अनियमित मासिक धर्म के कारण एवं प्रमाणिक आयुर्वेदिक इलाज

अनियमित मासिक धर्म 

अनियमित मासिक धर्म – महिलाओं में एक निश्चित उम्र के बाद मासिक धर्म का आगमन होता है | लगभग 12 से 14 साल की लड़की में यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से शुरू हो जाती है | मासिक धर्म का यह चक्र लगभग 28 से 32  दिन के अन्तराल से आता है | जिन महिलाओं को सही समय पर मासिक धर्म आता है वे शारीरक और मानसिक तौर पर अधिक स्वस्थ एवं सुखी होती है | लेकिन अगर इस चक्र में कोई रूकावट आती है तो निश्चित ही महिला के शारीरक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है |

अनियमित मासिक धर्म भी अपने साथ विभिन्न प्रकार की शारीरक और मानसिक अस्वस्थता लेकर आता है | मासिक धर्म का रुक – रुक के होना एवं मासिक धर्म के समय अन्तराल में परिवर्तन होना अनियमित मासिक धर्म कहलाता है |

जैसे किसी महिला को हर महीने 21 से 32 दिन के अन्तराल से मासिक धर्म होता है तो यह नियमित मासिक धर्म कहलाता है | लेकिन जब किसी एक महीने यह 15 दिन में ही आ जाए और अगले महीने 35 दिन तक न आये एवं कभी मासिक धर्म में रक्त की कमी हो या कभी रक्त अधिक आने लगे तो यह प्रक्रिया अनियमित माहवारी मानी जाती है | वैसे 1 या 2 बार की अनियमितता अधिक गंभीर नहीं है लेकिन जब बार – बार हो तो निश्चित ही अनियमित मासिक धर्म की समस्या मानी जाती है |

अनियमित मासिक धर्म के कारण 

इर्रेगुलर पीरियड्स के बहुत से कारण हो सकते है

  • अगर महिला PCOS अर्थात पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीड़ित है तो अनियमित मासिक धर्म की दिक्कत आती है | अनियमित माहवारी में PCOS सबसे अधिक एवं प्रमुख कारण माना जाता है |
  • अधिक गर्भनिरोधक पिल्स का इस्तेमाल भी आपके पीरियड्स को Irregular कर सकता है |
  • फ़ास्ट फ़ूड एवं तले भुने बाहरी खाने का अधिक सेवन करना |
  • मानसिक तनाव |
  • असंतुलित आहार एवं विहार |
  • आयुर्वेद के अनुसार एक से अधिक पुरुषों से सहवास भी इसका एक कारण है |
  • मासिक धर्म को लाने व रोकने वाली अंग्रेजी दवाओं का अधिक उपयोग करना |
  • सामान्य अस्वस्थतता एवं वातनाड़ी सम्बन्धी विकार |

अनियमित मासिक धर्म का आयुर्वेदिक इलाज 

आयुर्वेद चिकित्सा में इसके उपचार के लिए सबसे पहले महिला को स्वस्थ दिनचर्या का पालन करने के लिए कहा जाता है | जैसे महिला को बल्य, पौष्टिक एवं संतुलित लघु आहार का सेवन करना चाहिए | साथ ही शीतल आहार – विहार से भी महिला को बचाव करना चाहिए | जब भी आपका मासिक काल (MC) हो उस समय पूर्ण आराम करें | दिन में सोने से बचे एवं रात्रि में देर तक न जगें | अगर आपको कब्ज की शिकायत है तो सबसे पहले उसका उपाय करे एवं समय पर मल त्याग की आदि बने | कब्ज को दूर करने के लिए आयुर्वेद चूर्ण जैसे पञ्चसकार , हरीतकी चूर्ण एवं इसबगोल आदि का इस्तेमाल कर सकती है |

आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्शनुसार अशोकारिष्ट, अशोकत्वक, दश्मुलारिष्ट एवं लोध्र चूर्ण आदि का प्रयोग करे | साथ ही रक्तवर्धक आयुर्वेदिक औषधियां जैसे – पुनर्नवादी मंडूर, धात्री लौह एवं प्रवाल पंचामृत आदि का अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेकर उपयोग करें |

अनियमित मासिक धर्म का घरेलु इलाज 

मुलहठी 

  • मासिक धर्म की अनियमितता में मुलेठी असरदार औषधि साबित होती है | मुलहठी के 5 ग्राम चूर्ण को थोड़े से शहद में मिलाकर चटनी जैसा बना ले और नियमित 20 दिन तक इसे चाटें ऊपर से दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करे |
  • अगर पित कुपित होने से मासिक धर्म में अधिक रक्त आ रहा है तो 20 ग्राम मुलहठी के चूर्ण में 80  ग्राम मिश्री मिलाकर इसकी समान मात्रा में 10 पुड़ियाँ बना ले | नियमित सुबह – शाम एक – एक पुडिया सेवन करने से अधिक रक्त आने की समस्या में आराम मिलेगा |

अशोक 

  • मासिक धर्म की गड़बड़ी में नित्य सुबह स्नान के पश्चात अशोक के पेड़ की आठ नयी और कच्ची कलियों प्रतिदिन सेवन करे जल्द ही मासिक धर्म की समस्या दूर होगी |
  • अधिक मासिक स्राव हो रहा हो तो अशोक की 250 ग्राम छाल को 4 लीटर जल में उबाल कर इसका काढ़ा बना ले (जल एक चौथाई बचने पर) | इस गरम काढ़े में एक किलो गुड या शक्कर मिलाकर , ठंडा करले | जब अच्छी तरह ठंडा हो जाए तब इसे कांच की बोतल में अच्छे से ढक्कन बंद करके रख ले | प्रतिदिन 10 ग्राम क्वाथ पिने से रोग में चमत्कारिक लाभ मिलता है |

अन्य घरेलु इलाज 

  • अल्प मात्रा में ऋतू स्राव होने व मासिक धर्म के साथ दर्द आदि होने पर सहिजन के बीजों का चूर्ण बना ले | इस चूर्ण को 1 से 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से तुरंत लाभ मिलता है |
  • अनियमित माहवारी में महुए के फल भी बहुत लाभकारी होते है | इसके लिए सबसे पहले महुए के फलों की गुठली तोड़कर गिरी को पानी के साथ पीसकर गूँथ ले और इसकी 1.5 इंच लम्बी वर्ती बना ले | मासिक धर्म के समय से 1 या 2 दिन पहले इस व्रती को गुप्तांग ने रखें | इससे अनियमित माहवारी की समस्या जल्द ही ख़त्म हो जाती है |
  • अगर मासिक धर्म रुक रुक के आने की समस्या है तो इसमें अजमोद का इस्तेमाल करना चाहिए | किसी भी पंसारी के पास अजोमोद आसानी से मिल जाता है |
  • लाजवंती के पतों को अच्छी तरह धोकर इनका रस निकाल ले | सुबह – शाम एक छोटे चम्मच की मात्रा में सेवन करे , जल्द लाभ मिलेगा |

 

 

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