पंचगुण तेल / Panchguna Taila – बनाने की विधि एवं फायदे

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पंचगुण तेल :- यह एक आयुर्वेदिक तेल है जो जोड़ो के दर्द, कान दर्द, व्रण (घाव) के उपचार एवं अन्य वात व्याधियों के कारण होने वाली शूल (तीव्र पीड़ा) में उपयोगी है | पंचगुण तेल शरीर में वात एवं पित्त का संतुलन करता है |

यह तेल एंटीसेप्टिक गुणों से युक्त होता है अत: त्वचा के विकार जैसे घाव आदि में फायदेमंद होता है | आयुर्वेद में इसका वर्णन सिद्धयोग संग्रह के वातरोगाधिकार में किया गया है | इसके निर्माण में लगभग 16 आयुर्वेदिक द्रव्यों का इस्तेमाल किया जाता है |

यहाँ हमने पंचगुण तेल में काम आने वाले औषध द्रव्यों के बारे में एवं इनकी मात्रा के बारे में बताया है |

पंचगुण तेल

पंचगुण तेल के घटक द्रव्य / Panchguna Taila Ingredients

इसके निर्माण में निम्न घटक द्रव्यों का इस्तेमाल किया जाता है –

  1. तिल तेल – 1 लीटर
  2. हरीतकी – 60 ग्राम
  3. विभिताकी – 60 ग्राम
  4. आमलकी – 60 ग्राम
  5. निर्गुन्डी पत्र – 180 ग्राम
  6. निम्ब पत्र – 180 ग्राम
  7. सिक्थ – 48 ग्राम
  8. गंधविरोजा – 48 ग्राम
  9. गुग्गुलु – 48 ग्राम
  10. राल – 48 ग्राम
  11. शिलारस – 48 ग्राम
  12. कर्पुर – 60 ग्राम
  13. केजोपुटी तेल – 30 मिली.
  14. यूकेलिप्टस तेल – 30 मिली.
  15. तारपीन तेल – 30 मिली.
  16. जल – 4.320 लीटर (क्वाथ निर्माण पश्चात चौथा भाग 1.080 लीटर)

पंचगुण तेल बनाने की विधि

इसका निर्माण करने के लिए सबसे पहले हरीतकी, विभितकी, आमलकी, निम्बपत्र एवं निर्गुन्डी पत्र इन सभी को लेकर यवकूट कर लिया जाता है | अब इन यवकूट किये हुए द्रव्यों को 4.320 लीटर जल में डालकर आंच पर चढ़ा दिया जाता है | जब जल चौथाई बचे अर्थात 1.080 लीटर बचे तब इस तैयार क्वाथ को निचे उतार कर अलग रख लिया जाता है |

अब एक भगोने में तिल तेल को गर्म करके मोम, गंधविरोजा, शिलारस, राल एवं गुग्गुलु इन सभी का कल्क बनाकर तिल तेल में डालदिया जाता है | अब इसमें तैयार क्वाथ डालकर निर्जल होने तक अग्नि पर पाक किया जाता है |

जब अच्छी तरह निर्जल पाक हो जाये तो आंच से उतार कर तारपीन का तेल, कर्पुर, यूकेलिप्टस तेल एवं केजोपुटी तेल इन सभी को मिश्रित कर दिया जाता है |

अब इस तैयार तेल को छान कर कांच के पात्र में सहेज लिया जाता है | यही पंचगुण तेल है |

पंचगुण तेल के फायदे / Benefits of Panchguna taila

  • जोड़ो के दर्द अर्थात संधिवात या एकांगवात में मालिश करने से उत्तम लाभ प्रदान करता है |
  • कर्णशूल (कान के दर्द) में इसकी बूंदों को कान में डालने से आराम मिलता है |
  • आमवात में पंचगुण तेल की मालिश लाभ देती है |
  • यह उत्तम वेदनानाशक तेल है अत: इसका प्रयोग शरीर में होने वाले किसी भी प्रकार के दर्द में किया जा सकता है | लाभ मिलेगा |
  • ज्वर के पश्चात होने वाली शारीरिक पीड़ा में पंचगुण तेल की मालिश लाभदायक साबित होती है |
  • मांसपेशियों के दर्द में भी फायदेमंद है |
  • यह तेल व्रणरोपन का कार्य करता है अर्थात किसी भी घाव आदि में इसका फोहा भरकर प्रयोग करने से घाव जल्दी ठीक होता है |
  • नियमित अभ्यंग से वातव्याधियों के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है |

पंचगुण तेल के नुकसान

इस तेल के कोई ज्ञात साइड इफ़ेक्ट नहीं है | अगर आपकी त्वचा में तेल आदि से एलर्जी की शिकायत होती हो तो एक बार प्रयोग करके देखें इसके पश्चात इस्तेमाल करें | वैसे इस आयुर्वेदिक तेल में एंटीसेप्टिक गुण विद्यमान है अत: त्वचा विकारों में भी उत्तम ही सिद्ध होता है |

धन्यवाद |

Mr. Yogendra Lochib

Mr Yogendra Lochib is a experienced and qualified Ayurveda Nurse & Pharmacist. He was Graduated (2009-2013) from Dr Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University, Jodhpur.He has Good Knowledge about Ayurvedic Herbs, Medicine, Panchkarma Procedure & Naturopathy. The Author believes in sharing the knowledge of Ayurveda (As it was shared 5000 years ago orally) using online platforms, and he is doing well.

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