षडबिन्दु तेल / Shadbindu Tel के फायदे एवं बनाने की विधि

षडबिन्दु तेल (Shadbindu Tel in Hindi) 

(Updated on 06/09/2020) आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्यरत्नावली के शिरोरोगधिकार में षड्बिन्दु तेल का वर्णन किया गया है | यह सिर के रोगों की उत्तम आयुर्वेदिक दवा है |

साइनस, जुकाम, सिर दर्द, बालों का असमय गिरना, एवं माइग्रेन आदि रोगों में इस तेल का प्रयोग किया जाता है | प्रयोग के रूप में इस तेल की 6 बूंदों तक का प्रयोग किया जाता है तभी इसे षडबिन्दु नाम से पुकारा जाता है |

अगर आपको लम्बे समय से सिरदर्द , पुरानी जुकाम, साइनस, बालों का झड़ना या अन्य कोई सिर का रोग है तो नित्य इस तेल की 3 से 6 बुँदे डालने से जल्द ही इन रोगों में आराम मिलता है |

इस स्वास्थ्यप्रद आर्टिकल में आज हम षडबिंदु तेल के फायदे, इसके घटक द्रव्य एवं बनाने की विधि जानेंगे |

षड्बिन्दु तेल

आयुर्वेदिक मेडिसिन की निर्माण विधि एवं घटक द्रव्य के बारे में लिखने का हमारा एक मात्र ध्येय आम जन तक आयुर्वेद की पहुँच बनाना है |

आज पश्चिमी सभ्यता में पश्चिमी चिकित्सा पद्धति के बढ़ते प्रभाव एवं इनके आकाओं (फार्माटिक्ल्स कंपनियों) द्वारा आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में गलत प्रचार (जैसे आयुर्वेदिक दवाएं केमिकली शुद्ध नहीं होती एवं इनमे खतरनाक पारे आदि का समावेश होता है) करना एक चलन बन चूका है | वास्तव में ये सब फ़िजूल की बातें है, इनसे अपनी चिकित्सा पद्धति में स्थित दोषों का खात्मा होता नहीं , अब बेचारे करें तो क्या करें ? घूम फिर के वहीं !! 

षडबिन्दु तेल के घटक द्रव्य 

इस प्रशिद्ध आयुर्वेदिक तेल के निर्माण में कुल 13 औषध द्रव्यों का इस्तेमाल किया जाता है जो निम्न है |

  1. काले तिलों का तेल – 20 भाग
  2. गोदुग्ध                – 20 भाग
  3. भृंगराज स्वरस      – 20 भाग
  4. एरंड मूल त्वक      – 1 भाग
  5. शुंठी                    – 1 भाग
  6. वायविडंग             – 1 भाग
  7. मधुयष्टि             –  1 भाग
  8. त्वक                   –  1 भाग
  9. सैन्धव लवण       –   1 भाग
  10. रास्ना                 –  1 भाग
  11. जीवन्ति              – 1 भाग
  12. शतपुष्पा             –  1 भाग
  13. तगर                  –  1 भाग

षडबिन्दु तेल को बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले 4 से लेकर 13 तक के औषध द्रव्यों का कल्क निर्माण किया जाता है | कल्क से तात्पर्य इनकी लुग्दी तैयार करना है |
  2. अब एक कड़ाही में तिल तेल के साथ दूध एवं भृंगराज स्वरस को मिलाकर अग्नि पर चढ़ाया जाता है |
  3. साथ ही इसमें इस तैयार औषधियों के कल्क को डालकर अग्निपाक किया जाता है |
  4. अच्छी तरह से तेल पाक विधि से तेल पाक करने के बाद जब कडाही में शेष तेल ही बचे तब इसे आग से निचे उतार कर ठंडा कर लिया जाता है |
  5. अब इस तैयार तेल को बारीक कपडे से छान कर कांच की बोतल में भर लिया जाता है | इस प्रकार से षड्बिन्दु तेल का निर्माण होता है |
  6. बैद्यनाथ, पतंजलि दिव्य, डाबर आदि आयुर्वेदिक दवाएं निर्माता कम्पनियां षड्बिन्दु तेल का निर्माण करती है | आप इन्हें बाजार से किसी भी आयुर्वेदिक मेडिसिन स्टोर से खरीद सकते है |

षडबिन्दु तेल के उपयोग एवं मात्रा 

इस तेल का उपयोग पंचकर्म चिकित्सा में या नस्य कर्म में 6 बूंद तक इस्तेमाल किया जाता है | माइग्रेन, बालों के झड़ने, दांतों के कमजोर होने एवं प्रतिश्याय में इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक बताते है |

घरेलु प्रयोग करने से पहले सीधे लेट जाना चाहिए एवं चिकित्सक के अनुसार निर्देशित मात्रा में नाक में बुँदे डालनी चाहिए | शुरुआत में इस तेल को डालने से छींके आदि आती है लेकिन एक दो बार के प्रयोग से ही ये सब ठीक हो जाता है |

षडबिंदु तेल के फायदे या स्वास्थ्य लाभ 

  • इसका उपयोग सर्वशिरोरोग अर्थात सिर के अधिकतर रोगों में किया जाता है |
  • बालों के असमय झड़ने की समस्या में इसका आमयिक प्रयोग किया जाता है |
  • षड्बिन्दु तेल दन्त रोगों में भी फायदेमंद होता है | अगर दांतों की जड़े कमजोर है तो इसके नस्य से लाभ मिलता है |
  • नेत्र रोगों में भी इसका नस्य लेने से फायदा मिलता है |
  • सर्दी जुकाम में भी इसका इस्तेमाल फायदा पंहुचता है |
  • साइनस – नाक की एलर्जी की समस्या को ख़त्म करता है |
  • माइग्रेन में इसका नस्य लेने लाभ मिलता है |
  • बालों का सफ़ेद होना एवं असमय झड़ना इसके प्रयोग से रुक जाते है |
  • आँखों की रोशनी बढाने में भी मददगार है |
  • नस्य लेने से दिमाग की गर्मी और खुश्की दूर होती है |
  • स्वस्थ व्यक्ति को भी प्रत्येक महीने षडबिन्दु तेल का नस्य लेना चाहिए | इसका नस्य लेने से ये समस्याएं उतपन्न ही नहीं होती |

षडबिंदु तेल का नस्य कैसे लें ?

नस्य लेने के लिए सबसे पहले समतल जगह पर पीठ के बल लेट जाएँ | गर्दन के निचे कोई तकिया आदि इस प्रकार लगावें की नाक थोड़ी ऊपर हो जाये |

अब ड्रॉपर में षडबिन्दु तेल भरकर 2 से 3 बून्द तेल एक नासाछिद्र में डालें | जैसे ही तेल नाक में जाये दूसरे नथुने को बंद करके सांस को अंदर खींचे ताकि तेल कंठ तक न पहुंचे |

अब यही प्रक्रिया दूसरे नासाछिद्र के लिए अपनाएं | षडबिंदु तेल के फायदे वही

षडबिंदु तेल के नुकसान / Shadbindu Oil Precautions

इस आयुर्वेदिक तेल के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं है | प्रयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक के निर्देशानुसार करना चाहिए |

बाजार में यह बना बनाया तेल डाबर षडबिंदु तेल, पतंजलि षडबिन्दु तेल, बैद्यनाथ षडबिंदु आयल आदि नामों से उपलब्ध हो जाता है |

आयुर्वेद एवं प्राचीन चिकित्सा पद्धति से जुडी जानकारियों के लिए ” स्वदेशी उपचार” एक विश्वनीय ऑनलाइन पोर्टल है | हमारा उद्धेश्य आम जन तक सही एवं प्रमाणिक आयुर्वेद की जानकारी पहुँचाना है | यहाँ पर हम कोई भी गलत एवं अपूर्ण तथ्य प्रस्तुत नहीं करते है |

आप सभी से निवेदन है कि आयुर्वेद के नाम पर चलने वाली फर्जी वेबसाइट से बचें | ये आपके स्वास्थ्य एवं ज्ञान के साथ खिलवाड़ करने का काम करती है |

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धन्यवाद ||

11 thoughts on “षडबिन्दु तेल / Shadbindu Tel के फायदे एवं बनाने की विधि

  1. lalit says:

    Sir,

    Is Oil ko kai tarah se laabhprad bataya gaya hai, To kya her problem ke liye isko use b alag alag tareeke se kiya jayega.. Jaise Mujhe sardard, Kaan ka behna, Annko ko roshni or white hair me kaise or kis tarah lenge,

    Kirpiya margdarshan karei

    Regards,
    Lalit
    9971867799

  2. Dr Dhananjay Pandey says:

    What is ayurvedik textual reference of this tail??? Charak shushrut vagbhatt ashtang hruday ashtang sangrah bhaisajya ratnaawali ect???

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