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प्रदर रोग – प्रकार , कारण और उपचार – Leucorrhoea & Metrorrhagia (updated)

प्रदर रोग / Leucorrhoea & Metrorrhagia in Hindi

जब योनी मार्ग से पतला या गाढ़ा स्राव (रक्त रूपी या सफ़ेद पानी के रूप में ) कम या अधिक मात्रा में बिना किसी कारण के निकलने लग जावे तो उसे प्रदर रोग कहते है | महिलाओं में होने वाली सबसे अधिक दुखदायी बीमारियों में इसे गिना जा सकता है | वैसे अधिकतर मामलो में इसका उपचार आसानी से हो जाता लेकिन कई बार विलम्ब के कारण ये रोग जानलेवा भी साबित हो सकते है | प्रदर रोग दो तरह का होता है –

  • रक्त प्रदर / Metrorrhagia
  • श्वेत प्रदर / Leucorrhoea

रक्त प्रदर

इस रोग में महिलाओ की योनी से रक्त मिला रज  निकलने लगता है जो बहुत ही बदबूदार और गाढ़ा होता है | रक्त प्रदर महिलाओ का एक बहुत ही भयंकर रोग है जो बहुत कष्टकरी होता है | रोग बढ़ाने पर रज का रंग अधिक लाल या काला हो जाता है | यह मासिक धर्म से पहले , अधिक मात्रा में या कभी-कभी लगातार महीनो तक चलता रहता है सामान्यतया मासिक स्राव 4-5 दिन चलता है और इसकी मात्रा ओसतन 50 ml होती है | यदि यह 4-5 दिनों से अधिक और मात्रा में भी अधिक होने लगे तो यह रक्तप्रदर होने का संकेत होता है |

रक्त प्रदर के कारण

  • रक्त प्रदर के कारणों में आधुनिक मतानुसार गर्भाशय पेशी की गाँठ (Myomata), गर्भाशय की अंत:कला में सुजन या गर्भाशय भ्रंश (Prolapse of Uterus) आदि के कारण गर्भाशय में रक्त संह्वन अधिक होने लगता है जिसके कारण रक्तस्राव भी अधिक मात्रा में होता है |
  • हाइपर thyroidism, Myxodema, Acromegaly या अंत: स्रावी ग्रंथियों के विकार के कारण योनी मार्ग से अधिक मात्रा में रक्त निकलने लगता है |
  • इसके आलावा आयुर्वेद के अनुसार अधिक नशे का सेवन करने वाली महिलाएं , अजीर्ण , अपच के कारण भी रक्त प्रदर की समस्या हो सकती है |
  • विरुद्ध आहार का सेवन करने से |
  • गर्भपात के कारण
  • अधिक मैथुन करने के कारण |
  • शोक, भय, क्रोध, चिंता या द्वेष आदि मानसिक विकारों से अधिक ग्रषित रहने से भी रक्त प्रदर होने की आशंका रहती है |
  • कुपोषण , गर्भाशय पर चोट लगने या दबाव के कारण |

रक्तप्रदर के लक्षण

  • शरीर के सभी अंगो में टूटने के सामान पीड़ा होना |
  • जननांगो के समीप या कटी के समीप पीड़ा होना |
  • शारीरिक दुर्बलता |
  • चक्कर आना |
  • बेहोस हो जाना , अधिक प्यास का लगना |
  • शारीर में खून की कमी होना जिससे त्वचा , नाख़ून एवं आँखों आदि का पांडूवरण का हो जाना |

रक्तप्रदर के उपचार या इलाज

  • 6 ग्राम चन्दन का चूर्ण गुलाब के अर्क में मिला कर प्रयोग करे |
  • हरी – दुब को धोकर पिस ले | उसमे से दो चम्मच रस निकालकर शहद के साथ सेवन करे |
  • पेट पर गिल्ली मिटटी का लेप 10 मिनट तक लगावे |
  • बबुल की गोंद को देशी गाय के घी में पक्काकर पिस ले | अब इसमें सोना गेरू पिस कर समान मात्रा में मिलावे | 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन सुबह दूध के साथ सेवन करे |
  • बरगद के दूध की 5 बुँदे बताशे में रख कर खा ले | इसका सेवन सुबह शाम करे | रक्त प्रदर जल्दी ही ठीक हो जायेगा |
  • सिंघाड़े का हलवा लगातार 15 दिनों तक खाए | रक्त प्रदर में फायदेमंद होता है |
  • ध्यान दे – इन नुस्खो का उपयोग करते समय – घी , तेल. मिठाई और मिर्च मसाले की चीजो से परहेज करे |

रक्तप्रदर में आयुर्वेदिक दवाई

लाक्षा चूर्ण, स्वेत चन्दन चूर्ण  नागकेशर चूर्ण, शतावरी चूर्ण ,कामदुधा रस , प्रदरान्तक  रस , अशोकारिष्ट आदि | इन का सेवन चिकित्सक की देख रेख में करे |

स्वेत प्रदर

स्वेत प्रदर होने पर स्त्री की योनी से सफ़ेद रंग का चिकना स्राव पतले या गाढे रूप में बहार निकलने लगता है जिसे स्वेत प्रदर ( Leukorrhea ) कहते है | योनी से निकलने वाले इस चिकने स्राव से तिक्षण गंध आती है, जो असहनीय होती है  |सामान्यतया स्वेत प्रदर कोई रोग नहीं होता जबकि यह किसी अन्य रोग का लक्षण हो सकता है लेकिन फिर भी अगर अधिक मात्रा में यह स्राव शरीर से निकलता रहे तो शरीर में कमजोरी आ जाती है |

सामान्यतया महिला में सफ़ेद पानी का आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है | जब महिला उतेजित होती है तो उसके गुप्तांग से सफ़ेद स्राव निकलने लगता है जो सम्भोग के लिए बहुत जरुरी होता है | लेकिन यह उतेजित होने तक आये तो इसे स्वाभावीक मान सकते है परन्तु जब यह पुरे दिन आने लगे तो यह एक रोग का ही रूप ले लेता है | जिससे महिला का शरीर कमजोर होने लगता है | कई बार गर्भावस्था मे सफेद पानी आना शुरू हो जाता है लेकिन वह एक स्वाभाविक क्रिया जिसे श्वेत प्रदर नहीं माना जाता, लेकिन सूतिका काल के पश्चात अगर एसी समस्या होतो तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए |

श्वेत प्रदर के कारण

श्वेत प्रदर होने के लिए एक से अधिक कारण जिम्मेदार होते है | जैसे – अधिक उतेजित कल्पनाएँ , मासिक स्राव , खून की कमी , अधिक चिंता करने से , भय के कारण , अधिक सम्भोग करने से , एक से अधिक पुरुषो से सम्भोग करने से , गर्भाशय की सुजन के कारण , कब्ज , अजीर्ण ,गर्भवती होने पर , अश्लील वर्तालाप , मुख मैथुन , सम्भोग के समय गलत आशनो के प्रयोग से , गर्भपात होने से , सम्भोग के समय लगी कोई योनिगत चोट आदि स्वेत प्रदर के संभावित कारण हो सकते है |

श्वेतप्रदर के आयुर्वेदिक उपचार एवं घरेलु नुस्खे

स्वेत प्रदर से बचने के लिए सर्वप्रथम गुप्तांगो की सफाई बहुत जरुरी है | अगर कोई महिला सम्भोग के पश्चात योनी की सफाई अच्छी तरह नहीं करती तो उसे स्वेद्प्रदर की शिकायत हो सकती है | गुप्तांगो की सफाई के लिए सबसे अच्छा उपाय है – फिटकरी | फिटकरी को जल में घोल ले और इस पानी से योनी की अच्छी तरह सफाई करे | कुछ अन्य बेहतरीन उपचार निम्न है –

  • 10 ग्राम मुलहठी तथा 20 ग्राम चीनी – दोनों को पीसकर चूर्ण बना ले और आधा चम्मच की मात्रा में सुबह शाम दूध के साथ सेवन करे |
  • पके हुए केले में 1 ग्राम फिटकरी का चूर्ण भर ले और इसे अच्छी तरह चबा – चबाकर खाए | स्वेत्प्रदर रुक जायेगा |
  • अगर योनी से स्राव निकल रहा हो उस समय पेट पर ठन्डे गिल्ले कपडे को रखे यह बहुत फायदेमंद होता है |
  • अशोक की 50 ग्राम छाल को 2 किलो पानी में पकाए | जब पानी 1/4 भाग रह जावे तो इसे उतर कर ठंडा कर ले और किसी शीशे की बोतल में भर ले | अब रोज इसे दूध के साथ पीवे | यह उपाय स्वेत प्रदर में रामबाण साबित होता है |
  • गुलाब के 5 फूलो की पंखुडियो को मिश्री के साथ खाए | स्वेत प्रदर में लाभ मिलेगा |
  • मुली के पतों का रस पिने से भी स्वेत प्रदर ठीक हो जाता है |
  • तुलसी की पतियों का रस शहद के साथ चाटे | स्वेत प्रदर की समस्या नहीं रहेगी |

    पढ़े तुलसी के चमत्कारी लाभ

इसके अलावा कुछ आयुर्वेदिक औषधिया है जिनको आप ले सकती है – अशोकारिष्ट , अशोक घनवटी , प्रदरान्तक लोह और प्रदरहर रस आदि |

ध्यान दे – यहाँ पर बताये गए सभी प्रयोग आपके ज्ञान वर्द्धन के लिए है | बेहतर इलाज के लिए विशेषज्ञ की राय सर्वोपरि है |

धन्यवाद |

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