मदनानन्द मोदक (Madnanand Modak) : फायदे, घटक एवं बनाने की विधि

मदनानन्द मोदक: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि मन को आनन्द देने वाला मोदक अर्थात मदनानन्द मोदक । यह मोदक पुरुषों के लिए जितना लाभदायक है उतना ही असरदार महिलाओं के लिए भी है अर्थात पुरुष और महिला दोनों ही समान रूप से इसका सेवन कर सकते हैं।

आज हम यहां आपको आयुर्वेद के मदनानंद मोदक के बारे में बताएंगे जो पुरुष को कामदेव के समान सुंदर और बलवान तथा स्त्रियों के समस्त प्रदर रोगों को दूर करके संपूर्ण नारीत्व का अहसास करवाता है।

आयुर्वेद के आचार्यों का मत है कि लगातार 3 सप्ताह तक इसका सेवन करने से पुरुष कामदेव के समान सुंदर, गरुड़ के समान दीर्घ दृष्टि वाला हो जाता है और वृद्ध पुरुष भी मदनानंद मोदक सेवन करने से युवा के समान सामर्थ्य युक्त हो जाता है।

मदनानंद मोदक

मदनानन्द मोदक का प्रयोग करने से नारी के गर्भाशय का शोधन होकर प्रदर रोगों को नष्ट करके तंदुरुस्त और बलवान पुत्र की प्राप्ति कर सकती है।

मदनानंद मोदक घटक द्रव्य और बनाने की विधि | Ingredients and Manufacturing Process of Madnanand Modak

मदनानंद मोदक क्या है और कितना उपयोगी है यह जानने के बाद अब हम आपको इसे बनाने की विधि और इसके फायदों के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार से देंगे तो चलिए जानते हैं मदनानन्द मोदक बनाने की विधि के बारे में

  • शुद्ध पारा-1 तोला
  • शुद्ध गंधक-1 तोला
  • लौह भस्म-1 तोला
  • अभ्रक भस्म-3 तोला
  • कपूर-1 तोला
  • सेंधा नमक-1 तोला
  • जटामांसी-1तोला
  • आंवला-1 तोला
  • इलायची-1 तोला
  • सोंठ-1तोला
  • काली मिर्च-1 तोला
  • पीपल-1 तोला
  • जायफल-1 तोला
  • जावित्री-1तोला
  • तेज पत्र
  • लौंग
  • जीरा
  • मुलेठी
  • बच
  • कूठ
  • हल्दी
  • देवदारू
  • हिज्जलबीज
  • सुहागा
  • भारंगी
  • नागकेशर
  • काकङासिंगी
  • तालीसपत्र
  • मुनक्का
  • चित्रक मूल की छाल
  • दन्तीमूल
  • बला
  • अतिबला
  • दालचीनी
  • धनिया
  • गज पीपल
  • शठी(कचूर)
  • सुगंधवाला मोथा
  • गन्ध प्रसारणी
  • बिदारीकन्द
  • शतावरी
  • आक की जङ
  • कोंच के बीज
  • गोखरू
  • विधारा के बीज
  • भांग के बीज

बनाने की विधि: प्रत्येक एक – एक तोला ले। इन सब का महीन चूर्ण बना ले। इस चूर्ण को शतावरी के रस से भावना देकर सुखा लें। फिर सेमरमूसली का चूर्ण 13 तोला, धुली हुई भांग का चूर्ण 32 तोला (भांग को घी में भूनकर डालें) एकत्रित कर बकरी के दूध में पीस लें। इसके पश्चात 2 सेर चीनी की चाशनी तैयार करें। आसन्नपाक होने पर उपरोक्त सब चीज मिला दें। पाक तैयार होने पर दालचीनी, तेजपत्ता, इलायची, नागकेसर, कपूर, सेंधा नमक, सोंठ और पीपल इन दवाओं का चूर्ण मिला दे, पाक जब ठंडा हो जाए तो 1 पाव घी और 1 पाव शहद मिलाकर रख लें। इस प्रकार मदनानंद मोदक तैयार हो जाता है ।

मदनानंद मोदक के घटक द्रव्य और बनाने की विधि जाने के बाद अब हम इसके गुण व फायदों को विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं मदनानंद मोदक से होने वाले फायदे

मदनानंद मोदक के फायदे | Benefits of Madnanand Modak

मदनानंद मोदक बनाने की विधि के बारे में जानने के बाद आप यह तो आप जान ही गए होंगे कि यह मन को आनंद देने वाला मोदक है अर्थात लड्डू है । मन को आनंद देने के साथ-साथ यह हमारे शरीर के अनेक रोगों को दूर करता है और हमारे शरीर के लिए बहुत ही गुणकारी मोदक है। अब हम यहां आपको मदनानंद मोदक के फायदों को बारे में बताएंगे कि यह हमारे शरीर के लिए किस प्रकार उपयोगी है।

वीर्यस्तंभन में सहायक मदनानन्द मोदक

स्त्री- संभोग के लिए सायंकाल इसका सेवन दूध के साथ करना चाहिए। आयुर्वेद के आचार्य का मत है कि लगातार 3 सप्ताह तक इसका सेवन करने से पुरुष कामदेव के समान सुंदर और घोड़े की समान बलवान हो जाता है और साथ ही में यह शीघ्रपतन को भी जड़ से खत्म कर देता है। जिसके कारण वीर्य स्तंभन होने के कारण पुरुष ज्यादा समय तक अपनी कामेच्छा को आसानी से पूर्ण कर सकता है।

बांझपन को दूर करने में सहायक मदनानंद मोदक

जो स्त्री बाझं है या बच्चे पैदा होते ही मर जाते हैं अथवा आर्तव आना ही बंद हो गया हो तो मदनानंद मोदक का प्रयोग कुछ महीने लगातार करने से गर्भाशय का शोधन होकर अच्छी तंदुरुस्त संतान पैदा होती है।

सूतिका रोगों में उपयोगी मदनानंद मोदक

बच्चा होने के बाद स्त्री बेहद कमजोर हो जाती है जिसके कारण कई बार स्त्री को ज्वर आने लगता है और स्त्री लगातार अपने शरीर में थकावट महसूस करती है ऐसी स्थिति में मदनानन्द मोदक का प्रयोग करने से स्त्री को ताकत मिलती हैं और धीरे-धीरे ज्वर भी खत्म हो जाता है।

वीर्य वर्धक भी है मदनानंद मोदक

वीर्य स्तंभन के साथ – साथ मदनानंद मोदक वीर्य वर्धक भी होता है। इसके अंदर अनेक ऐसी जङी – बुटी का प्रयोग किया जाता है जो पुरुषों और महिलाओं में बल – वीर्य को बढ़ाकर रति शक्ति की वृद्धि करता है।

शरीर को स्वस्थ व गर्म रखने में मददगार

आयुर्वेद के अनुसार मदनानंद मोदक का प्रयोग विशेष रूप से सर्दियों में करना चाहिए। जिससे शरीर में गर्माहट रहे और शरीर श्वांस, कास(खांसी), क्षयरोग आदि रोगों से दूर रहें।

इसके अलावा यह अपस्मार, ज्वर, उन्माद, शोथ, भगन्दर, अर्श, बहुमूत्र, शिरोरोग, अरूचि तथा कफज आदि रोगों को भी दूर करने मे भी सहायक है।

धन्यवाद ।

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