चंद्रप्रभा वटी के घटक द्रव्य एवं बनाने की विधि और जाने इसके फायदे

चन्द्रप्रभा वटी / Chandraprabha vati in Hindi

परिचय – आयुर्वेद चिकित्सा में चंद्रप्रभा वटी को उत्तम रसायन औषधि माना जाता है | मूत्र विकारों एवं शुक्रदोषों के लिए यह एक चमत्कारिक आयुर्वेदिक वटी है | इसका उपयोग 20 प्रकार के प्रमेह रोगों के साथ – साथ मूत्रकृच्छ, अश्मरी, विबंध, अनाह (आफरा), शूल (दर्द) एवं आंत्रव्रद्धी में किया जाता है |

चंद्रप्रभा वटी
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चंद्रप्रभा वटी का निर्माण 35 प्रकार की आयुर्वेदिक जड़ी – बूटियों के सहयोग से किया जाता है | वीर्य विकार, मर्दाना कमजोरी और मधुमेह जैसे रोगों में यह बल्य, वृष्य और रसायन रूप में उपयोगी होती है | इसके सेवन शरीर में कान्ति और बल की व्रद्धी होती है | आयुर्वेदिक चिकित्सक चंद्रप्रभा वटी को मूत्र विकारों एवं वीर्य दोषों की चमत्कारिक औषधि मानते है |

चंद्रप्रभा वटी के घटक द्रव्य 

इस आयुर्वेदिक औषधि के निर्माण के लिए लगभग 35 प्रकार की आयुर्वेदि जड़ी – बूटियों का प्रयोग किया जाता है | यहाँ हमने चंद्रप्रभा वटी को बनाने में उपयोगी सभी घटक द्रव्यों को बताया है |


1. चन्द्रप्रभा – 3 ग्राम

2. वचा – 3 ग्राम

3. मुस्ता – 3 ग्राम

4. भूनिम्ब – 3 ग्राम

5. गुडूची – 3 ग्राम

6. देवदारु – 3 ग्राम

7. हरिद्रा – 3 ग्राम

8. अतिविषा – 3 ग्राम

9. दारूहरिद्रा – 3 ग्राम

10. पिप्पलीमूल – 3 ग्राम

11. चित्रक – 3 ग्राम

12. धान्यक – 3 ग्राम

13. हरीतकी – 3 ग्राम

14. विभितकी – 3 ग्राम

15. आमलकी – 3 ग्राम

16. चव्य – 3 ग्राम

17. विडंग – 3 ग्राम

18. गज्जपिप्पली – 3 ग्राम

19. त्रिकटु – 9 ग्राम

20. माक्षिक भस्म – 3 ग्राम

21. सज्जीक्षार – 3 ग्राम

22. यवक्षार – 3 ग्राम

23. सैन्धव लवण – 3 ग्राम

24. विडलवण – 3 ग्राम

25. सौवर्चलवण – 3 ग्राम

26. त्रिवृत – 12 ग्राम

27. दंती – 12 ग्राम

28. पत्रक – 12 ग्राम

29. त्वक – 12 ग्राम

30. इलायची – 12 ग्राम

31. वंशलोचन – 12 ग्राम

32. लौहभस्म – 24 ग्राम

33. शर्करा – 48 ग्राम

34. शिलाजीत – 96 ग्राम

35. गुग्गुलु – 96 ग्राम


ऊपर बताई गई द्रव्यों की मात्रा आवश्यकता अनुसार बढ़ा भी सकते है लेकिन सभी द्रव्यों का अनुपात ये ही होना चाहिए |

चन्द्रप्रभा वटी बनाने की विधि 

सबसे पहले ऊपर बताये गए घटक द्रव्यों को इनकी मात्रा अनुसार ले | अब इन सभी का चूर्ण बना कर सभी को आपस में मिला लें | गुग्गुलु को कूटते समय यह थोडा मुलायम हो जाता है | इन सभी का अच्छी तरह चूर्ण तैयार करने के बाद इमाम दस्ते में डालकर गिलोय स्वरस के साथ लगातार मर्दन करना चाहिए | जब योग सूखने लगे या गोलियों का निर्माण होने लायक हो जाए तब इसकी 500 मिलीग्राम की गोलियां बना लेनी चाहिए | इस प्रकार से आपकी चंद्रप्रभा वटी का निर्माण होता है |

वैसे बाजार में यह पतंजलि, बैद्यनाथ, धूतपापेश्वर एवं डाबर कंपनी की चंद्रप्रभा वटी आसानी से उपलब्ध हो जाती है | इनमे से बैद्यनाथ एवं धूतपापेश्वर चंद्रप्रभा वटी अधिक लाभदायक होती है |

चंद्रप्रभा वटी के स्वास्थ्य उपयोग या फायदे 

  • सभी प्रकार के मूत्र विकारों में फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा है |
  • मूत्र में रूकावट या कम आने की समस्या में भी लाभदायक आयुर्वेदिक दवा साबित होती है |
  • पत्थरी की समस्या में भी फायदेमंद होती है |
  • इसके सेवन से कब्ज और आफरा की समस्या में राहत मिलती है |
  • कमर दर्द एवं अन्य प्रकार के शूल रोग में उपयोगी औषधि है |
  • श्वास रोग और खांसी में भी आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका सेवन करवाते है |
  • सभी प्रकार के वीर्य विकारों में उपयोगी |
  • धातु दुर्बलता, नपुंसकता और वीर्य दोषों में इसके सेवन से लाभ मिलता है | यह शरीर की धातुओं का शोधन करती है |
  • रक्त की कमी में भी इसके सेवन से लाभ मिलता है अर्थात पांडूरोग एवं कामला (पीलिया) में उपयोगी |
  • अर्श, भगंदर और कुष्ठ जैसे रोगों में भी इसका आमयिक प्रयोग किया जाता है |
  • यकृत और प्लीहा व्रद्धी में फायदेमंद आयुर्वेदिक दवा है |
  • मन्दाग्नि, अरुचि एवं अपच जैसे रोगों को दूर करके पाचन को सुधरने का कार्य भी करती है |
  • चंद्रप्रभा वटी को त्रिदोष हर औषधि माना जाता है |
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसे रसायन के रूप में भी काम में लिया जाता है |
  • महिलाओं के मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द से छुटकारा दिलाती है |
  • यह गर्भाशय का शोधन करके उसे नयी शक्ति देती है |
  • शारीरिक रूप से कमजोर स्त्रियों को इसका सेवन जरुर करना चाहिए |
  • दन्त विकार एवं नेत्र विकारों में भी इसका चिकित्सकीय उपयोग किया जाता है |

धन्यवाद |

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