दशमूलारिष्ट के फायदे एवं खुराक | Dashmularishta benefits in Hindi

दशमूलारिष्ट आयुर्वेद की एक ऐसी शास्त्रोक्त ओषधि है, जो स्त्री के सम्पूर्ण जीवन के लिए एक वरदान है या ऐसा कहना भी गलत नहीं होगा की दशमूलारिष्ट नारी जाति को एक नया जीवन देती है क्योकि दशमूलारिष्ट में अनेक ऐसे द्रव्य होते है जो जीवनीय शक्ति अर्थात जीवन जीने की शक्ति को उत्पन करते है |

आज के इस लेख में हम आपको दशमूलारिष्ट के फायदे, घटक द्रव्य, नुकसान एवं खुराक आदि के बारे में जानकारी देंगे | तो चलिए सबसे पहले आपको बताते है दशमूलारिष्ट के घटक द्रव्यों के बारे में |

दशमूलारिष्ट
Baidyanath Dashmularishta

दवा का नाम दशमूलारिष्ट
प्रकार सिरप
सन्दर्भ भेश्ज्य रत्नाकर
उपयोग कामला,पांडू ,अर्श ,उदररोग ,धातुरोग ,वातरोग ,श्वास रोग ,बाझप्न ,अरुचि आदि रोगों में
निर्माता पतंजली ,बैधनाथ ,डाबर
खुराक 1 -2 तोला

दशमूलारिष्ट के घटक द्रव्य | Ingredients of Dashmularishta

  • शालिपरणी (Desmodium gangeticum)
  • पर्शिन परनी (Uraria picta)
  • बड़ी कटेरी (Solanum anguivi Lam.)
  • छोटी कटेली (Solanum xanthocarpum)
  • गोखरू (Tribulus terrestris)
  • बेल (Aegle marmelos)
  • गम्भारी (Gmelina arborea)
  • सोनापाठा (Oroxylum indicum)
  • पाटला (Stereospermum suaveolens)
  • अरणी (Premna serratifolia)
  • चित्रक मूल (Plumbago zeylanica Linn.)
  • पुष्कर मूल (Inula racemosa)
  • गिलोय (Tinospora cordifolia)
  • लोध्ध्र (Symplocos)
  • आवला (Phyllanthus emblica)
  • जवासा (Alhagi camelorum)
  • खैर की छाल (acacia catechu)
  • विजयसार (Pterocarpus marsupium)
  • कुठ (Saussurea Lappa)
  • मंजीठ (Rubia cordifolia)
  • देवदारु (Cedrus deodara)
  • सुपारी (Areca catechu)
  • पीपल (Ficus religiosa)
  • सफेद चन्दन (Santalum album)
  • कस्तुरी (Moschus)
  • वायविडग (Embelia ribes)
  • निशोथ (Operculina turpethum)
  • काकड़ासिंगी (Pistacia integerrima)
  • जीवक (Microstylis wallichii)
  • कचूर (Curcuma zedoaria)
  • काला जीरा (Bunium persicum)
  • जटामासी (Nardostachys jatamansi)
  • हल्दी (Curcuma)
  • नागकेसर (Mesua ferrea)
  • नागरमोथा (Cyperus scariosus)
  • मेदा (Polygonatum verticillatum)
  • महामेदा (Polygonatum cirrhifolium)
  • सुगंध बाला (Pavonia odorata)

दशमूलारिष्ट के फायदे | Benefits of Dashmularishta

प्राचीन समय में कहा जाता था की -स्त्री जाति को योवन्वस्था में कदम रखने के साथ ही दशमूलारिष्ट जेसी जीवनीय ओषधियों का सेवन शुरू कर देना चाहिए जिससे उसके सम्पूर्ण उदररोग ,धातुक्षय ,दुर्बलता ,बन्ध्या आदि दोष दूर हो और गर्भाशय की शुद्धी होकर एक स्वस्थ सन्तान का जन्म हो और प्रसव के उपरांत होने वाले विकार उत्पन ही न हो और यदि कोई विकार उत्पन भी हो जाये तो वह ज्यादा समय तक टिक न पाए क्योकि दशमूलारिष्ट में रोग प्रतिरोधक शक्ति उत्पन करने की ताकत होती है जिससे कोई भी रोग ज्यादा समय तक हमारे शरीर में टिक नहीं पाता है |

इम्न्युटी बढने में दशमूलारिष्ट का उपयोग

दशमूलारिष्ट में अनेक जीवनीय शक्ति बढनेवाला ओषधि होती है जो हमे रोगों से लड़ने में शक्ति देती है इसके निरंतर उपयोग करने से हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली मजबूत होती है और जल्द ही रोग हमारे शरीर से बाहर निकल जाते है |

तनाव कम करने में दशमूलारिष्ट का उपयोग

दशमूलारिष्ट शाररिक मजबूती के साथ -साथ मानसिक मजबूती भी प्रदान करता है ,इसमे अनेक ऐसी ओषधि होती है जो हमारे दिमाग को मजबूत बनती है और हमे मानसिक शान्ति देती है |

दुर्बलता में दशमूलारिष्ट का उपयोग –

किसी भी प्रकार की दुर्बलता चाहे वह धातुक्षय होने से हो या अजीर्ण से उत्पन हो ,सभी प्रकार की दुर्बलता में दशमूलारिष्ट का उपयोग किसी चमत्कार से कम नहीं है, कुछ दिन इसका लगातार उपयोग करने से दुर्बलता दूर होकर शरीर हष्ट -पुष्ट और कांतिमय दिखने लगता है |

जीर्ण संग्रहणी रोग में मन्दागिनी होकर शरीर क्रश हो जाता है ऐसे समय में भोजन करने के बाद दशमूलारिष्ट लेना अत्यंत लाभदायक होता है |

उदररोग में

कई बार भोजन का पाचन सही प्रकार से नहीं होने के कारण बदहजमी जेसी समस्या हो जाती है जिसके कारण पेट में दर्द होने लगता है ,दशमूलारिष्ट में अनेक ऐसी ओषधि होती है जो हमारी पाचन शक्ति को मजबूत बनाती है जिससे पाचन सही तरह से होने लगता है और भूख लगने लगती है |

कई बार पेट में अधिक वायु भरने के कारण भी तेज दर्द होने लगता है दशमूलारिष्ट वातरोग में भी बहुत फायदेमंद है |यह पेट के कीड़ो का समूल नाश करती है |

गर्भाशय विकारो में दशमूलारिष्ट का उपयोग –

गर्भाशय की शिथिलता या अन्य रोग विक्रति के कारण बार -बार गर्भस्राव हो जाना या गर्भ धारण ही न होना आदि रोगों में दशमूलारिष्ट का उपयोग करने से यह गर्भाशय का शुद्धीकरण करके गर्भाशय को सन्तान उत्पति के लायक बनाता है और गर्भाशय को मजबूती प्रदान करता है |

दशमूलारिष्ट के निरंतर उपयोग करने से बन्ध्या स्त्री को भी सन्तान सुख मिलता है ,यह स्त्री के तेज,वीर्य और बल को बढाता है |

प्रसव प्रकिया में दशमूलारिष्ट के फायदे –

प्रसव होना एक नैसर्गिक कार्य है | उसमे किसी की भी आवश्यकता न रहे ,यह स्थिति उतम मानी जाती है जगलों में रहने वाले प्राणियों के लिए प्रसव की चिंता का प्रश्न ही नहीं आता | उनके बिना कष्ट प्रसव होता रहता है |इस तरह नैसर्गिक नियमानुकूल रहने वाले मानवों (ग्रामवासियों ) के लिए भी ऐसा ही प्रतीत होता है | प्रसव होने पर अपने शरीर और बच्चे को नदी में बहते हुए शीतल जल से धो ,अपने गोद में सुलाकर फिरने वाली अनेक स्त्रीया इस नवयुग में भी प्रतीत होती है उनको प्रसूति ज्वर या प्रसव के बाद उत्पन होने वाला कोई विकार उत्पन नहीं होता है कारण उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति बलवान होती है दूसरी और नगरवासियों में प्रतिकार शक्ति निर्बल होती है अत इसके लिए द्श्मुलारिष्ट सूतिका रोग की उत्पति में प्रतिबन्धक रूप से उपयोगी है |

सूतिका रोगों में दशमूलारिष्ट के फायदे –

प्रसव के दोहरान यदि सावधानी न रखी जाये या प्रसव में ज्यादा समय लगे तो अनेक प्रकार के सूतिका रोग उत्पन हो जाते है जेसे ज्वर ,अधिक रक्तस्राव ,कामला ,पांडु ,थकान |

दशमूलारिष्ट डिलीवरी के बाद महिलाओं के मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देने में मदद करता है यदि डिलीवरी के तुरंत बाद इसे सूतिका को दिया जाये तो दर्द और थकान के कारण होने वाले ज्वर में जल्द ही लाभ पहुचता है | यह शाररिक कमजोरी को दूर करके जल्द ही स्वस्थ होने में मदद करता है यह महिलाओं के लिए एक पेन रिलीफ टॉनिक की तरह काम करता है |

दशमूलारिष्ट की खुराक | Dose

आसव एवं अरिष्ट औषधियों का प्रयोग समान मात्रा में जल मिलाकर किया जाता है | दशमूलारिष्ट की सामान्य खुराक 10 से 15 मिली समान जल के साथ सुबह – शाम सेवन की जा सकती है |

खुराक की अधिक एवं परिष्कृत मात्रा का निर्धारण आपके वैद्य द्वारा किया जाता है | यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपका शरीर एवं रोग की स्थिति क्या है | अत: रोग विशेष में सेवन से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें |

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