गई , शायद ही वो इसे छोड़ पाया हो | लेकिन इसके आलावा अगर उचित मात्रा में इसका सेवन किया जावे तो यह एक प्रकार की औषधि है |  अधिक मात्रा में सेवन शरीर को नुक्सान पंहुचता है |

भांग का रासायनिक संगठन

इसमें  एक प्रकार का उड़नशील तेल पाया जाता है | इसके आलावा इसमें राल , मोम , वसा , शर्करा , पोटेशियम नाइट्रेट पाया जाता है |

भांग के गुण धर्म

इसका का रस तिक्त और कषाय होता है | यह व्यवायी ,रुक्ष ,लघु , तीक्ष्ण, वेद्नास्थापन, आक्षेप हर , दीपन , ग्राही, शूल-प्रशमन, वाजीकारक और शुक्र्स्ताम्भन गुणों से युक्त होती है | यह उष्ण वीर्य की होती है | आयुर्वेद औषधियों जैसे लाई  चूर्ण, विजयावटी और जातिफलादी चूर्ण  आदि में इसका प्रयोग किया जात है |

 

 

भांग के फायदे

 

अल्जाइमर में भांग के फायदे

इसमें  टेट्राहैड्रोकैनाबिनोल नामक तत्व पाया जाता है , जो अल्जाइमर को ठीक करने में सहायता करता है | अल्जाइमर से जुडी एक पुस्तक में छपे लेख के अनुसार भांग का छोटी सी मात्रा में सेवन एमिलोय्ड के विकास को धीमा करता है | दर:शल एमिलोय्ड मष्तिष्क की कोशिकाओं को मारता है | इसलिए यह अल्जाइमर के लिए जिम्मेदार होता है | शोध के अनुसार भांग की अल्प मात्रा इसके विकास को धीमा कर के अल्जाइमर रोग में काफी फायदा पंहुचाती है |

कैंसर में भांग के फायदे

अमेरिका की एक सरकारी वेबसाइट ने 2015 में किये गए रिसर्च में बताया की भांग में पाए जाने वाला कैनाबिनॉएड्स तत्व शरीर में उपस्थित कैंसर कोशिकाओं को ख़त्म करने में कारगर है | दरशल कैनाबिनॉएड्स तत्व कैंसर के लिए जरुरी रक्त कोशिकाओ को  ख़त्म कर देता है | इसके इस्तेमाल से कोलन कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम  हो जाता है |

प्रतिरोधी तंत्र के इलाज में भांग का प्रयोग

हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधी क्षमता होती है जो जीवाणुओं का खात्मा कर के रोगों से बचाती है , लेकिन कभी कभार हमारा प्रतिरोधी तंत्र शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी ख़त्म करने लगता है जिसके कारण शरीर में इन्फेक्शन फ़ैल जाता है | साउथ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी में हुए शोध में बताया गया की भांग में पाए जाने वाले T.H.C इस ऑटोइम्यून बीमारी के लिए कारगर मोलिक्युल का डी.न.ए बदल देता है , जिससे इस बीमारी में राहत मिलती है |

कान दर्द में प्रयोग

आदिवासी इलाको में इसके पतों के रस से कान दर्द आदि का इलाज आज भी किया जाता है | इसको तीली के तेल में अच्छी तरह पक्का कर इसे छान ले और रुई की सहायता से 4 बूंद कान में टपकाए | कान में होने वाले दर्द से छुटकारा मिलेगा एवं कान में पड़ी हुई पस्स भी ख़त्म होगी |

अंडकोष वर्द्धि (Hydrocele) में प्रयोग

अंडकोष  वर्द्धि एक दुखदायी रोग है जिससे कई लोग परेशान रहते है | भांग अंडकोष वर्द्धि में काफी फायदेमंद साबित होती है | भांग के पतों को कूटकर इसकी लुग्दी बनाले , फिर किसी साफ़ सूती कपडे पर लपेट कर अन्डकोष पर बांधे | इस प्रयोग से जल्द ही  अंडकोष में आई सुजन उतर जाती है | आप भांग को पानी में भिगो कर इस पानी का इस्तेमाल भी करसकते है | इस भांग के पानी से अन्डकोशों को धोना होता है |

खांसी और दमा

खांसी होने पर 100 ml की मात्रा में कीकर की छाल का काढ़ा बना ले | अब 4 ग्राम – bhang , 8 ग्राम – पीपल , 12 ग्राम – हरड , 16 ग्राम – 20 ग्राम – अडूसा और 24 ग्राम – भारंगी इन सभी को कूट पिस कर चूर्ण बना ले | इस चूर्ण को तैयार काढ़े में मिलाकर – छोटी – छोटी  गोलियां बना ले | इन गोलियों को 2 – 2 की मात्रा में सुबह शाम सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है |

2 ग्राम कालीमिर्च और 2 ग्राम मिश्री – इन दोनों को पीसकर चूर्ण बना ले , अब 125 mg भांग को तवे पर अच्छी तरह सेक ले | इस सेकी हुई भांग को इस चूर्ण मिलाकर सेवन करे – दमे के रोग में आराम मिलेगा |

महिला गुप्तांग का ढीलापन

गलत तरीके से सहवास करने , अधिक प्रसव एवं अधिक सहवास करने से महिला गुप्तांग विस्तिरण हो जाती है जिससे महिलाओं को पुरुष समागम में आनंद नहीं आता |  इसके  इस्तेमाल से योनी का ढीलापन दूर होता है | भांग को कूट कर महीन चूर्ण बना ले | भांग के 5 से 6 ग्राम चूर्ण को साफ़ एवं महीन मलमल के कपडे में बांध कर पोटली बना ले और ऊपर से धागे से टाइट बांध कर धागे के एक सिरे को लम्बा छोड़ दे | रात्रि में सोते समय इस पोटली को पानी में भिगोकर गीला कर ले और अपने गुप्तांग में अन्दर तक सरका कर रख ले | सुबह उठते ही इस पोटली को गुप्तांग से बाहर निकाल दे | इस नुस्खे का प्रयोग तब तक करे जब तक आपकी गुप्तांग पूर्व की तरह टाइट न हो जाए |

 

आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताये |

धन्यवाद |

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