जड़ी - बूटियां

चन्द्रशूर / Garden Cress (Lepidium Sativium) – परिचय एवं औषधीय गुण

चन्द्रशूर

चन्द्रशूर (Garden Cress) / Lepidium Sativium in Hindi

चन्द्रशूर के औषधीय रबी की फसल है | सम्पूर्ण भारत और तिब्बत में इसकी खेती की जाती है | इसके क्षुप को पशुओं के आहार के काम में लिए जाता है | इसकी पतियों को सलाद आदि में काम लिया जाता है | इसके क्षुप की लम्बाई 1/2 से 1.5 फीट तक होती है |

चन्द्रशूर

इसके पत्र लम्बे वृंत पर लगे हुए भालाकृति में होते है | पौधे के पुष्प छोटे सफेद रंग की लम्बी मंजरियों में होते है | इस पर लगने वाली फली चक्राकार तथा कोष्ठयुक्त होती है | प्रत्येक कोष्ठ में एक बीज होता है जो लाल रंग का रंग के कुछ लम्बे नोंककृति में होते है | अगर इनको जल में बीघो दिया जाए तो इन पर लुआब पैदा हो जाता है |

चन्द्रशूर का रासायनिक संगठन

इसमें एक प्रकार का उड़नशील तेल, तेल, बैन्जिल आइसो थायोसाईंनेट आदि | इसके बीज में एक विशेष प्रकार का स्थिर तेल, प्रोटीन, वसा, फास्फोरस, कैल्शियम तथा गंधक रहता है |

चन्द्रशूर के गुण – धर्म 

इसका रस कटु और तिक्त | गुणों में यह लघु , रुक्ष एवं तीक्षण | यह उष्ण प्रकृति का होता है अर्थात इसका वीर्य उष्ण एवं पचने के बाद इसका विपाक कटु होता है | अपने इन्ही औषधीय गुणों के कारण यह कफ एवं वात शामक होता है | आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में इसका प्रयोग कटीशूल, संधिवात, वातरक्त एवं शुक्र दोष आदि में किया जाता है |

औषध रूप में इसके बीजों का इस्तेमाल किया जाता है | आयुर्वेद में इससे चतुर्बीज चूर्ण नामक विशिष्ट योग तैयार किया जाता है |

About स्वदेशी उपचार

स्वदेशी उपचार आयुर्वेद को समर्पित वेब पोर्टल है | यहाँ हम आयुर्वेद से सम्बंधित शास्त्रोक्त जानकारियां आम लोगों तक पहुंचाते है | वेबसाइट में उपलब्ध प्रत्येक लेख एक्सपर्ट आयुर्वेदिक चिकित्सकों, फार्मासिस्ट (आयुर्वेदिक) एवं अन्य आयुर्वेद विशेषज्ञों द्वारा लिखा जाता है | हमारा मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से सेहत से जुडी सटीक जानकारी आप लोगों तक पहुँचाना है |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.