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आयोडीन

आयोडीन / Iodine : स्रोत , लाभ , कार्य और इसकी अधिकता के प्रभाव

आयोडीन / Iodine 

खनिज लवण हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते है | इन्ही खनिज लवणों में आयोडीन भी प्रमुख खनिज लवण है | शारीरिक स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए आयोडीन अतिमहत्वपूर्ण खनिज लवण है | शरीर को दैनिक रूप से 100 से 150 मिली ग्राम तक इसकी आवश्यकता होती है | भले ही इसकी आवश्यकता कम मात्रा में होती हो लेकिन मानव स्वास्थ्य के लिए इसकी आवश्यकता को नाकारा नही जा सकता | गर्भवती महिलाओं और बच्चो में इस लवण की आवश्यकता अधिक होती है | हमारी थाइरोइड ग्रंथि (Thyroid Gland) से निकलने वाले हार्मोन Thyroxine का आयोडीन मुख्य कार्यकारी अवयव है | यह थायरोक्सिन हार्मोन आयोडीन युक्त प्रोटीन ही होता है |

आयोडीन

thyroxine शरीर के अनेक क्रिया – कलापों के संपन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | यह शरीर के विभिन्न मानसिक एवं शारीरिक गतिविधियों को नियमित करने में अमूल्य योगदान देता है | इसकी कमी से शरीर में शारीरिक और मानसिक वर्द्धि रुक जाती है | वयस्कों में इसकी कमी से “गलगंड” या घेंघा रोग हो जाता है | बच्चों में इसकी कमी से क्रेतिनिस्म ( Cretinism ) नामक रोग हो जाता है |

आयोडीन के स्रोत / Source of Iodine in Hindi 

समुद्री नमक इसका प्रमुख साधन है जिसमे यह प्रचुर मात्रा में विद्यमान रहता है | इसके अलावा जिन स्थानों के पानी में और भूमि में आयोडीन पाया जाता है , उन स्थानों में उगाये जाने वाले खाद्य पदार्थों में भी इसकी मात्रा प्रचुरता से होती है | समुद्र के जल में यह प्रचुरता से मिलता है | इसीलिए समुद्री नमक, समुद्री मछली , समुद्री घास (Seaweads) आदि आयोडीन प्राप्ति के प्रमुख स्रोत है |

जहाँ की भूमि और पानी में इसकी कमी होती है उसमे उगने वाले खाद्य पदार्थो में इसकी कमी को देखा जा सकता है | हमारे देश के हिमालय के तराई क्षेत्र जहाँ की भूमि और पानी में इसकी कमी होती वहां पर आयोडीन युक्त नमक से इसकी पूर्ति की जाती है | फल व् सब्जियों में इसकी मात्रा उनके उगाये जाने वाले क्षेत्र पर निर्भर करती है अगर भूमि और जल में आयोडीन प्रचुर मात्रा में है तो इनमे होने वाले खाद्य पदार्थो में भी यह प्रचुरता से प्राप्त होगा , लेकिन अगर उगाये जाने वाली जमीन और पानी में इसकी अनुपस्थिति है तो वे खाद्य पदार्थ भी आयोडीन से नगण्य होंगे |

विभिन्न भोज्य पदार्थो में आयोडीन की मात्रा –

  1. दूध एवं दूध से बने व्यंजन            –            40ug / 100 ग्राम
  2. मांस                                                  –            40ug / 100 ग्राम
  3. मुर्गी का अंडा                                   –             90ug / 100 ग्राम
  4. अनाज                                              –             40ug / 100 ग्राम
  5. हरी पतेदार सब्जियां                     –             30ug / 100 ग्राम
  6. ताजे फल                                         –              20ug / 100 ग्राम

मानव शरीर में आयोडीन के लाभ या कार्य / Benefits or Functions of Iodine in Hindi

थायरोइड ग्रंथि से स्रावित होने वाले थाय्रोक्सिन हार्मोन का मुख्य अवयव आयोडीन ही होता है | थाय्रोक्सिन हार्मोन आयोडीन के चार अणु होते है | अत: मानव शरीर में थाय्रोक्सिन हार्मोन के जो कार्य होते है वही आयोडीन के कार्य माने जा सकते है | यह खनिज लवण बालकों के शारीरिक विकास और वर्द्धि के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण विटामिन है |

शारीरिक विकास एवं वर्द्धि में 

आयोडीन बच्चों के शारीरिक विकास एवं मानसिक विकास के लिए एक अत्यंत आवश्यक खनिज लवण है | इसकी कमी से बालकों का शारीरिक और मानसिक विकास बाधित हो जाता है और बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते है | इसकी कमी से बच्चों में क्रेतिनिज्म ( Cretinism) नामक रोग हो जाता है | वयस्कों में इसकी कमी से Myxoedema / मिक्सीडीमा एवं घेंघा रोग हो जाते है

गर्भवती महिलाओं में इसकी आवश्यकता अधिक होती है | गर्भवती महिलाओं में यह ग्रभाशय की मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करने का कार्य करता है | इसकी कमी से होने वाले बच्चे पर भी प्रभाव पड़ता है | प्रसव काल के बाद जब महिलाऐं अपने बच्चे को दूध पिलाती है तो इसके माध्यम से बहुत सा आयोडीन शरीर से बाहर निकल जाता है | इसलिए दूध के निर्माण और प्रसूता के शरीर में इसकी कमी न हो के लिए उचित मात्रा में आयोडीन का इस्तेमाल करना चाहिए |

यह शरीर के ताप को नियंत्रित करने में सहायता करता है |

शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कुछ हद तक नियंत्रित करता है |

शरीर के कोषों में होने वाले परिवर्तन को नियमित एवं क्रमिक करने में सहायता करता है |

शरीर में प्रजनन शक्ति को बनाये रखने के लिए आयोडीन अत्यंत महत्वपूर्ण है | इसकी कमी से जानवरों में और कुछ हद तक मनुष्यों में भी बांझपन की समस्या देखने को मिलती है |

बालों और त्वचा के स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी आयोडीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | इसकी कमी से जल्द ही बाल झड़ने लगते है और त्वचा का रंग एवं रोनक बिगड़ने लगते है |

मेटाबोलिज्म की क्रिया की दर को नियमित एवं नियंत्रित करने में यह अत्यंत महत्वपूर्ण होता है |

आयोडीन की अधिकता से होने वाले नुकसान / Effects of Hyperactivity of Iodine

शरीर में इसकी अधिकता होने पर thayroxin / थाय्रोक्सिन हार्मोन का अधिक स्रवन होने लगता है | थाय्रोक्सिन के अत्यधिक स्रवन से Exopthalmic Goitre हो जाता जिसे ग्रेवस का रोग भी कहते है | अत: अधिक मात्रा में आयोडीन का इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक सिद्ध हो सकता है |

  • अधिक मात्रा में सेवन करने से थायरोइड कैंसर जैसे समस्याएँ हो सकती है |
  • पेट दर्द, उल्टी , दस्त और बुखार जैसी समस्याएँ हो सकती है |
  • हृदय की गति तेज हो जाती है |
  • त्वचा लाल हो जाती है |
  • शरीर का तापक्रम बढ़ जाता है |
  • स्त्रियों में इसकी अधिकता से अनियमित माहवारी की समस्या उत्पन्न हो जाती है |
  • अचानक बेहोसी और अचानक घबराहट होने जैसे लक्षण देखने को मिलते है |
  • मुंह और गले की समस्याएँ पैदा हो सकती है | स्वाद ग्रंथियों भी प्रभावित हो सकती है जिससे स्वाद का पता चलना बंद हो सकता है |

आयोडीन की दैनिक मांग / Daily Allowances of Iodine

भारतीय चिकित्सा अनुसन्धान समिति (ICMR) ने इसकी दैनिक मांग की कोई प्रस्तावना प्रस्तुत नहीं की है | लेकिन N.R.C. USA ने 1980 में भारतियों के लिए इसकी प्रस्तावना निम्न अनुसार प्रस्तुत की है | सारणी से समझें –

व्यक्ति की उम्रआयोडीन की मात्रा
mg./day
0 से 5 माह.04
6 से 12 माह.05
1 से 3 वर्ष.07
4 से 6 वर्ष.09
7 से 10 वर्ष.12
11 से 18 वर्ष.15
व्यस्क.15

धन्यवाद |

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