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बबूल ( कीकर ) के औषधीय उपयोग

बबूल / कीकर (Acacia ) के स्वास्थ्य लाभ – Health benefits of babul

सम्पुरण भारत में पाया जाने वाला एक कांटेदार वृक्ष होता है | कीकर के पेड़ से हम सभी परिचित है क्योकि आज भी भारत के गाँवो में यह दन्त मंजन का एक बेहतरीन विकल्प है और शहरों में भी इससे मंजन करने वालो की कमी नहीं जो इसके फायदे जानते है | बबूल (कीकर) की दो प्रजातीय है एक देसी बबूल और दूसरी मासकित बबूल | भारत के रेगिस्तान राजस्थान में यह बहुतायत से पाया जाता है | भारत सरकार ने रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने के लिए राजस्थान में इसके जंगल लगाये थे जो आज भी रेगिस्तान को बढ़ने से रोकते है | पर्यावरण को सुधरने में बबूल (कीकर) का अच्छा सहयोग है |

 

स्वास्थ्य की द्रष्टि से भी बबूल (कीकर) का भारत की देशी चिकित्सा पद्धति में खासा उपयोग है | आज की इस पोस्ट में हम आपको कीकर के स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताएँगे |
बबूल (कीकर) के गुण धर्म 
रस में – कषाय , गुण में – गुरु और रुक्ष , वीर्य – शीत एवं विपाक में कटु होता है |
बबूल (कीकर) के रोग प्रभाव 
यह कफपित शामक होता है और इसका निर्यास ( गौंद ) वातपित शामक होता है क्योकि इसका गौंद स्निघ्द और मधुर होता है |
बबूल / कीकर  के प्रयोज्य अंग – फल , गौंद और छाल |
बबूल / कीकर की सेवन मात्रा 

 

छाल का क्वाथ – 50 से 100 ml
फलों का चूर्ण – 3 से 6 ग्राम
निर्यास चूर्ण – 3 से 6 ग्राम

 

बबूल / कीकर  का विशिष्ट योग – ब्बुलारिष्ट , लावंगादी वटी आदि |

 

बबूल / कीकर के स्वास्थ्य लाभ / babul health benefits

 
1. खांसी में 
बबूल के गौंद के छोटे से टुकड़े को मुंह में लेकर चूसने से खांसी की समस्या में लाभ मिलता है | अगर खांसी पुराणी हो तो बबूल के पतों को पानी में डालकर उबाल ले और उस पानी का दिन में तीन बार प्रयोग करे पुरानी से पुरानी खांसी ठीक हो जावेगी |
2. मुंह के छालों में 
अगर मुंह में छाले हो गए हो तो बबूल की छाल को सुखा कर सका चूर्ण बना ले और  छालो वाली जगह पर लगावे ,  जल्दी  ही छाले ठीक हो जायेंगे |
बबूल / कीकर  का गौंद चूसते रहने से भी छाले ठीक हो आते है | बबूल , जामुन, और फिटकरी का काढ़ा बना कर इससे कुल्ले करने से मुंह के सभी रोग ठीक हो जाते है |
3. दांतों की समस्या में 
अगर आप नित्य रूप से बबूल / कीकर की टहनी से मंजन करते है तो आपको दांतों का कोई रोग नहीं सताता  |
दांत दर्द कर रहा हो तो बबूल की फली के छिलके की राख बना ले और उसमें नमक मिला कर मंजन करे सभी प्रकार के दांत के दर्द दूर हो जायेंगे |
दांतों में कीड़े लग गए हो तो बबूल छाल के काढ़े से दिन में 4 बार कुल्ला करे  |  इससे कीड़े मर जाते है और दांतों से खून आने की समस्या भी चली जाती है |
4. संक्रमण को रोकता है 
बबूल / कीकर  की छाल और पतियों से संक्रमण को रोका जा सकता है | शरीर पर कंही चोट या घाव हो तो पतियों को पिस कर लगाने से जल्दी घाव भरता है और संक्रमण भी नहीं होता |
5. पौरुष शक्ति 
जिनमे पौरुष शक्ति की कमी है वे बबूल (कीकर) के 100 ग्राम गौंद को भून ले और इसमें 500 ग्राम की मात्रा में अश्वगंधा मिलाले | सुबह – शाम 5 ग्राम की मात्रा में 15 दिन तक सेवन करे | शीघ्रपतन , वीर्य की कमी और धातु दुर्बलता में लाभ  मिलता है |
एक दूसरा प्रयोग बबूल की फलियों को  सुखा कर इसका चूर्ण बना ले और इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिला कर रोज रात् को 5 ग्राम्  की मात्रा में प्रयोग करे जल्दी ही वीर्य पुष्ट होगा |
 
6. ढीले स्तनों में 
बबूल / कीकर के फलियों का दूध को स्तनों पर लगाने से स्तनों में कठोरता आती है |
 
7. महिलाओ के अधिक मासिक धर्म में 
जिन महिलाओ को मासिक समय में अधिक रक्त निकलता है वे बबूल की छाल 30 ग्राम छाल को 500 ml पानी में डालकर काढ़ा बना ले और इस काढ़े का इस्तेमाल करे |
रक्त प्रदर में 5 ग्राम बबूल , 5 ग्राम गोंद, 5 ग्राम राल और सामान ही रसोत को मिलकर चूर्ण बना ले एवं इसका इस्तेमाल दूध के साथ 5 ग्राम की मात्रा में करे आपको लाभ होगा |
8. आँखों के रोग में 
बबूल के हरे पतों की लुग्धि बना ले और रात को सोते समय आँखों पर इसकी पट्टी बांध ले | आँखों के जलन , लालिमा और आंख दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है |
धन्यवाद |
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