भृंगराज तेल बनाने की शास्त्रोक्त विधि | Classical Method of Making Bhringraj Oil in Hindi

भृंगराज तेल बनाने की विधि : भृंगराज तेल या महाभृंगराज आयल को बनाने की अगर आप शास्त्रोक्त विधि जानना चाहते है तो यह आर्टिकल आपको पूरी जानकारी उपलब्ध करवाएगा | भृंगराज तेल आयुर्वेद चिकित्सा के तेल प्रकरण की शास्त्रोक्त औषधि है | भृंगराज तेल का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्य रत्नावली में मिलता है |

यहाँ हम आपको महा भृंगराज तेल को ग्रंथों के अनुसार बताई हुई विधि से बनाने की जानकारी देंगे | यह तेल असमय बालों का झड़ना, सफ़ेद होना, एवं सिरदर्द जैसी समस्याओं में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि की तरह कार्य करता है |

इसे सिर पर लगाने के अलावा आयुर्वेद में भृंगराज तेल से नस्य भी लिया जाता है | सिर के रोग, मष्तिष्क विकार, गले के रोग, कान के विकार एवं आँखों के लिए इसका नस्य आयुर्वेद में बताया गया है | नस्य किसे कहते है जानने के लिए निचे लिंक दिया है उसके माध्यम से आप नस्य के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते है |

अधिक जानें : नस्य कर्म क्या है एवं इसके फायदे क्या है ?

भृंगराज तेल का शास्त्रोक्त विवरण | Classical Details of Bhringraj Oil in Hindi

यहाँ निचे हमने भृंगराज तेल का शास्त्रोक्त विवरण आपको उपलब्ध करवाया है इसके माध्यम से आप इस औषधीय तेल के बारे में शास्त्रोक्त जानकारी प्राप्त कर सकते है |

शास्त्रोक्त नाम / Classical Nameभृंगराज तेल
संदर्भित ग्रन्थ / Referenced Texभैषज्य रत्नावली
घटक की मात्रा / Number of Ingredients16
रोगोपयोग / Usesशिरोरोग, कान, आँख, गले के रोग
श्रेणी / Category तेल प्रकरण

भृंगराज तेल के घटक द्रव्य | Ingredeints of Bhringraj Oil in Hindi

निम्न सारणी से आप महा भृंगराज तेल को बनाने में काम आने वाले घटक द्रव्य अर्थात जड़ी – बूटियों की जानकारी प्राप्त कर सकते है |

  • तेल तेल – 1280 ग्राम
  • भृंगराज स्वरस या क्वाथ – 5120 ग्राम
  • मंजिष्ठ – 40 ग्राम
  • पद्मकाष्ठ – 40 ग्राम
  • लोध्र – 40 ग्राम
  • चन्दन लाल – 40 ग्राम
  • गैरिक – 40 ग्राम
  • खरेंटी का पचांग – 40 ग्राम
  • हल्दी – 40 ग्राम
  • दारूहल्दी – 40 ग्राम
  • नागकेशर – 40 ग्राम
  • प्रियंगु – 40 ग्राम
  • मुलेठी – 40 ग्राम
  • कमलफुल – 40 ग्राम
  • अनंतमूल – 40 ग्राम
  • दुग्ध – आवश्यकता अनुसार

भृंगराज तेल बनाने की विधि | Method of Making Bhringraj Oil

Total Time: 2 hours and 30 minutes

तिल तेल को 1280 ग्राम लीजिये

सर्वप्रथम तिल तेल को 128 तोला लेकर कडाही में डालकर मंदआंच गरम करें

भृंगराज रस या क्वाथ को 5120 ग्राम की मात्रा में लें

ताजा भृंगराज का रस या इसका क्वाथ 5120 की मात्रा में निकाल कर तिल तेल के साथ कड़ाही में डालकर इसका भी मंद आंच पर पाक करें |

अन्य जड़ी – बूटियों का दूध मिलाकर कल्क बनायें

अब बची हुई जड़ी – बूटियों का चूर्ण बनाकर अर्थात मंजिष्ठ, पद्मकाष्ठ, लोध्र, चन्दन लाल, गैरिक, खैरेंट का पंचांग, हल्दी, दारूहल्दी, नागकेशर, प्रियंगु, मुलेठी, कमलफुल एवं अनंतमूल के चूर्ण में दूध मिलाकर इसका कल्क बना लिया जाता है |

तेल पाक विधि से तेल बनाना

अंत में तिल तेल में भृंगराज स्वरस एवं जड़ी – बूटियों का कल्क मिलाकर तेल पाक विधि से इसका पाक किया जाता है | अच्छी तरह पाक होने पर अर्थात तेल से जल उड़ जाने पर इसे आंच से उतार का ठंडा कर लिया जाता है | इस प्रकार से भृंगराज तेल बनता है | यह इस तेल की शास्त्रोक्त विधि है |

भृंगराज तेल के उपयोग | Uses of Bhringraj Oil in Hindi

  • सभी प्रकार के सिर के रोगों में मसाज से फायदा मिलता है |
  • बालों के झड़ने को रोकने में उपयोगी है |
  • असमय बालों का सफ़ेद होने की समस्या में भृंगराज तेल की मसाज से लाभ मिलता है |
  • आँखों के रोग, कान के रोग एवं गले के रोगों के उपचारार्थ महा भृंगराज तेल का नस्य दिया जाता है |
  • उन्माद एवं मष्तिष्क विकार में भी यह लाभदायक आयुर्वेदिक तेल है |
  • यहाँ ऊपर हमने भृंगराज तेल बनाने की विधि को शास्त्रो के अनुसार बताया है |
  • रुसी एवं खुजली में भी भृंगराज तेल फायदा देता है |

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