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मैनिंजाइटिस (दिमागी बुखार) / Meningitis – क्या है , इसके प्रकार ,लक्षण और उपचार

मैनिंजाइटिस इन हिंदी

मैनिंजाइटिस / Meningitis in Hindi

मैनिंजाइटिस अर्थात दिमागी बुखार | सभी ने इस रोग के बारे में जरुर सुना होगा | यह रोग मिनिन्जिस के प्रदाह अर्थात मष्तिष्क और रीड की हड्डी के आसपास सुजन के कारण होती है | दिमागी बुखार में सही समय पर इलाज न मिल पाने या करवा पाने के कारण इस रोग से पीड़ित 50% रोगी मृत्यु के ग्रास बनते है |

मैनिंजाइटिस इन हिंदी

मेनिन्जेस जो मष्तिष्क और रीड की हड्डी को घेरता है उसमे जब संक्रमण हो जाता है तो उस अवस्था को मैनिंजाइटिस कहते है | यह संक्रमण कई कारणों से हो सकता है, जैसे बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण, किसी वायरस के कारण , चोट या फंगल इन्फेक्शन के कारण भी हो जाता है | यह रोग कमजोर रोगप्रतिरोधक क्षमता के लोगों को जल्दी घेरता है | कभी भी एवं किसी को भी यह रोग अपनी चपेट में ले सकता है | इस रोग के कोई परिभाषित कारण नहीं बताये जा सकते |

मैनिंजाइटिस के प्रकार / Types of Meningitis

यह रोग 5 प्रकार का होता है | इन सभी प्रकार के मैनिंजाइटिस के लक्षण एवं चिन्ह प्राय समान ही होते है, कुछेक लक्षण अलग हो सकते है एवं ये सभी मेनिन्जिस के प्रदाह (सुजन) के कारण होते है | जिसमे अंतरमष्तिष्किय दबाव बढ़ जाता है | इनका उपचार भी इनके लक्षणों के ऊपर निर्भर करता है | सबसे पहले लक्षणों के आधार पर इसके प्रकार का निर्धारण किया जाता है उसके बाद रोग का उपचार किया जाता है | मैनिंजाइटिस के 5 प्रकार निम्न है –

  • बैक्टीरियल  मैनिंजाइटिस 
  • वायरस मैनिंजाइटिस 
  • फंगल मैनिंजाइटिस 
  • पैरासिटिक मैनिंजाइटिस 
  • असंक्रामक मैनिंजाइटिस 

1. बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस / Bacterial Meningitis

बैक्टीरियल मष्तिष्कीय बुखार बैक्टीरिया के कारण फैलती है | जब खून में उपस्थित बैक्टीरिया मष्तिष्क एवं रीड की हड्डी में पहुँचता है तो यह मेनिन्जिस में सुजन पैदा कर देते है और यही कारण से व्यक्ति दिमागी बुखार से ग्रषित हो जाता है | बैक्टीरिया मुख्यत: अधिक भीड़ – भाड़ वाली जगह पर जाने या इन्फेक्टेड के सम्पर्क में आने से होता है | सिर दर्द, गर्दन अकड़ना एवं फ्लू के जैसे लक्षण प्रकट हो जाते है | ये लक्षण 1 से 7 दिन में दिखाई देने शुरू हो जाते है | अधिकतर इसका आरंभ एवं अवधि बहुत तीव्र एवं गंभीर होती है | समय पर निदान एव उपचार से रोगी की जान बचाई जा सकती है |

2. वायरस मष्तिष्कीय बुखार / Virus Meningitis

इस प्रकार की बुखार वायरल इन्फेक्शन के कारण होती है | जो बैक्टीरियल मैनिंजाइटिस से कम गंभीर होती है | इसमें रोगी को अचानक से बुखार आना, सिरदर्द होना, गर्दन दर्द होना एवं बैक्टीरियल दिमागी बुखार के सभी लक्षण इसमें भी प्रकट होते है |

इस प्रकार का मैनिंजाइटिस अस्वस्थता, वायरस के कारण, मच्छरों के कारण , चिकन पॉक्स आदि के कारण इन्फेक्टेड वायरस के सम्पर्क में आने से फैलता है | इससे बचने का सबसे आसन उपाय है की स्वस्थता का पालन करे, चाहे वह आहार को लेकर हो या अपने हाथों या वस्तुओं की स्वस्थता हो |

3. फंगल मैनिंजाइटिस / Fungal Meningitis

यह मैनिंजाइटिस सभी प्रकारों से बिलकुल भिन्न है | क्योंकि इसका आरंभ धीरे – धीरे होता है और लक्षण प्रकट होने से पहले कई सप्ताह बीत जाते है | जो स्थिति को गंभीर बनाते है | कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता के लोग या किसी विशिष्ट गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को होने का खतरा अधिक रहता है | अधिकतर जब कोई फंगस शरीर में प्रवेश करता है तो यह खून के माध्यम से मष्तिष्क तक पहुँच जाता है और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के रोगी इसकी चपेट में आ जाते है |

4. पैरासिटिक मष्तिष्क ज्वर / Parasitic Meningitis

इस प्रकार की मष्तिष्किय बुखार अधिक घातक होती है | यह एक विशिष्ट प्रकार के परजीवी “Naegleria fowleri” के कारण उत्पन्न होती है | इसमें भी मष्तिष्क में इन्फेक्शन होने में 1 से 12 दिन का समय लग सकता है | यह परजीवी गन्दी जगहों जैसे – गंदे नालों, ओध्योगिक क्षेत्रों से निकले हुए तरल पदार्थों एवं इन्फेक्टेड क्षेत्र में अधिक पाया जाता है | इसके सम्पर्क में आने से यह परजीवी श्वास के माध्यम से मनुष्य तक पहुँच जाता है फिर रोग के लक्षण प्रकट करता है |

5. असंक्रामक दिमागी बुखार  / Non-Communicable Meningitis 

यह मैनिंजाइटिस किसी इन्फेक्शन के सम्पर्क में आने से नहीं फैलता | बल्कि गंभीर रोग जैसे – एड्स, कैंसर , सिर की चोट, मष्तिष्क की सर्जरी या दवाइयों के कारण होता है | लक्षण में सिरदर्द, गर्दन में अकडन, बुखार, गले में खरास के साथ गर्दन में दर्द एवं उल्टी होना या मानसिक स्थिति में परिवर्तन आदि दिखाई देते है |

मैनिंजाइटिस के लक्षण और चिन्ह / Symptoms of Meningitis

  • रोग का आरंभ – अधिकतर मष्तिष्क बुखार में लक्षण अचानक प्रकट होते है सिर्फ फंगल प्रकार को छोड़कर , क्योंकि इसमें 1 – 2 सप्ताह तक लक्षण प्रकट होते है | रोगी गंभीर रूप से बीमार एवं विषाक्त दिखाई देता है | बुखार भी अधिक होता है एवं तापक्रम की अधिकता के अनुसार नाडी की गति कम होती है |
  • सिरदर्द – सिरदर्द स्थाई रूप से निरंतर होते रहता है | यह अचानक से एवं शीघ्र आरंभ होता है एवं साथ में उल्टियाँ भी होने लगती है |
  • उल्टियाँ – गंभीर सिरदर्द और उल्टियाँ एक साथ होना मष्तिष्क में सुजन का सूचक हो सकता है | अत: ऐसे मामलों में चिकित्सक से जांच करवानी आवश्यक होती है |
  • रोगी के गर्दन में जकडन रहती है एवं साथ ही सिरदर्द भी गंभीर रहता है |
  • अधिकतर रोगी चिडचिडा एवं निर्दालू हो जाता है | बिस्तर पर हाथ  पैर मरता रहता है |
  • रोगी रौशनी से बचने की कोशिश करता है क्योंकि रौशनी असहनीय होती है इसमें रोगी की समस्या और बढ़ जाती है |
  • बच्चे में शरीर में एंठन और दौरे की सम्भावना भी रहती है |
  • रोगी की गर्दन जकड जाती है | अगर सिर को मोड़ने की कोशिश की जाती है तो अत्यधिक दर्द एवं प्रतिरोध उत्पन्न होता है | गर्दन की पेशियों का सख्त्पन मिनिन्जिस में सुजन के कारण होती है | अगर रोगी गर्दन को मोड़ने की कोशिश करता है तो मिनिन्जिस भी तनती है जिससे रोगी को असहनीय दर्द का अनुभव होता है और तभी रोगी गर्दन को अकड़ कर चलता है |
  • घुंटने को मोड़ने पर भी मिनिन्जिस में दर्द का अहसास होता है | दरशल जब रोगी घुटने को सीधा करने की कोशिश करता है तो स्पाइनल कॉर्ड की मिनिन्जिस तनती है जो रोगी को असहनीय दर्द देती है |

उपचार की अवधि

यदि इसका उपचार समय पर नहीं किया जाए तो वायरस मैनिंजाइटिस को छोड़कर सभी प्रकारों के मैनिंजाइटिस में रोगी बेहोश हो जाता है | रोगी का मल – मूत्र निकल जाता है एवं बहुधा रोगी की मृत्यु भी हो जाती है | इसलिए समय रहते रोगी का उपचार करवाना अत्यंत आवश्यक होता है | उपचार जितना तीव्रता से उपलब्ध करवाया जायेगा रोगी के ठीक होने की सम्भावना भी उतनी ही अधिक होगी |

इस रोग की पहचान के लिए लम्बर पंक्चर (Lumbar puncture) किया जाता है | इसके लिए सेप्टिक तकनीकों के द्वारा पांचवे – चौथे या तीसरे – चौथे लंबर वर्तिबा के बिच विशेष प्रकार की नीडल (जिसमे स्तिलेट लगा हुआ होता है) को प्रविष्ट करवाया जाता है | यह नीडल ड्युरोमेटर को छेद कर सबएरेक्नोइड स्थान में चली जाती है | अब स्टीलेट को बहार खींचने पर नीडल से एक द्रव (CSF) बहने लगता है | इस द्रव की प्रयोगशाला में जांच एवं परिक्षण के द्वारा मैनिंजाइटिस के वास्तविक प्रकार का पता लग पता है | अगर निकला हुआ द्रव पिपयुक्त होता है तो उपचार भी शीघ्र प्रारंभ करना पड़ता है |

धन्यवाद |

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