वृहत् वात चिंतामणि रस के फायदे, उपयोग, घटक द्रव्य, खुराक एवं निर्माण विधि | Brihat Vaat Chintamani Ras in Hindi

वृहत् वात चिंतामणि रस के फायदे: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि वृहत अर्थात बड़ी – बड़ी वात से होने वाले रोगों और उनकी चिंता को जड़ से खत्म करने के लिए एक मणि की तरह काम करे वह है वृहत वात चिंतामणि रस | यह रस नींद न आना ,पित्त सम्बन्धी रोग ,उन्माद ,आक्षेपक ,हिस्टीरिया ,मष्तिष्क की ज्ञान वाहिनी नाडी के दोष से उत्पन होने वाले रोगों में ,वात -कफ नाशक ,वाजिकरण,सन्निपातज्वर में नाडी क्षीणता, हाथ-पैर कांपना, पसीना अधिक होकर शरिर ठडा पड़ जाना आदि रोगों में रामबाण ओषधि है | आयुर्वेद में वात रोगों में इस ओषधि के बारे में प्रशसा की गयी है |

आज के इस लेख में हम आपको वृहत् वात चिंतामणि रस के फायदे, घटक द्रव्य, इसकी खुराक एवं निर्माण की विधि के बारे में बताएँगे | आप इस लेख के माध्यम से वृहत् वात चिंतामणि रस के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते है |

वृहत् वात चिंतामणि रस के फायदे
दवा का नामवृहत् वातचिंतामणि रस
निर्माता कंपनीबैद्यनाथ, पतंजलि, धूतपापेश्वर, कालेडा, धन्वन्तरी आदि
उपयोगसमस्त वातविकार एवं मस्तिष्क विकारों में लाभदायक
मूल्यRs. 2000 (30 Tab)
खुराक1 से 2 गोली वैद्य सलाह अनुसार

वृहत् वात चिंतामणि रस के घटक द्रव्य | Brihat Vat Chintamani Ras Ingredients in Hindi

यहाँ हमने इसके घटक द्रव्यों के बारे में बताया है | ये सभी घटक द्रव्य की सूचि रस तंत्र सार संग्रह के अनुसार हमने उपलब्ध करवाई है |

  • स्वर्ण भस्म
  • चांदी भस्म
  • अभ्रक भस्म
  • मौक्तिक भस्म
  • प्रवाल भस्म
  • लोह भस्म
  • रससिंदुर
  • भावनार्थ ग्वारपाठा

निर्माण विधि (बनाने की विधि) | How to be manufactured

स्वर्ण भस्म 1 तोला ,चांदी भस्म 2 तोला, अभ्रक भस्म 2 तोला, मोती भस्म या पिष्टी 3 तोला, प्रवाल भस्म या पिष्टी 3 तोला, लोह भस्म 5 तोला, रससिंदूर 7 तोला ले | सबसे पहले रससिंदूर को खूब महीन पीसे ,फिर अन्य सब दवाओं को मिलाकर ग्वारपाठे के रस में मर्दन कर 1-1 रती की गोलियां बना , सुखाकर रख ले |

यह गोलियां वृहत् वात चिंतामणि रस कहलाती है | यहाँ निचे आप वृहत् वात चिंतामणि रस के फायदे एवं चिकित्सकीय उपयोग के बारे में जानेंगे |

वृहत् वात चिंतामणि रस के चिकित्सकीय उपयोग | Clinical Uses of Vrihat Vat Chintamani Ras

  1. ह्रदय रोग में
  2. उन्माद (पागलपन)
  3. हिस्टीरिया (दिमागी रोग)
  4. सन्निपातज्वर
  5. वाजीकरण
  6. कटिवात (कमरदर्द)
  7. पक्षाघात अर्थात लकवा
  8. धनुर्वात (शरिर टेडा होना)

वृहत वात चिंतामणि रस के फायदे | Benefits of Brihat Vaat Chintamani Ras in Hindi

ह्र्दय रोग में – यह रस ह्र्दय सम्बन्धी रोगों को दूर कर ह्र्दय को उतम बल प्रदान करता है | ह्र्दय रोगों में अर्जुन की छाल का रस या अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ उपयोग में लेने से उतम लाभ मिलता है |

हिस्टीरिया – यह रोग मुख्य रूप से युवतियों में होता है |इस रोग के शुरुआत में म्नोव्रती ,विवेकशक्ति और वात नाडी में विकार उत्पन होता है ,फिर गर्भाशय में विक्रति आ जाती है इस रोग में अति हास्य या अति रुदन ,घबराहट ,श्वासावरोध ,कंठावरोध आदि लक्ष्ण उत्पन होते है |कई बार रोगी गिर जाता है फिर भी उसे चारो और से व्यवहार का ध्यान रहता है परन्तु वह बोल नहीं पाता है ऐसे समय में यह रस उसके मष्तिष्क को बल देकर विकार के कारण आई मानसिक विकृति को दूर करता है |

सन्निपात ज्वर – जब बुखार में वातप्रकोप होकर मंद मंद आलस्य, नाडी में कमजोरी महसूस होना, हृदय में घबराहट एवं हाथ पैरों में कम्पन हो तो समझना चाहिए की यह सन्निपात ज्वर के बायु प्रकोप के लक्षण है | इसमें ताग्रादी अनुपान के साथ वृहत वात चिंतामणि रस का उपयोग करने से रोग में तुरंत आराम मिलता है |

प्रसव पश्चात की दुर्बलता – प्रसव होने के पश्चात आई दुर्बलता एवं सूतिका रोगों को ठीक करने के लिए यह दवा लाभदायक है | यह सूतिका रोगों में तीव्रता से लाभ पहुंचती है | वृद्धावस्था में वातवृद्धि होने और दुर्बलता आने पर यह रसायन जादू की तरह कार्य करता है |

कमर दर्द – कर्मचारीगण या व्यापारी गण जो अधिकतर बैठे – बैठे कार्य करते है | उनको कटीवात की समस्या हो जाती है | एसे में यह वात विकृति को दूर करके रोग में लाभ प्रदान करती है | यह कमर के स्थान की वातवाहिनियों पर कार्य करके कटीवात को दूर कर देता है |

मष्तिष्क विकार – ग्रीष्म प्रदेश में रहने वालों में पित्तप्रधान प्रकृतिवालों को वातप्रकोप होकर मस्तिष्क में पीड़ा, बैचेनी, हाथ पैरों में जलन, एवं दर्द आदि होता है एसे में इस दवा के उपयोग से लाभ मिलता है |

नपुंसकता – शुक्र के दुरूपयोग से अगर नपुंसकता आई हो तो वृहत वातचिंतामणि रस के सेवन से यह दुर्बलता दूर होती है | साथ ही यह शुक्रस्राव का भी दमन करती है |

मानसिक श्रम के कारण आई कमजोरी में फायदे – विद्यार्थी वर्ग एवं अधिक मानसिक कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए यह रसायन उत्तम गुणकारी है | अधिक मानसिक श्रम करने से मस्तिष्क की निर्बलता, शिरदर्द, चक्कर आना, कमजोर याददास्त आदि समस्याएँ हो जाती है | एसे में इस औषधि का प्रयोग वैद्य सलाह अनुसार करने से अत्यंत लाभ मिलता है |

वृद्धावस्था – बुढ़ापे में वात वृद्धि होने के कारण शरिर में कमजोरी आ जाती है | हाथ पैर सुन्न होने लगते है, थकान रहती है तो यह दवा कारगर है | इसमें स्वर्ण भस्म, रजत भस्म एवं लौह भस्म है जो रक्त को सुद्ध करके वातवाहिनी की विकृतियों को दूर करती है |

वृहत् वात चिंतामणि रस की खुराक | Doses of Vrihat Vat Chintamani Ras in Hindi

इस औषधि का सेवन वैद्य सलाह अनुसार किया जाना चाहिए | इसकी सामान्य खुराक 1 से 2 गोली नागरबेल के पान के साथ दिन में 2 बार तक चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन की जा सकती है | हिस्टीरिया रोग में जटामांसी के क्वाथ के साथ इसका प्रयोग बताया गया है |

वृहत् वात चिंतामणि रस के सेवन की सावधानियां | Precaustions of Brihat Vaat Chintamani Ras in Hindi

  • इस औषधि में रस औषधियाँ है अत: परामर्शानुसार ही सेवन करना चाहिए |
  • वृहत वातचिंतामणि रस में भस्मों का समावेश है अत: वैद्य सलाह से ही उपयोग में ली जानी चाहिए |
  • निर्देशित मात्रा में ही इसका सेवन करें अधिक मात्रा में सेवन करने से सीने में जलन एवं पेट दर्द जैसी समस्याएँ पैदा कर सकती है |
  • गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन देख रेख में ही किया जाना चाहिए |
  • छोटे बच्चों को वैद्य सलाह से उपयोग करवाई जानी चाहिए |
  • अनुपान रूप में नागरबेल का पान या वैद्य निर्देशित औषध का ही सेवन करना चाहिए |

धन्यवाद |

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