लवंगादि वटी के स्वास्थ्य उपयोग, फायदे एवं बनाने की विधि

लवंगादि वटी के स्वास्थ्य उपयोग, फायदे एवं बनाने की विधि 

आयुर्वेद में प्राचीन समय से ही वटी कल्पना का इस्तेमाल होता आया है | आधुनिक चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली टेबलेट्स एवं वटी को समतुल्य माना जा सकता है | प्राचीन महर्षि एवं आचार्य वटी की उपयोगिता को जानते थे क्योंकि इस प्रकार की औषधि लेने में रोगी को कठिनाई नहीं होती अत: पुरातन समय से ही हमारे आयुर्वेद में वटी का उपयोग रोग उपचारार्थ होता है |

खांसी एवं कफ की अधिकता में लवंगादि वटी बहुत फायदेमंद औषधि है | बार – बार आने वाली खांसी, सुखी एवं गीली खांसी,  खांसने पर भी कफ का बाहर न निकलना एवं श्वास आदि रोगों में लवंगादि वटी का सेवन काफी लाभदायक होता है |

लवंगादि वटी

खांसी के साथ छाती में दर्द एवं सिरदर्द आदि हो तो लवंगादि वटी को चूसने से  कफ बाहर निकल जाता है, जिससे रोगी को आराम मिल जाता है |

लवंगादि वटी बनाने की विधि

तुल्या लवंगमरिचाक्षफलत्वच: स्यु:

सर्वै: समो निगदित: खदिरस्यसार: |

बब्बुलवृक्षजकषाययुतश्च चूर्ण 

कासन्नीहन्ति गुटिका घतिकाष्टकान्ते ||

घटक द्रव्य 

  1. लवंग – 1 भाग
  2. मरीच (कालीमिर्च) – 1 भाग
  3. विभितकी तने का छिलका – 1 भाग
  4. अन्नार – 1 भाग
  5. कत्था – 3 भाग

निर्माण विधि 

उपरोक्त वर्णित सभी द्रव्यों को अलग – अलग इमामदस्ते में कूटकर महीन कपडछान चूर्ण बनाया जाता है | अब बब्बुल की छाल से निर्मित क्वाथ से खरल में इन सभी द्रव्यों को डालकर भावना दी जाती है | भावना देने के बाद अच्छी तरह मर्दन करके 4 – 4 रति की गोलियां बना ली जाती है | इन गोलियों को छाया में सुखाकर कांच के जार में सुरक्षित सहेज लें |

लवंगादि वटी के फायदे 

इस औषधि का इस्तेमाल चूसने के लिए किया जाता है | कास एवं श्वास रोग में इसका उपयोग चिकित्सार्थ किया जाता है | खांसी एवं कफज विकारों की यह उत्तम औषधि है |

  • छाती में कफ की अधिकता में लवंगादि वटी को चूसने से आराम मिलता है |
  • कफ के साथ गले में खरास रहता हो इसका सेवन लाभदायक है |
  • सुखी या तर खांसी में इस वटी को चूसने से तुरंत आराम मिलता है |
  • बार – बार खांसी आती हो एवं कफ बाहर न निकलता हो तो 1 गोली चूसने भर से ही छाती में जमा कफ छूटने लगता है |
  • श्वास रोग में भी इसको चूसने से आराम मिलता है | इसको चूसने से श्वास नली साफ़ होती है अत: श्वास के रोगी के लिए भी यह अति उत्तम दवा है |
  • खांसी के लिए बहुत ही उत्तम औषधि है |
  • दिन में तीन या चार बार वटी को चुसना चाहिए |

धन्यवाद | 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Open chat
Hello
Can We Help You