Ayurvedic Medicine, Disease

मलेरिया बुखार की आयुर्वेदिक दवा एवं औषधियां

मलेरिया बुखार कैसे होता है ? – मलेरिया बुखार मादा मच्छर एनोफ़िलिज के काटने से होता है | यह एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में एनोफ़िलिज मादा मच्छर के काटने से फैलता है | यह प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है |

जब कभी एनोफ़िलिज मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटकर दुसरे स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो यह परजीवी स्वस्थ व्यक्ति के खून में चला जाता है | जिससे वह व्यक्ति भी मलेरिया से ग्रसित हो जाता है |

maleria

मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति को लगभग सप्ताह भर बुखार चलता है | बुखार सर्दी लगकर चढ़ती है एवं दिन में कई बार आती है | रोगी बैचैनी, घबराहट, उलटी – दस्त एवं मष्तिष्क असंतुलन से भी ग्रसित हो जाता है |

समय पर उपचार न करना गंभीर स्थिति तक पहुंचा सकता है | आधुनिक चिकित्सा में विभिन्न जांचो के माध्यम से आसानी से मलेरिया का पता लगाया जा सकता है |

मलेरिया की अंग्रेजी दवा

इसका उपचार शीघ्र लेना चाहिए | उपचार के लिए अपने चिकित्सक से तुरंत सम्पर्क करना फायदेमंद रहता है | अधिकतर मलेरिया की तीन दिन तक दवाएं चलती है | आधुनिक चिकित्सा में इसकी प्रसिद्द दवा क्लोरोक्वीन है |

मलेरिया की आयुर्वेदिक दवाएं

रोग के उपचार के लिए आयुर्वेद में काम आने वाली दवाओं एवं औषधियों का वर्णन हमने यहाँ किया है | यह महज आपके ज्ञान वर्द्धन के लिए है | उपचार के लिए अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए |

ये सभी दवाएं रोग की अवस्था पर आधारित है | इन्हें अलग – अलग उपद्रवो के आधार पर दिया जाता है |

१. महाज्वराकुंश रस – इसे 125 mg, करंजादी वटी – 1 ग्राम एवं शुद्ध स्फटिका आधा ग्राम | इस मात्रा में इसे प्रत्येक 8 घंटे पश्चात तुलसी पत्रों के स्वरस के साथ प्रयोग करवाया जाता है |

२. सुदर्शन चूर्ण – मलेरिया में सुदर्शन चूर्ण को १ ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार शहद के साथ सेवन करवाया जाता है | यह प्रयोग मलेरिया में अत्यंत लाभदायक रहता है |

३. करंज बीज चूर्ण – मलेरिया में बुखार की स्थिति होने पर करंज के बीजों का चूर्ण १ ग्राम की मात्रा में चटाने से बुखार से राहत मिलती है |

4. यवक्षार एवं पीपल चूर्ण – इन दोनों को २५० mg की मात्रा में लेकर दिन में दो बार शहद के साथ चटाया जाता है जिससे बुखार उतर जाता है |

५. गोदंती भस्म – गोदंती भस्म के साथ जहर मोहरा पिष्टी और रसादि वटी प्रत्येक औषधि को 125 mg की मात्रा में लेकर प्रत्येक ६ – ६ घंटे के अन्तराल से रोगी को सेवन करवाने से मलेरिया राहत मिलती है |

६. शूल गजकेशरी रस – अगर मलेरिया में बुखार के साथ शरीर में वेदना भी हो तो वात गुजाकुंश रस के साथ शूल गजकेशरी रस प्रत्येक १२५ mg की मात्रा में शहद के साथ सेवन करवाने से शरीर की वेदना से आराम मिलता है |

७. चिरायता, हरड, नागरमोथा, कटेरी, जायफल, नेत्रबाला, पीपलामूल एवं पीतपापड़ा ; इन सभी को समान मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें | इसको १ से ३ ग्राम की मात्रा में गरम जल के साथ लेने से लाभ मिलता है |

८. कड़वे नीम के सूखे पते 450 ग्राम , कालीमिर्च, पीपल, हरड, बहेड़ा, आंवला, सैंधानमक, , विडनमक एवं सज्जीक्षार प्रत्येक ५० – ५० ग्राम और अजवायन २५ ग्राम लेकर इन्हें कूट – पीसकर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण में से नित्य ३ से ५ ग्राम की मात्रा में गुनगुने जल के साथ सेवन करने से मलेरिया का ज्वर शांत हो जाता है |

धन्यवाद |

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