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सौंफ के फायदे – गर्मियों में कीजिये सौंफ का उपयोग और रहे स्वस्थ


सौंफ / Fennel 

सौंफ के फायदे

सौंफ से हर कोई परिचित है , इसका उपयोग सभी घरो में औषधीय एवं मसाले के रूप में किया जाता है | भारत में सर्वत्र इसकी खेती की जाती है | सौंफ का क्षुप 5 से 6 फीट लम्बा एवं अत्यंत सुगन्धित होता है | इसके खेत के पास से गुजरने पर भी आपको इसकी सुगंध से पता चल जाता है की यह सौंफ की खेती है | सौंफ के पत्र छोटे और पतले पक्षवत होते है जो जगह जगह से विभक्त एवं रेखाकार होते है | इसके पुष्प छोटे पितव्रण के और गुच्छों में लगते है , फल पीताभ हरे या भूरे रंग के 6 – 7 mm लम्बे सीधे या मुड़े हुए होते है |

सौंफ के पुष्प
सौंफ के फुल

सौंफ का रासायनिक संगठन 
सौंफ के बीजो में एनिथोल नामक सुगन्धित तत्व पाया जाता है , इसके आलावा प्रोटीन , दाय्तरी फाइबर , विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम आदि तत्व रहते है | इसके बीजो में 52% कार्बोह्य्द्रेड, 40% फाइबर, 15% फैट , 16% प्रोटीन और 9% जलियांश रहता है |
सौंफ के गुण-धर्म और रोगप्रभाव
सौंफ का रस मधुर और कटु एवं  गुण – लघु और स्निग्ध | यह शीत वीर्य और विपाक मधुर होता है | मधुर और स्निग्ध होने से यह पितशामक है | इसके आलावा मेध्य ( स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली ) , द्रष्टि वर्धक, तृष्णा हर, अनुलोमन, दीपन पाचन, कफशामक, ज्वरघ्न,मूत्रल एवं योनी शरल हर है |
सौंफ के प्रयोज्य अंग और सेवन विधि 
इसके बीज, तेल और जड़ औषध उपयोगी है | सेवन की मात्रा में बीज का सेवन 3 से 6 ग्राम, तेल का उपयोग 5 से 10 बूंद एवं अर्क का उपयोग 20 से 40 ml करना चाहिए |

सौंफ के फायदे एवं स्वास्थ्य प्रयोग 

➽ पित्त की अधिकता होने पर या शरीर में गरमी होने पर 10 ग्राम सौंफ को रात में एक मिटटी के बर्तन में भिगों दे , सुबह इस पानी में से सौंफ निकल कर सिलबट्टे पर पीस ले एवं भिगोये गए पानी के साथ मिश्री और पीसी हुई सौंफ को मिला कर पानी को पीजावे | इससे आपके शरीर में पित्त भी संतुलित होगा एवं त्वचा में निखार के साथ साथ आंखे भी तेज होंगी |
➽ अगर कब्ज की समस्या होतो सौंफ और मिश्री का चूर्ण बना ले | नित्य रात में सोते समय इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ सेवन करे जल्द ही कब्ज से छुटकारा मिलेगा |
➽ सौंफ के नित्य  5 ग्राम चूर्ण का इस्तेमाल मिश्री और दूध के साथ सोते समय करने से आँखों की रोशनी बढती है |
➽ मुंह में दुर्गन्ध आती हो तो सौंफ का इस्तेमाल करे |
➽ मरोड़ – आंव या दस्तों में 20 ग्राम सौंफ को तवे पर भुन ले | अब इसमें 20 ग्राम बिना बुनी सौंफ और 40 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करे | इससे आंव और मरोड़ की परेशानी नहीं होगी एवं दस्त भी रुकेंगे | 
➽ गले में खराश या गला बैठा हुआ हो तो 5 ग्राम सौंफ को यूँही चबा ले | गले की खराश और बैठे हुए गले में तुरंत आराम मिलेगा |
➽ नियमित सौंफ का सेवन आपको याददास्त को बढ़ता है |
➽ बच्चों में उलटी या अपच की शिकायत हो तो दो चम्मच सौंफ का चूर्ण बना ले और इस चूर्ण को एक कप पानी में उबाल कर काढ़ा बना ले | इस काढ़े की एक चम्मच बचे को पिलाने से उसके पेट की सभी समस्याओ में राहत मिलती है 
➽ सौंफ अच्छी रक्तशोधक होती है , इसका नियमित सेवन करने से रक्त की शुद्धि होती है जिसकारण यह त्वचा में भी निखार लाती है |
➽ सुखी खांसी होने पर सौंफ को भुन कर इसमें मिश्री मिलाकर सेवन करने से खांसी जल्दी ही ठीक हो जाती है |
➽ 5 ग्राम सौंफ को एक गिलास पानी में उबाल कर इसका काढ़ा बना ले और नित्य सेवन करने से आँतों की सफाई होती है |
➽ स्मरण शक्ति को बढ़ाने के लिए सौंफ , बादाम और मिश्री सामान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना ले और नित्य दूध के साथ सेवन करे | आपकी स्मरण शक्ति तेज होगी |
➽ अनियमित मासिक धर्म में महिलाओं को सौंफ के साथ सामान मात्रा में गुड़ मिलाकर सेवन करना चाहिए |
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