टीबी / TB(Tuberculosis) – टीबी के लक्षण, उपचार और खानपान

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टीबी क्या है / What is tuberculosis in Hindi

टीबी एक संक्रामक रोग है जो “मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस (Mycobacterium Tuberculosis)” जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है | इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे – क्षय रोग, तपेदिक, राजयक्ष्मा आदि | हमारे देश में इस रोग के नाम से लोग आज भी डरते है | क्योंकि पिछली शताब्दी में टीबी रोग व्यापक रूप से फैलने वाली बीमारी थी | इस रोग से पीड़ित व्यक्ति लगभग 3 साल से पहले ही मर जाता था, इसलिए इसे देशी भाषा मे “तिबरसिया”(3 बरस) भी कहा जाता था |

ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु (Bacteria) दो प्रकार के होते है | मानवीय एवं गौजातीय (Bovine) | क्षय रोग एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में थूकने, खांसने, छींकने (ड्रॉपलेट इन्फेक्शन) आदि से फैलता है अर्थात खांसते समय थूक आदि स्वस्थ व्यक्ति में जाने से संक्रमण का खतरा अधिक होता है | गौजातीय संक्रमण पशुओं में होता है इसमें संक्रमित पशुओं गाय या भैंस के दूध या मांस आदि का इस्तेमाल करने से व्यक्ति संक्रमित हो जाता है |

यह रोग शरीर के कई अंगो को प्रभावित करता है | इसमें फेफड़े सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंग है | इनके अलावा टीबी अन्य अंगो को जैसे ग्रंथियां, मेनिन्जिंज, अस्थियाँ, गुर्दे एवं जॉइंट्स को प्रभावित करती है |

टी बी / तपेदिक कैसे होता है ?

इस रोग के जीवाणुओं का शरीर में प्रवेश सामान्यतया श्वसन के द्वारा होता है | जब टीबी से ग्रषित कोई व्यक्ति खांसी के साथ आये बलगम को बाहर निकालता है तो उसमे उपस्थित क्षयरोग बसिलाई अर्थात टीबी का बैक्टीरिया कई महीनों तक जीवित रहता है | जब इस जीवाणु से संक्रमित धूलकण कोई स्वस्थ व्यक्ति के श्वास के साथ फेफड़ों में चले जाते है या सीधे ही थूक के कणों के सम्पर्क में आने से रोग फैलता है |

टीबी मायकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बेसिलस के कारण होता है | इस बेसिलस को एसिड फ़ास्ट बेसिलस (acid fast bacillus) कहते है | इन्हें ट्यूबरकल बेसिलस भी कहते है क्योंकि यह छोटा गोल क्षेत्र या ट्यूबरकल बनाते है | जब व्यक्ति संक्रमित होता है तब यह ट्यूबरकल बसिल्लाई आपस में मिलकर उत्तक के एक बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर देते है और इस प्रक्रिया के बाद caseation और फाइब्रोसिस हो जाता है |

caseation (कजिएसन) यह ट्यूबरकल्स के टूटने और गलने की प्रक्रिया होती है जिसकी वजह से घाव या फोड़ा बन जाता है | जो द्रवित होकर टीबी का पिप अर्थात एक प्रकार का द्रव बना देता है | घाव के फुट जाने पर कैविटी या साइनस बनता है |

फाइब्रोसिस या तन्तुमयता में ट्यूबरकल्स के आसपास फाइब्रोसिस का निर्माण होता है | यह फाइब्रोसिस शरीर द्वरा इन्फेक्शन को रोकने का एक प्रयत्न होता है एवं कुच्छ हद तक यह अपना काम भी करता है | इससे घाव ठीक हो जाता है लेकिन इसके धब्बे रह जाते है जो एक्सरे में देखे जा सकते है |

ये दोनों caseation और fibrosis दोनों एक साथ होते है | जब शरीर में अधिक caseation और कम फाइब्रोसिस होता है तो यह रोग को गंभीर कर देता है | लेकिन जब फाइब्रोसिस अधिक होतो टी बी के घाव ठीक होने लगते है तथा बीमारी या तो लगभग ठीक हो चुकी या फिर रोग का संक्रमण रुक गया है |

टीबी (तपेदिक) के लक्षण / Sign and Symptoms of TB

  • लगातार 2 हफ्ते से अधिक खांसी का आना जो प्राय: बीडी या सिगरेट पिने से भी हो सकती है | यह लक्षण टीबी का पहला लक्षण होता है |
  • छाती में दर्द रहना जो खांसते और गहरी साँस लेते समय अधिक होता है |
  • छोटी छोटी और उखड़ी सांसे |
  • मुख्यत: गर्दन के लिम्फ नोड्स में सुजन होना |
  • वजन और भूख में कमी होना |
  • बैचनी और सुस्ती रहना |
  • हल्का बुखार रहना |
  • रात में सोते समय पसीना आना |
  • थकावट |
  • खांसी के साथ चमकीला रंग के खून का आना (Haemoptysis) |
  • सर्दी में भी पसीना आता हो |

टीबी को डायग्नोस करना या टीबी की जांच

1. Chest X-Ray

इस रोग में प्राय: छाती का एक्सरे लिया जाता है एक्सरे में प्राय: सफ़ेद रंग के कैल्शिफाईड धब्बे दिखाई देते है | जिसमे टीबी के होने का संकेत मिल जाता है | एक्सरे में टीबी की वजह से फेफड़ों में भरा हुआ पानी भी पता चल जाता है |

2. Sputum For AFB

रोग की पुष्टि कफ के परिक्षण से होती है | जब कफ में एसिड-फ़ास्ट बेसिलाई की उपस्थिति पायी जाती है तो रोग का निर्धारण हो जाता है | लेबोरेट्री टेस्ट के लिए रोगी के बलगम का सैंपल लिया जाता है और इसे एक विशिष्ट रूप से रंगकर (जील-निलसन तकनीक) मिक्रोस्कोप से परिक्षण किया जाता है | अगर कफ में बेसिलाई की उपस्थिति पायी जाती है तो टीबी से संक्रमित माना जाता है | कभी – कभार कफ को संवर्द्धन भी किया जाता है ताकि बेसिलाई अर्थात जीवाणुओं की वृद्धि को देखा जा सके |

3. Mantoux Test in Hindi

Mantoux Test

Mantoux Test

MT टेस्ट को अन्य कई नामो से जाना जाता है जैसे – Mantoux Screening Test, Mendel Mantoux Test, Tuberculin Sensitivity test, Prequet test और PPD (Purified Protein Drivative) आदि | इस टेस्ट में ट्यूबरकल बेसिलाई से प्राप्त सुद्ध प्रोटीन को 0.1 ml की मात्रा में त्वचा की उपरी परत (intradermal) में प्रवेश करवाया जाता है | इस इंजेक्शन को हाथ के सामने की तरफ कोहनी और हथेली के बिच में लगाया जाता है एवं इंजेक्शन साईट पर मार्कर से घेरा कर दिया जाता है | साथ ही इंजेक्शन के लगाने का समय नोट किया जाता है | इंजेक्शन के लगाने के 48 से 72 घंटे बाद इसका परिक्षण किया जाता है | परिक्षण के दौरान लगाये गए इंजेक्शन की जगह पर 10 mm से बड़ा लाल उभरा हुआ चकता मिलता है तो इसे ट्यूबरकुलीन पॉजिटिव (tuberculin positive) कहा जाता है |

टीबी / तपेदिक का उपचार

बच्चों को टीबी से बचाने के लिए उनका BCG से वैक्सीनेसन किया जाता है | BCG (बेसिलस कैलमेट ग्युरिन) में ट्यूबरक्युलिन बेसिलस को रसायनों द्वारा कमजोर स्थिति में कर दिया जाता है ताकि वह संक्रमण न फैला पाए | इसके बाद ही इसे बच्चो के बाएं कंधे पर  intradermal (त्वचा के निचे) लगाया जाता है | 3 सप्ताह में यह पक जाता है | जो की प्रदर्शित करता है की बच्चे के शरीर में अब ट्यूबरकुलीन बेसिलस से लड़ने की क्षमता विकसित हो गई है |

टीबी के उपचार में कीमोथेरपी DOTS (Directly Observed Treatment Short Course) के द्वारा इसका सफलता पूर्वक इलाज किया जा सकता है | शुरुआत के दो से तीन सप्ताह तक रोगी को अस्पताल में रखने की सलाह दी जाती है | ताकि रोगी को परिवार के अन्य सदस्यों विशेष रूप से यदि घर में छोटे बालक हो से पर्थक किया जा सके और इन्फेक्शन को फेलने से रोका जा सके, टीबी में रोग की गंभीरता और रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता के अनुसार दवाई का समय निर्धारित किया जाता है | एक बार दावा शुरू करने के बाद इसको बंद नहीं किया जाता जब तक की टीबी / तपेदिक ठीक नहीं हो जाता | अनियमित रूप से ली जाने वाले दवाई से अधिकांश टीबी रोगियों में दवाइयों के प्रति क्षयरोग बेसिलस में प्रतिरोधक क्षमता पैदा होजाती है | टीबी का इलाज 6 से 9 माह तक चलता है और इसको रोग की गंभीरता के अनुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है |

डॉट्स (टीबी की दवा) में काम में ली जाने वाली दवाइयों के नाम है  – 1. Isoniazid 2. Rifampicin 3. Ithambutol 4. Pyrazimade ये सभी ओरली दी जाती है |

5. Streptomycin इसे IM रूट से इंजेक्शन फॉर्म में दिया जाता है |

धन्यवाद |

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