विटामिन सी / Vitamin ‘C’ – लाभ , कार्य , कमी और अधिकता के शरीर पर प्रभाव

विटामिन सी / Vitamin ‘C’

विटामिन सी से तो सभी भली भांति परिचित है | बुजुर्ग हो या छोटा बच्चा सभी को इस विटामिन के बारे में थोड़ा बहुत ज्ञान तो अवश्य होता है | अधिकतर लोग तो विटामिन सी से होने वाले फायदे से भी परिचित होते है | अत: आपके इसी ज्ञान को बढ़ाने के लिए हमने यह आर्टिकल उपलब्ध करवाया है |

इस आर्टिकल के माध्यम से आप ‘Vitamin C’ की सम्पूर्ण जानकारी जैसे – इस विटामिन की खोज कब हुई ?, इसकी विशेषताएँ, उपयोगिता, शरीर में क्या – क्या कार्य करता है ?, कमी एवं अधिकता से होने वाले नुकसान आदि सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को आप आसानी से जान सकते है |

विटामिन सी हमारे शरीर में कई तरह से लाभदायी होता है | यह हमारे शरीर में रासायनिक क्रियाओं और शरीर को प्रतिरोधी क्षमता देने में मुख्य भूमिका निभाता है | इस विटामिन में एंटी ओक्सिडेंट गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते है इसलिए शरीर को रोगों से लड़ने और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होता है | इसे एस्कॉर्बिक अम्ल भी कहा जाता है अर्थात इसका दूसरा नाम Ascorbic Acid है | विटामिन सी का प्रमुखता से उपयोग स्कर्वी रोग के उपचार के लिए किया जाता है |

विटामिन सी
Vitamin ‘C’

कैसे और कब हुई इस विटामिन की खोज ?

इस विटामिन की खोज स्कर्वी रोग के उपचार के दौरान हुई थी | 13वीं शताब्दी में स्कर्वी रोग भयंकर रूप से फैला हुआ था | लेकिन वैज्ञानिकों को इस बात का पता नही चल सका की यह रोग किस तत्व की कमी के कारण होता है | उस समय यह रोग समुद्री नाविकों और जहाज – यात्रियों को अधिक होता था | उनके भोजन में ताजे फलों, सब्जियों और हरी पत्तेदार सब्जियों का अत्यधिक आभाव रहता था | क्योंकि वे लम्बे समय तक यात्रा करते थे | लेकिन ठीक इसके विपरीत जब इन्हें भोजन में फल जैसे संतरा, निम्बू और ताज़ी सब्जियों को शामिल किया गया तब इनका रोग बिल्कुल ठीक हो जाता था |

सन 1747 ई. में इंग्लैण्ड के चिकित्सक लिंड (Lind) ने बताया की नाविकों को होने वाले स्कर्वी रोग के निवारण के लिए ताजे फल संतरे और निम्बू के रस का सेवन करना चाहिय | इसके पश्चात सन 1925 में सेंट ग्योर्गी (Szent Gyorgi) नामक वैज्ञानिक ने बंदगोभी , संतरे और एड्रेनल ग्रंथि से एक विशेष प्रकार के तत्व को प्रथक किया जिसे इन्होने Hexuronic Acid नाम दिया |

सन 1932 ई. में वाफ और किंग (Waugh एंड Kingh) ने निम्बू के रस से इसे शुद्ध रूप में प्रथक किया और इसको विटामिन ‘C’ नाम दिया | बाद में इन्होने ये भी प्रमाणित किया की सेंट ग्योर्गी के द्वारा खोजे गए Haxuronic अम्ल को भी विटामिन ‘C’ ही कहा जा सकता है |

विटामिन सी की विशेषताएँ 

  • विटामिन ‘C’ एक शक्तिशाली प्रतिकर्मक होता है |
  • यह सफ़ेद रंग का रवेदार और मोनोसैकराइड से बिलकुल मिलता-जुलता होता है |
  • यह जल में घुलनशील विटामिन है |
  • वसा , बेंजीन, इत्थर और पेट्रोलियम में अघुलनशील पदार्थ है |
  • इससे समृध भोज्य पदार्थो को अगर काट कर खुले में छोड़ दिया जाये तो भोज्य पदार्थो के रंग में परिवर्तन हो जाता है | इसका मुख्या कारण ऑक्सीकरण की क्रिया होन होती है |
  • उच्च तापमान में गरम करने से यह जल्द ही नष्ट हो जाता है |
  • तरल अवस्था में यह जल्दी नष्ट होता है |

विटामिन सी के स्रोत या वाले फल / Source of Vitamin ‘C’

खट्टे और रसदार फलों में यह विटामिन अधिकता से पाया जाता है | जैसे निम्बू, संतरा, अन्नानास, आम , पपीता, टमाटर, चौलाई, बंदगोभी, धनिया पता आदि | मात्रा के हिसाब से देखा जाए तो विटामिन सी आंवला और अमरुद में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है |  इसके अलावा सहजन की पतियाँ , पालक , मुली, अंकुरित अनाज और दालों में भी यह प्रचुरता से मिलता है |

सेब, केला, अंगूर, कटहल आदि में यह अल्प मात्रा में मिलता है | विटामिन सी की विशेषता होती है की यह वनस्पतिज भोज्य पदार्थो में ही पाया जाता है | प्राणिज भोज्य पदार्थो में इस विटामिन की कमी होती है | अर्थात मांस, मछली, अंडा आदि में इस विटामिन की उपस्थिति नगण्य होती है |

विटामिन सी के लाभ या कार्य / Benefits and Functions of Vitamin ‘C’

शरीर में उपस्थित लोह तत्व के अवशोषण में सहायक 

विटामिन ‘C’ शरीर में उपस्थित लौह तत्व के अव्शोष्ण को सरल, शीघ्र एवं सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | इसका कार्य लौह तत्व के फेरिक को फेरस (Ferrus) में बदलना होता है | फेरिक के फेरस में बदलने से आंतो में लौह तत्व का अवशोषण शीघ्रता से हो जाता है |

अस्थियों के निर्माण में सहायक 

यह अस्थियों के स्वस्थ वर्द्धि, विकास एवं निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है | जब शरीर में विटामिन सी की कमी हो जाती है तो अस्थियों में परिवर्तन आ जाता है , क्योंकि अस्थि मैट्रिक्स तथा संयोजक पदार्थों का निर्माण ठीक प्रकार से नहीं हो पाता | इसके अलावा भी अस्थियों में विद्यमान अस्थि तंतु रासायनिक परिवर्तनों के कारण फीब्रोब्लास्ट में बदल जाते है जिससे अस्थियाँ कमजोर हो जाती है |

कैंसर होने का खतरा कम करता है 

इस विटामिन में प्रचुर मात्रा में एंटी ओक्सिडेंट होते है | इसी कारण से यह फ्री रेड़ीकाल्स से बचाता है | शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है जल्द ही शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता उत्पन्न कर देता है | जिससे शरीर रोगों से बचा रहता है| यह कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तन और डीएनए में होने वाले परिवर्तन से भी शरीर को सुरक्षित रखता है जिस कारण से कैंसर जैसे रोग होने की सम्भावना कम हो जाती है |

पाचन क्रिया को सुधरता है 

विटामिन ‘C’ शरीर में को-एंजाइम की तरह कार्य करता है | अर्थात यह शरीर में चयापचयी क्रियाओं को संपन्न करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | इसके अलावा विटामिन सी कई हाइड्रोक्सीलेसन क्रियाओं को भी संपन्न करने में महत्वपूर्ण तत्व होता है | नियमित रूप से विटामिन सी से समर्द्ध आहार का सेवन करते रहने से शरीर में चयापचय की क्रियाएँ आसानी से होती रहती है और शरीर में पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्याएँ नहीं होती |

शरीर में कोलोजेन के निर्माण में लाभदायक 

यह शरीर में कोलोजन के निर्माण और अंत: कोशिकिये सीमेंट जैसे पदार्थो के निर्माण में अत्यंत आवश्यक तत्व होता है | इसका कार्य शरीर में लम्बी अस्थियों के सिरे, दांतों के सीमेंट वाला भाग और रक्त कोशिकाओं की दीवारों का निर्माण करना भी होता है | घावों को जल्दी भरने , कोषों का आपस में बंधन करना , दांतों को मजबूत बनाना आदि काम भी कोलोजन के द्वारा होते है और कोलोजन का निर्माण विटामिन सी के द्वारा होता है | अत: अगर शरीर में विटामिन c की कमी हो जाए तो घाव देरी से भरेंगे, दांतों के मसुडो से खून निकलने लगेगा और दांत कमजोर होकर जल्दी ही गिर जायेंगे |

रोग – प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में महत्वपूर्ण 

यह विटामिन शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढाने का कार्य करता है | शरीर में संक्रमण की अवस्था में जैसे T.B. , सर्दी, जुकाम, निमोनिया, मलेरिया और डिप्थेरिया आदि रोगों में शारीरिक कोषों और तंतुओ को टूटने से बचाता है | एंटी ओक्सिडेंट गुणों से युक्त होने के कारण शरीर को रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है |

विटामिन सी की कमी के प्रभाव / Vitamin ‘C’ Deficiency 

अगर विटामिन सी से समृद्ध आहार का सेवन लम्बे समय तक ना किया जाए तो शरीर में इस विटामिन की कमी हो जाती है | जैसे ताजे फल व सब्जियां आदि का सेवन 6 से 7 महीने के लम्बे अंतराल तक न किया जाए तब निश्चित ही शरीर में इस विटामिन की कमी हो जाती है | इसकी कमी से शरीर में स्कर्वी रोग हो जाता है |

शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और जल्द ही शरीर बिमारियों के चपेट में आ जाता है | इसके अलावा दांतों का कमजोर होना , हृदय सम्बन्धी समस्याएँ , अस्थियाँ कमजोर हो जाती , पाचन क्रिया भी कमजोर होकर शरीर अस्वस्थ रहें लगता है |

विटामिन सी की अधिकता के प्रभाव / Effects of Excess of Vitamin ‘C’

शरीर में इस विटामिन की अधिकता होने से कोई विषाक्त और हानिकारक प्रभाव नहीं होता | क्योंकि जल में घुलनशील विटामिन होने के कारण इसका उत्सर्जन शरीर से मूत्र के द्वारा हो जाता है | लेकिन फिर भी थोड़े बहुत शारीरक प्रभाव है जो कम को ही देखने को मिलते है जैसे इसकी अधिकता से डायरिया होना , पत्थरी होना और पेट में दर्द आदि शिकायते हो सकती है |

धन्यवाद |

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