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षडबिन्दु तेल (Shadbindu Tel) के फायदे एवं बनाने की विधि

षड्बिन्दु तेल

षडबिन्दु तेल (Shadbindu Tel in Hindi)

आयुर्वेदिक ग्रन्थ भैषज्यरत्नावली के शिरोरोगधिकार में षड्बिन्दु तेल का वर्णन किया गया है | यह सिर के रोगों की उत्तम आयुर्वेदिक दवा है | साइनस, जुकाम, सिर दर्द, बालों का असमय गिरना, एवं माइग्रेन आदि रोगों में इस तेल का प्रयोग किया जाता है | प्रयोग के रूप में इस तेल की 6 बूंदों तक का प्रयोग किया जाता है तभी इसे षडबिन्दु नाम से पुकारा जाता है |

अगर आपको लम्बे समय से सिरदर्द , पुरानी जुकाम, साइनस, बालों का झड़ना या अन्य कोई सिर का रोग है तो नित्य इस तेल की 3 से 6 बुँदे डालने से जल्द ही इन रोगों में आराम मिलता है | इस स्वास्थ्यप्रद आर्टिकल में आज हम षडबिन्दु तेल के फायदे, इसके घटक द्रव्य एवं बनाने की विधि जानेंगे |

षड्बिन्दु तेल

आयुर्वेदिक मेडिसिन की निर्माण विधि एवं घटक द्रव्य के बारे में लिखने का हमारा एक मात्र ध्येय आम जन तक आयुर्वेद की पहुँच बनाना है | आज पश्चिमी सभ्यता में पश्चिमी चिकित्सा पद्धति के बढ़ते प्रभाव एवं इनके आकाओं (फार्माटिक्ल्स कंपनियों) द्वारा आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में गलत प्रचार (जैसे आयुर्वेदिक दवाएं केमिकली शुद्ध नहीं होती एवं इनमे खतरनाक पारे आदि का समावेश होता है) करना एक चलन बन चूका है | वास्तव में ये सब फ़िजूल की बातें है, इनसे अपनी चिकित्सा पद्धति में स्थित दोषों का खात्मा होता नहीं , अब बेचारे करें तो क्या करें ? घूम फिर के वहीं !! 

षडबिन्दु तेल के घटक द्रव्य 

इस प्रशिद्ध आयुर्वेदिक तेल के निर्माण में कुल 13 औषध द्रव्यों का इस्तेमाल किया जाता है जो निम्न है |

  1. काले तिलों का तेल – 20 भाग
  2. गोदुग्ध                – 20 भाग
  3. भृंगराज स्वरस      – 20 भाग
  4. एरंड मूल त्वक      – 1 भाग
  5. शुंठी                    – 1 भाग
  6. वायविडंग             – 1 भाग
  7. मधुयष्टि             –  1 भाग
  8. त्वक                   –  1 भाग
  9. सैन्धव लवण       –   1 भाग
  10. रास्ना                 –  1 भाग
  11. जीवन्ति              – 1 भाग
  12. शतपुष्पा             –  1 भाग
  13. तगर                  –  1 भाग

षडबिन्दु तेल को बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले 4 से लेकर 13 तक के औषध द्रव्यों का कल्क निर्माण किया जाता है | कल्क से तात्पर्य इनकी लुग्दी तैयार करना है |
  2. अब एक कड़ाही में तिल तेल के साथ दूध एवं भृंगराज स्वरस को मिलाकर अग्नि पर चढ़ाया जाता है |
  3. साथ ही इसमें इस तैयार औषधियों के कल्क को डालकर अग्निपाक किया जाता है |
  4. अच्छी तरह से तेल पाक विधि से तेल पाक करने के बाद जब कडाही में शेष तेल ही बचे तब इसे आग से निचे उतार कर ठंडा कर लिया जाता है |
  5. अब इस तैयार तेल को बारीक कपडे से छान कर कांच की बोतल में भर लिया जाता है | इस प्रकार से षड्बिन्दु तेल का निर्माण होता है |
  6. बैद्यनाथ, पतंजलि दिव्य, डाबर आदि आयुर्वेदिक दवाएं निर्माता कम्पनियां षड्बिन्दु तेल का निर्माण करती है | आप इन्हें बाजार से किसी भी आयुर्वेदिक मेडिसिन स्टोर से खरीद सकते है |

षडबिन्दु तेल के उपयोग एवं मात्रा 

इस तेल का उपयोग पंचकर्म चिकित्सा में या नस्य कर्म में 6 बूंद तक इस्तेमाल किया जाता है | माइग्रेन, बालों के झड़ने, दांतों के कमजोर होने एवं प्रतिश्याय में इसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सक बताते है | घरेलु प्रयोग करने से पहले सीधे लेट जाना चाहिए एवं चिकित्सक के अनुसार निर्देशित मात्रा में नाक में बुँदे डालनी चाहिए | शुरुआत में इस तेल को डालने से छींके आदि आती है लेकिन एक दो बार के प्रयोग से ही ये सब ठीक हो जाता है |

षडबिंदु तेल के फायदे या स्वास्थ्य प्रयोग 

  • इसका उपयोग सर्वशिरोरोग अर्थात सिर के अधिकतर रोगों में किया जाता है |
  • बालों के असमय झड़ने की समस्या में इसका आमयिक प्रयोग किया जाता है |
  • षड्बिन्दु तेल दन्त रोगों में भी फायदेमंद होता है | अगर दांतों की जड़े कमजोर है तो इसके नस्य से लाभ मिलता है |
  • नेत्र रोगों में भी इसका नस्य लेने से फायदा मिलता है |
  • सर्दी जुकाम में भी इसका इस्तेमाल फायदा पंहुचता है |
  • साइनस – नाक की एलर्जी की समस्या को ख़त्म करता है |
  • माइग्रेन में इसका नस्य लेने लाभ मिलता है |
  • बालों का सफ़ेद होना एवं असमय झाड़ना इसके प्रयोग से रुक जाते है |
  • आँखों की रोशनी बढाने में भी मददगार है |

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3 thoughts on “षडबिन्दु तेल (Shadbindu Tel) के फायदे एवं बनाने की विधि

  1. Avdhesh rathore says:

    sadbindu tel ka upyog garmiyion ME kya koi iska iste mal kar sakte hai ya nahi

    1. सम्पादकीय says:

      बिल्कुल कर सकते है |

  2. Mithlesh dubey says:

    2 Sam ki bachi OK ur tel use kar sakte hai

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