शिरोधारा एक प्राकृतिक मैडिटेशन – शिरोधारा से मिटाए अपने रोग |

शिरोधारा / Shirodhara 

शिरोधारा मुख्यतया धाराक्रम का एक भाग है, जिसे आयुर्वेद शास्त्रों में शिरोसेक के नाम से भी जाना जाता है | आयुर्वेद चिकित्सा में उर्ध्व्जत्रूगत (गर्दन से ऊपर ) रोगों में लाभ के लिए जब किसी औषध क्वाथ, तेल , घी या छाछ को सिर पर एक धारा के रूप में गिराया जाता है तो उसे शिरोधारा कहते है | 

https://www.swadeshiupchar.in/2017/05/benefits-of-shirodhara.html

शिरोधारा में आपके सिर के अग्र भाग यानी दोनों आँखों के एयेब्रो के बीच में  औषधीय द्रव्यों की एक पतली गुनगुनी धारा प्रवाहित की जाती है जिसके कारण आपको असीम शांति का अनुभव होता है , यह आपके केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है और आपको मैडिटेशन का अनुभव करवाती है | सिरदर्द , माइग्रेन , असमय बालो का गिरना या पकना ( सफ़ेद होना ), तनावग्रस्त, आँखों के रोग ,अनिद्रा, मानसिक रोग जैसे – भूलने की बीमारी , पागलपन, कमजोर याददास्त आदि रोगों में शिरोधारा बहुत अच्छा प्रभाव डालती है | शिरोधारा करवाते समय आप मैडिटेशन का अनुभव करेंगे जो आपको तनावमुक्त रखता है |

आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं अनुसार अगर देंखे तो शिरोधारा के दौरान जो तेल या औषध द्रव्य आपके मष्तिष्क पर एक निश्चित ऊंचाई ( 4 अंगुल ऊपर ) से गिराए जाते है वो आपके मस्तिष्क में दबाव और कम्पन पैदा करते है , शिरोधारा में द्रव्य मस्तिष्क के अग्र भाग  में गिराया जाता है इस जगह खोखले सायनस से यह कम्पन और अधिक तीव्र हो जाता है | अब अधिक तीव्र कम्पन प्रमस्तिष्क द्रव (Cerebrospinal fluid) के माध्यम से शरीर के अन्दर तक प्रवाहित हो जाते है | यह कम्पन और दबाव थेलेमस और प्रमस्तिष्क के अग्र भाग को सक्रीय करते है , जिससे सेरेटोनिन्न और केथेकोलामाइन की मात्रा को संतुलित होती है जो हमें गहरी नींद में ले जाती है और हमारा शरीर असीम शांति और स्वस्थता महसूस करता है |

शिरोधारा में उपयोग होने वाले औषध द्रव्यों के आधार पर शिरोधरा के चार प्रकार है |

1. तक्रधारा – शिरोधारा में जब चिकित्सकीय प्रक्रिया के लिए विशेष विधि से निर्मित औषधयुक्त तक्र ( छाछ) का इस्तेमाल किया जाता है तो यह तक्रधारा कहलाती है | इसका प्रयोग मोटापा, बालो की समस्याओ में , रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए, सिरदर्द और त्रिदोषज रोगों में किया जाता है |

2. तेलधारा – शिरोधारा के इस प्रकार में किसी विशेष रोग के लिए औषध युक्त तेल प्रयोग में लिया जाता है जिसकारण इसे तैलधारा कहते है |

3. क्षीरधारा – क्षीर दूध को कहते है | क्षीरधारा को  बलामूल, शतावरी मूल और दूध से बनाया जाता है | इसका इस्तेमाल उन्माद, अपस्मार,अनिद्रा और दाह रोगों में किया जाता है |

4. जलधारा – औषधि युक्त गुनगुने जल से जब शिरोधारा की जाती है तो यह जलधारा कहलाती है |

शिरोधारा के लाभ / Shirodhara Benefits

1. सिरदर्द में लाभकारी 
2. तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाती है |
3. अनिद्रा के रोग का शमन |
4. बालो के झड़ने और पकने से रोकती है |
5. रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है 
6. रक्तचाप को सामान्य करती है 
7. तनावमुक्त मस्तिष्क 
8.याददास्त और एकाग्रता में वृद्धि होती है 
9.त्वचा मुलायम और चिकनी होती है 
10. जरा को हरने वाली अर्थात बुढ़ापा देर से आता है 
11. शरीर के शुक्र और धातुओ को पुष्ट करती है 
12. दिमाग शांत होता है एवं शरीर मजबूत बनता है 
अगर जानकारी अच्छी लगी तो सोशल मीडिया पर एक शेयर जरुर करे , क्योकि आपका एक शेयर हमारे लिए एक प्रेरणा है जो हमें अन्य स्वास्थ्य से सम्बन्धित पोस्ट लिखने के लिए उर्जा देता है |
धन्यवाद |

Related Post

पीलिया रोग (Viral Hepatitis) – कारण, लक्षण, ... पीलिया (Jaundice in Hindi) परिचय - पीलिया यकृत की विकृति अर्थात यकृत के रोगग्रस्त होने के कारण होने वाला रोग है | यकृत के रोग ग्रस्त होने के बाद सबसे...
योग क्या है – इसका परिचय, परिभाषा, प्रकार, ल... योग / Yoga (कृपया पूरा लेख पढ़ें आप योग को भली प्रकार से समझ सकेंगे) - योग विश्व इतिहास का सबसे पुराना विज्ञानं है , जिसने व्यक्ति के अध्यात्मिक और शार...
अतिस – एक चमत्कारिक औषधि | अतिस के फायदे... अतिस - एक चमत्कारिक औषधि  बच्चो के पाचन संस्थान एवं श्वसन संस्थान की यह एक उत्तम औषधि है , जो हिमालय क्षेत्र में पायी जाती है | इसका क्ष...
रास्नासप्तक क्वाथ (Rasnasaptak Kwath) – फायद... रास्नासप्तक क्वाथ परिचय - यह एक आयुर्वेदिक प्रशिद्ध क्वाथ है जिसका उपयोग गंभीर आमवात की समस्या में किया जाता है | आयुर्वेद चिकित्सा में क्वाथ औषधियों ...
Content Protection by DMCA.com

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.