गूलर के औषधीय गुण, फायदे एवं सेवन कैसे किया जाता है ?

अथर्ववेद में कहा गया है कि गूलर फल का चूर्ण और विदारी कंद के कल्क का घी मिलाये हुए दूध के साथ सेवन करने से “ वृद्ध अपि तरुणायते “ अर्थात् बुढा भी तरुण के समान हो जाता है |

आज हम यहाँ आपको गुलर के औषधीय गुण, फायदे व सेवन विधि के बारे में विस्तार से बतायेगे जिससे आप भी इसका उपयोग करके इसका अनेक रोगों में फायदा ले सकते है तो चलिए जानते है –

गूलर के पेड़ की पहचान – गूलर को उदुम्बर, जन्तुफल, हेमदुग्ध, ऊमर आदि अनेक नामो से भी जाना जाता है | गूलर के पत्ते भी बड के पत्तो से मिलते हुए परन्तु उससे थोड़े छोटे होते है | गूलर के पेड़ पर किसी भी अंग पर चीरा देने से उसमें दूध निकलता है और इसके फल भी अंजीर के फलो की तरह ही होते है |

गूलर के गुण
गूलर के पौधे में लगे हुए फल

गूलर के ओषधीय गुण

चलिए जानते है गूलर के गुणों के बारे में अर्थात आयुर्वेद में इसके औषधीय गुणों के बारे में क्या बताया गया है –

  • गूलर शीतल होता है जिसके कारण यह गर्भ की रक्षा करने वाला होता है |
  • गूलर वर्ण (घाव )को जल्दी भरने वाला होता है |
  • गूलर हड्डी को भी जोड़ने वाला होता है |
  • गूलर गर्भ के लिए हितकर होता है और सभी प्रकार के योनी रोगों को दूर करता है |
  • गूलर के कोमल फल रक्त को साफ करते है और रंग को उज्ज्वल करता है |
  • गूलर के फल अत्यंत शीतल कफ, पित और अतिसार का नाश करने वाला होता है |
  • गूलर के फल शीतल होने के कारण जलन को भी शांत करते है |

गूलर के फायदे या उपयोग क्या है?

निम्न सूचि में हमने इसके फायदे एवं औषधीय उपयोगों के बारे में जानकारी दी है | आप इसके फायदे एवं उपयोग यहाँ से देख सकते है |

  1. गुलर का रस 5 -10 ग्राम मिश्री के साथ पीने से श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है |
  2. गूलर की जड़ की छाल को  में शक्कर मिलाकर पिलाने से पित ज्वर छुट जाता है |
  3. गूलर के दूध को दो बताशों में भर कर रोज खिलाने से मूत्ररोग मिटते है |
  4. गूलर के पेड़ के दूध में रुई का फाया भिगोकर भगन्दर के अंदर रखने से और उसे रोज बदलते रहने से कुछ ही महीनों में भगन्दर ठीक हो जाता है |
  5. गूलर की जड़ को कूटकर उसका काढ़ा करके पिलाने से गर्भस्त्राव रुक जाता है |
  6. गूलर के पिण्ड की छाल को पानी में पीसकर तालु पर लगाने से नकसीर बंद हो जाती है |
  7. गूलर के सूखे या हरे फलों का चूर्ण करके उस चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से खून की उलटिया बंद हो जाती है |
  8. गूलर की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांतों और मसूड़ों के रोग मिटते है और दांत मजबूत बनते है |
  9. गूलर के दूध को 10 से 20 बूंद तक जल में मिलाकर पिलाने से खूनी बवासीर और रक्त विकार मिटता है |
  10. गूलर के पत्तों का रस 5 मिलि और उसमे शहद मिलाकर पिलाने से रक्तपित मिटता है और खून के दस्त तुरंत रुक जाते है |
  11. गूलर की छाल के क्वाथ से साधारण और जहरीले सभी प्रकार के घावों को धोने से वह घाव जल्द भर जाता है |
  12. गूलर की जड़ में छेद करने से एक प्रकार का मद टपकता है उस मद को लगातार कुछ समय तक लेने से शरीर का बल बढ़ता है |
  13. गूलर की अंतर छाल को गाय या स्त्री के दूध में पीसकर छोटे बच्चो को पिलाने से भस्मक रोग (अत्यधिक भूख लगना )मिटता है |
  14. गूलर का फल खाने से पेट दर्द और आफरा मिटता है |
  15. गूलर के पके हुए फलों को सुखाकर उनका चूर्ण करके प्रतिदिन 1 तोले की मात्रा में जल के साथ लेने से पेशाब के साथ शक्कर आना बंद हो जाता है |

सेवन विधि क्या है ?

यहाँ ऊपर हमने इसके फायदे एवं उपयोगों में ही इसके सेवन की विधि के बारे में बताया है | अगर इसके चूर्ण का प्रयोग करना हो तो २ से ३ ग्राम की मात्रा में सेवन करना चाहिए | वैसे इसके छाल का काढ़ा, दूध एवं जड़ एवं फल का चूर्ण सेवन किया जाता है |

धन्यवाद |

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