कनेर का पौधा भारत देश में मंदिरों, घरों एवम् उधानो में सजावट और वास्तु के लिए लगाया जाता है कनेर के पौधे की अनेक प्रजातियाँ होती है | कनेर एक सदाबहार पौधा है | मुख्यत: इस की दो प्रजाति पाई जाती है श्वेत कनेर और पिला कनेर | श्वेत कनेर और पिला कनेर को सात्विक भाव के लिए जाना जाता है तथा लाल[गुलाबी] कनेर को देखने पर लगता है की बसंत और सावन का मिलन हो | पीले कनेर का उल्लेख सुश्रुत, चरक आदि प्राचीन ग्रंथो में नहीं मिलता है मध्यकालीन में इस का वर्णन मिलता है |
कनेर के प्रकार निम्न है | Different types of Oleander
- पीला कनेर – इस पर पीले रंग के फुल आते है |
- श्वेत कनेर – सफ़ेद रंग के फूलों वाला होता है |
- गुलाबी कनेर – गुलाबी रंग के फूलों से आच्छादित रहता है एवं दिखने में बहुत सुन्दर प्रतीत होता है |
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कनेर का रासानिक संघटन | Chemical properties of Oleander
आइये अब हम कनेर के रासानिक संघटन के बारे में देखते है जो हम ने एक सारणी के माध्यम से आप को बताया है
01 | थिविफोलिन |
02 | थिविटिन |
03 | पेरूसिटीन |
04 | थिविसाइड |
05 | नेरिफोलिन |
06 | रुबोसाइड |
07 | प्रुवोसाइड |
08 | बीटा एमायरिन |
09 | विरिडोसाइड |
कनेर के औषधीय गुण कर्म | Medicinal Properties of Oleander
पीले कनेर को बाह्यकर्म में उपयोग में लिया जाता है | यह कुष्ठ को ठीक करने वाला, घाव को भरने वाला, सुजन को कम करने वाला होता है | यह कुष्ठ, घाव, सुजन में गुणकारी है यह कफवातसामक, रक्त को साफ करने, श्वासहर, बुखार को कम करने, मलेरिया, मूत्रल, विदाही है कनेर की ह्र्दय पर तेजी से प्रभाव दिखता है | इसे उचित मात्रा में लेने पर यह अमृत समान है लेकीन अधिक मात्रा में विषाक्त होता है | अत: बैगर वैद्य सलाह इसका उपयोग नहींकरना चाहिए |
कनेर के पत्ते वमन एवं विरेचन के लिए उपयोग होते है | वमन का तात्पर्य उलटी एवं विरेचन का तत्पर्य दस्त है| इसका बिज गर्भस्रावक होता है |
कनेर के पत्तो को जला कर इस की राख को सूक्षमजीवाणुरोधी के रूप में प्रयोग किया जाता है | कनेर का तना, छाल का मेथेनॉल सार चूहों में शुक्राणुजननरोधी क्रियाशील करता है |
कनेर के फायदे | Benefits of Kaner (Oleander)
चलिए अब हम आपको कनेर के फायदे के बारे में बताते है | यहाँ हमने इसके सेवन से होने वाले रोगों में फायदों के बारे में बताया है |
सिर के रोगों में कनेर के फायदे
- कनेर के पुष्प तथा आँवले को कांजी में पिस कर मस्तक पर लेप करने पर सर दर्द में आराम मिलता है
- सफ़ेद कनेर के पीले पत्तो को अच्छे से सुखा कर बारीक़ पिस कर सूंघने से छींके आ कर सर दर्द में आराम मिलता है
- कनेर तथा दुधि को कूट कर दूध में मिला करा सिर पर लेप करने से सफेद बालो की समस्या दुर हो जाती है
आँखों के विकारों में कनेर का उपयोग
- पीले किनेर की जड़ को सौंफ और करंज के रस को साथ में मिलकर आँखों पर लगाने से पलकों का मोटापन , नजला , जला, फूली आखों की बीमारी में आराम मिलता है
मुख-रोग
- सफ़ेद कनेर की मंजन करने से दांतों में मजबूती और हिलने कि समस्या दूर हो जाती है | यह मसूडों को मजबूती देने वाला नुस्खा है लेकिन ध्यान रखें इसे निगलना नहीं चाहिए |
ह्रदय रोग
- अगर हृदय में पीड़ा अर्थात दर्द का अनुभव हो तो कनेर की जड़ की छाल को उतार कर इसका प्रयोग रात्रि में भोजन के पश्चात करना लाभदायक रहता है |
त्वचा सम्बन्धी विकारों में कनेर के फायदे
- दाद तथा कुष्ठ रोग में सफेद कनेर की जड़-छाल को अच्छे से पकाकर फिर बारीक़ कपडे या छलनी की सहायता से छान कर लगाने से आराम मिलता है |
- कनेर की छाल को बारीक पिस कर शरीर पर लेप करने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है
- कनेर के पत्तों को पानी में उबाल कर कई दिनों तक स्नान करने से कुष्ठ रोग में आराम मिलता है
- चर्म रोग में सफेद कनेर की जड़-छाल राइ के तेल में अच्छे से पकाकर फिर शारीर पर लगाने पर आराम मिलता है
- पीले कनेर के पत्ते एवं फूलो को जेतून के तेल में अच्छे से मिलकर शरीर पर लगाने पर आराम मिलता है
- सफ़ेद कनेर के फूलो को बारीक पिस कर चहरे पर लेप करने से उबटन रोग में लाभ मिलता है
- संक्रामक कीटाणुओ से हुवे रोग को ठीक करने में तेल में अच्छे से पकाकर फिर शरीर पर लगाने पर आराम मिलता है
जोड़ों के दर्द में उपयोग
- हड्डियों के दर्द या जोड़ो के दर्द हो तो आप को कनेर के पत्तो को तेल में अच्छे से पकाकर फिर शरीर पर लगाने पर हड्डियों के दर्द में आराम मिलता है
मानसिक विकारों में लाभदायक है कनेर
- लकवा या पक्षाघात रोग में कनेर बहुत गुणकारी है | इसका उपयोग कल्क बना कर करना चाहिए | कल्क बनाने के लिए सफ़ेद कनेर की जड़ की छाल, कृष्ण धतूरे के पते एवं सफ़ेद गूंजा की दाल इन तीनों को मिलाकर कल्क बना लिया जाता है | इसके पश्चात तैयार कल्क में चार गुना जल एवं कल्क के बराबर तेल मिलाकर कलई किये हुए बर्तन में मन्दाग्नि पर पाक करते है | अच्छी तरह पाक होने पर तेल को छानकर उपयोग में लिया जाता है |
कनेर के पौधे के नुकसान | Side Effects of Kaner (Oleander)
यह पौधा औषधीय गुणों वाला होने के पश्चात भी जहरीला है | इसके विषाक्त प्रभाव शरीर पर पड़ते है | इसके बीज एवं पते विषैले होते है | अधिक मात्रा में उपयोग करने पर यह उल्टी, सरदर्द, पेटदर्द एवं बेचैनी, दस्त, एनीमिया, मानसिक पागलपन आदि नुकसान शरीर में दिखाता है | अत: इस पौधे के अंगो का प्रयोग बिना वैद्य सलाह नहीं करना चाहिए | यहाँ हमारे द्वारा बताये गए फायदे भले ही शास्त्र वर्णित हैं लेकिन इसकी विषाक्तता को ध्यान में रखते हुए इसका उपयोग बहुत सोच – समझ कर करना चाहिए |
कनेर के अन्य नाम | Different Name of Oleander
कनेर को अलग अलग भाषा में अलग अलग नामों से बोला जाता है जिन को हम ने एक टेबल के मध्यम से बताया है
वानस्पतिक नाम | थिवेटीआ पेरुवियाना thevetia peruviana |
कुल नाम | ऐपोसाइनेसी [apocynaceae] |
अग्रेजी नाम | येलो ओलिएन्डर [yellow oleander ] |
संस्कर्त नाम | पित-करवीर:, दिव्य-पुष्प: |
हिन्दी नाम | पिला कनेर |
उड़िया नाम | कोनायर फूल |
कन्नड़ | कडूकासी |
गुजरती | पिली कनेर |
तेलगु | पच्चागत्रेरु |
तमिल | पचेयालरी |
बंगली | कोकलाफुल, कोकिलफुल, कलके फूल |
नेपाली | पिलो कनेर |
मराठी | पिन्वलकणहेर |
मलयालम | पच्चारली |
धन्यवाद |