थायराइड को जड़ से खत्म करने के उपाय | Ayurvedic Remedies to get rid of Thyroid

थायराइड ग्रंथि की अतिसक्रियता के कारण यह रोग होता है | आयुर्वेद के अनुसार अनुचित आहार-विहार एवं त्रिदोषों के इम्बलेंस होने के कारण थायराइड की समस्या होती है | हमारे देश में हृदय विकार एवं मधुमेह के पश्चात थाइरोइड सबसे अधिक होने वाला रोग है | आज इस आर्टिकल में हम आपको थायराइड को जड़ से ख़त्म करने के उपाय बताएँगे |

हालाँकि यह रोग बहुत ही जटिल है लेकिन आप इन आयुर्वेदिक उपायों एवं उचित आहार – विहार से थायराइड को जड़ से खत्म कर सकते है |

यहाँ हमने थाइरोइड के कुछ आयुर्वेदिक उपाय एवं आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बताया है | चलिए इन उपायों एवं दवाओं के जानने से पहले थायराइड रोग के बारे में जानते है |

थायराइड क्या है ? | What is Thyroid in Hindi

यह एक हार्मोनल बीमारी है | यह गले में रहने वाली एक ग्रंथि है जिसका आकार तितली की तरह होता है | इसकी उपस्थिति गले के अन्दर कॉलरबॉन के ठीक ऊपर होती है | यह ग्रंथि थाईरोक्सिन नामक हार्मोन का उत्सर्जन करती है | अगर यह हार्मोन निश्चित मात्रा में बनता है तो समस्या उत्पन्न नहीं होती |

थायरोइड को जड़ से खत्म करने के घरेलु उपाय

लेकिन जब यह ग्रंथि हार्मोन कम या ज्यादा मात्रा में उत्सर्जित करने लगती है तो थायराइड रोग का कारण बनती है | यह रोग दो प्रकार का होता है |

  • हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)
  • हाइपोथायरॉइड (Hypothyroidism)

हाइपरथायरायडिज्म की समस्या थाईरोक्सिन हार्मोन के अत्यधिक उत्सर्जन के कारण होती है | वहीँ हाइपोथायरॉइड की समस्या थायराइड ग्रंथि द्वारा कम मात्रा में हार्मोन के उत्सर्जन के कारण होती है | इन समस्याओं में शरिर का वजन अधिक बढ़ना या घटना शुरू हो जाता है | अत: एसे में आयुर्वेदिक उपायों द्वारा इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है |

थायराइड के कारण | Causes of Thyroid

यह रोग निम्न कारणों से होता है | यह रोग स्त्री एवं पुरुषों दोनों को या किसी को भी हो सकता है | लेकिन स्त्रियों को यह समस्या अधिक देखने को मिलती है | इसके कुछ संभावित कारणों को हमने यहाँ निचे बिन्दुओं के माध्यम से बताया है |

  • अनुवांशिक कारण (पारिवारिक हिस्ट्री भी थायरोइड का एक कारण है)
  • अधिक आयोडीन युक्त दवाओं का लम्बे समय तक इस्तेमाल करना |
  • आर्थराइटिस, एनीमिया, डायबिटीज 1 एवं टर्नर सिंड्रोम जैसी बिमारियों से लम्बे समय तक ग्रस्त रोगी में भी थायरोइड होने की संभावना अधिक होती है |
  • 60 साल के पश्चात अधिक पनपता है |
  • आयोडीन की कमी से यह रोग होता है |
  • प्रसव पश्चात 5 से 9% महिलाओ को इसकी समस्या होती है जो अस्थाई है | अर्थात जल्द ही ठीक भी हो जाती है |
  • ऑटो इम्यून डिजीज भी थायरोइड का एक कारण है |
  • थाइरोइड ग्लैंड के अधिक एक्टिव होने से यह रोग हो सकता है |

थायराइड के लक्षण | Symptoms of Thyroid in Hindi

यह रोग होने से बहुत से लक्षण प्रकट होते है | लेकिन इसके लक्षण अन्य बिमारियों की तरह बहुत से मेल खाने वाले लक्षण होते है जिनका पता नहीं चलता कि आप थायराइड से पीड़ित है | मुख्यत: इसके लक्षण दो तरह से प्रकट होते है | एक अधिक हार्मोन स्रावित होने पर दिखने वाले लक्षण एवं दूसरा कम मात्रा में हार्मोन स्रावित होने के पश्चात दिखाई देने वाले लक्षण | चलिए in बिन्दुओं के माध्यम से आप इसके लक्षणों को समझ सकते है |

ओवरएक्टिव थायराइड में दिखाई देने वाले संभावित लक्षण

  • एंग्जायटी, इर्रिटाबिलिटी एवं उदानशीलता जैसे लक्षण प्रकट होते है |
  • आँखों से दिखाई देना कम हो जाता है एवं आँखों में जलन जैसी स्थति बनती है |
  • शरिर में उष्णता महसूस होती है |
  • मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होती है एवं साथ ही मांसपेशियों में एंथन भी बनती है |
  • वजन तीव्रता से कम होने लगता है |
  • थाइरोइड ग्लैंड बढ़ जाता है |
  • अनिद्रा की स्थिति उतन्न हो जाती है अर्थात नींद बहुत ही मुस्किल से आती है |
  • महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता की समस्या प्रकट होती है | पीरियड रुक – रुक के आना शुरू हो जाता है |

हाइपोथायराइडिज्म अर्थात कम हार्मोन स्रावित होने के संभावित लक्षण

  • थकान महसूस होना |
  • वजन बहुत ही तेजी से बढ़ने लगता है |
  • याददास्त कम होने लगती है |
  • अधिक माहवारी की समस्या से झूझना पड़ता है |
  • दोमुंहे एवं सूखे बाल भी इसका एक लक्षण है |
  • आवाज भी परिवर्तित हो जाती है |
  • शरिर का तापमान भी परिवर्तित होता रहता है |

थायराइड को जड़ से खत्म करने के घरेलु उपाय | Home remedies to get rid of Thyroid in Hindi

मुलेठी: आयुर्वेदिक मुलेठी में ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड पाया जाता है जो थायराइड ग्लैंड के ओवर एक्टिव होने को रोकने में मददगार साबित होती है | इसका सेवन करने से थायराइड की समस्या ठीक होने लगती है | मुलेठी का काढ़ा बनाकर इसका सेवन नियमित रूप से थाइरोइड की समस्या में किया जा सकता है |

अलसी चूर्ण: अलसी का चूर्ण भी थायरोइड की समस्या में बहुत फायदेमंद औषधि के रूप में देखा जाता है | इसके औषधीय गुण थाइरोइड को काम करने का कार्य करते है | अलसी चूर्ण को नियमित 2 से 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से थायरोइड ठीक होने लगता है |

अश्वगंधा चूर्ण: अश्वगंधा आयुर्वेद चिकित्सा का महत्वपूर्ण औषध द्रव्य है | इसका उपयोग विभिन्न रोगों में किया जाता है | इस रोग में भी यह चूर्ण अच्छा परिणाम देता है | अश्वगंधा चूर्ण को 3 से 5 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से थायरोइड में आराम मिलने लगता है |

प्राणायाम: इन जड़ी-बूटियों के अलावा प्राणायाम करना भी थाइरोइड की समस्या में लाभदायक साबित होता है | प्राणायाम या सूर्य नमस्कार नियमित रूप से करने से शरिर के दोष दूर होने लगते है एवं रोग में आराम मिलता है |

तुलसी एवं एलोवेरा: तुलसी के रस में एक चम्मच ग्वारपाठा का ज्यूस मिलाकर थायरोइड के रोगी को देने से काफी आराम मिलता है | तुलसी एवं एलोवेरा का कॉम्बिनेशन इस रोग में कार्य करता है |

आयुर्वेदिक दवा: लघुमालिनी वसंत वटी एवं आरोग्यवृद्धिनी वटी इन दोनों आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल थायरोइड के उपचार के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक अधिक करवाते है | बहुत से रोगियों को इस योग के सेवन तुरंत एवं स्थाई रिजल्ट मिलता है | अत: इन आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन वैद्य सलाह से किया जासकता है |

दूध एवं दही: आयुर्वेद चिकित्सा में इस रोग का उपचार करते समय दूध एवं दही को पथ्य अर्थात लेने योग्य आहार माना है | दूध एवं दही का इस्तेमाल करने से थायरोइड की समस्या कम होती है |

बादाम का उपयोग: थायरोइड की समस्या में गले में सुजन आ जाती है | बादाम के साथ अखरोट मिलाकर नियमित सेवन करने से इस रोग में काफी आराम मिलता है |

लौकी एवं गेंहू के जवारे का रस: थायरोइड को जड़ से खत्म करने के लिय घरेलु उपायों के रूप में लौकी एवं गेंहू के जवारे का रस ताजा निकाल कर नियमित रूपसे पीने से आराम मिलता है | यह रोग की तीव्रता को कम करने का कार्य करता है |

धन्यवाद |

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