प्रोटीन / Protein – प्रोटीन के फायदे और श्रोत

Post Contents

प्रोटीन / Protein in Hindi 

प्रोटीन
protein details

प्रोटीन का हमारे आहार में प्रमुख स्थान है | शरीर की वर्द्धि और एवं सम्पूर्ण विकास के लिए प्रोटीन बहुत जरुरी है | शरीर में विभिन्न क्रियाकलापों के दौरान विभिन्न कोशिकाओं एवं तंतुओं की निरंतर टूट – फुट होती रहती है , जिसकी मरम्मत प्रोटीन ही करता है | रक्त, मांसपेशियां, यकृत, अस्थि के तंतु, त्वचा, बाल आदि के निर्माण के लिए प्रोटीन आवश्यक है | प्रत्येक कोशिकाएं प्रोटीन की बनी हुई होती है , अत: हम मान सकते है की प्रोटीन शरीर के लिए बहुत आवश्यक है एवं  प्रोटीन को “शरीर की आधारशिला” कहा जा सकता है |

क्या है प्रोटीन ? /  What is Protein in Hindi ?

प्रोटीन ग्रीक भाषा के शब्द ‘प्रोटीज ( Protease )’ से बना है | जिसका शाब्दिक अर्थ होता है – ” प्रथम स्थान ग्रहण करने वाला “| प्रोटीन की खोज सर्वप्रथम 1838 ई. में डच निवासी Muldar नामक रसायन शास्त्री ने की थी | उन्होंने अपने शोधों और अनुसंधानों में यह परिणाम निकाला की सभी प्राणियों की कोशिकाएं एवं ऊतक प्रोटीन के बने होते है | उन्होंने जटिल नाइट्रोजन युक्त पदार्थों को प्रथक करके उनका वर्णन किया और उन्हें “प्रोटीन ( Protein )” नाम दिया | इस प्रकार प्रोटीन की खोज एवं नामकरण Muldar ने की |

प्रोटीन शरीर में उपस्थित सभी तत्वों में से एक महत्वपूर्ण तत्व है | शरीर में मात्रा ( अधिकता )  के आधार पर देखा जाए तो पता चलता है की शरीर में जल के  बाद प्रोटीन का ही स्थान आता है |  अर्थात शरीर में जल की मात्रा अगर पहले स्थान पर है तो प्रोटीन दुसरे स्थान पर निश्चित है | हालाँकि शरीर में विभिन्न क्रियाओं के लिए कार्बोज और वसा जरुरी होती है | कार्बोज और वसा से ही हमें उर्जा प्राप्त होती है परन्तु सरंचना की द्रष्टि से देखा जाए तो ये क्रियाशील उतकों के निर्माण में मुख्या घटक नहीं है बल्कि शरीर के अधिकांश मांसपेशियों और तंतुओ में प्रोटीन मुख्य भाग होता है |

प्रोटीन का वर्गीकरण / Classification of Protein

प्रोटीन का वर्गीकरण तीन तरह से किया जाता है – (1) प्रोटीन की गुणवता के आधार पर , (2) प्रोटीन के भौतिक गुणों एवं घुलनशीलता के आधार पर, (3) प्रोटीन के प्राप्ति साधन के आधार पर |

निम्न सारणी से आसानी से आप प्रोटीन का वर्गीकरण समझ सकते है | –

प्रोटीन
Classification of Protein

 

प्रोटीन के कार्य और  फायदे / Work and Benefits of Protein

 

प्रोटीन के मानव शरीर में बहुत से फायदे है | मानव शरीर में जल के बाद दूसरा स्थान प्रोटीन का आता है | प्रोटीन शरीर की कार्य प्रणाली को दुरस्त रखता है | शरीर की वर्द्धि और विकास में प्रोटीन की महत्वपूर्ण भागीदारी होती है |प्रोटीन के कार्य और फायदों का वर्णन इस प्रकार हैं –

1 . शरीर की वर्द्धि और विकास करना ( Growth and Development of Body )

Protein शरीर की वर्द्धि और विकास के लिए फायदेमंद है | शरीर की कोशिकाएं protein की बनी होती है | कोशिकाएं ही उतकों का निर्माण करती है | कई सारे उत्तक मिलकर अंग बनाते है तथा कई अंग के मिलने से अंग – तंत्रों का निर्माण होता है | यदि protein प्रयाप्त मात्रा में , शरीर में नहीं रहेगा तो नविन कोशिकाओं का निर्माण नहीं होगो, फलत: उत्तको एवं अंगो का निर्माण संभव नहीं होगा | इसलिए शरीर की वर्द्धि और विकास में protein का महत्वपूर्ण स्थान है |

2 . तंतुओ के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत में प्रोटीन के फायदे ( Benefits of protein in maintenance and Regeneration of Tissue )

शरीर में निरंतर कोशिकाओं और उत्तको में टूट – फुट होती रहती है अर्थात शरीर के बीमार पड़ने , जल जाने , चोट लगने , घाव होने या दुर्घटना आदि होने पर वहां की कोशिकाएं और उत्तक क्षतिग्रस्त हो जाते है | इन टूटी – फूटी कोशिकाओं और उत्तको की मरम्मत और पुनर्निर्माण में protein मुख्या भूमिका निभाता है | चोट आदि के कारण कई बार शरीर से खून बहने लगता है , अगर शरीर में उचित मात्रा में protein नहीं हो तो  खून का बहना नहीं रुक सकता | दर्सस्ल protein का एक प्रकार जिसे फाईब्रिन प्रोटीन कहते है उसका काम होता है की वह रक्त के बहने पर उस स्थान पर आकर फाईब्रिनोजन का जाल बना ले ताकि खून बहना रुक सके | अगर फाईब्रिन Protein की कमी होतो फाईब्रिनोजन का जाल देरी से बनता है और शरीर से रक्त अधिक मात्रा में बह जाता है |

3 . शरीर में एसिड की मात्रा को नियंत्रित करता है 

Protein हमारे शरीर में एसिड ( अम्ल ) और क्षार की मात्रा को संतुलित रखता है | जब कभी शरीर में अम्ल और क्षार कम या अधिक मात्रा में हो जाते है तो Protein स्वयं अम्ल या क्षार की तरह कार्य करने लगता है | इस प्रक्रिया को “प्रोटीन बफर” (Protein buffer) कहते है | हमारे शरीर में रक्त का PH वैल्यू स्थिर रहने का भी यही कारण है क्योकि protein शरीर के अम्ल और क्षार को संतुलित रखता है जिससे रक्त का pH भी समान रहता है |

4 . प्रोटीन शरीर में हारमोंस का निर्माण भी करता है 

protein शरीर में हारमोंस के निर्माण के लिए आवश्यक होते है | हारमोंस विभिन्न गतिविधियों को नियमित एवं नियंत्रित करते है | जैसे थ्य्रोक्सिन हार्मोन , ओक्शिकरण क्रिया एवं शारीरिक वर्द्धि को नियंत्रित करते है | उसी प्रकार protein के आभाव में हार्मोन का निर्माण और स्राव ठीक प्रकार से नहीं हो पता |

5 . एंजाइम का निर्माण करने में प्रोटीन के फायदे 

हार्मोन की तरह ही एंजाइम भी protein के ही बने हुए होते है | Protein ही शरीर में एंजाइम का निर्माण करते है और एंजाइम ही शरीर में विभिन्न क्रियाये जैसे – भोजन का पचना , ओक्शिकरण , चयापचय आदि को पूरा करते है | अत: शरीर में protein की कमी से भोजन का पचना और चयापचय की क्रिया ठीक ढंग से नहीं हो पाती और शरीर रुग्न हो जाता है |

6 . रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में प्रोटीन के फायदे 

शरीर में उपस्थित एंटीबॉडीज ही शरीर को विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती है और शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता करती है | शरीर में उपस्थित इन एंटीबॉडीज का निर्माण भी protein के द्वारा ही होता है | अगर हमारे आहार में protein की मात्रा कम है तो शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण सही ढंग से नही होगा एवं शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाएगी | फलस्वरुप शरीर जल्दी ही रोगों से ग्रषित हो जायेगा | अत: स्वस्थ और निरोग रहने के लिए protein युक्त भोजन को अपने आहार में सामिल करे |

7 . मांसपेशियों में मजबूती के लिए 

मांसपेशियों का शरीर में निरंतर संकुचन और प्रसारण होता रहता है | और इसी कारन से मांसपेशियां मजबूत बनती है | मांसपेसियों की मजबूती के लिए मायोसीन और एक्टिन ( Myosin and Actin ) कारगर होते है और इनका निर्माण बैगर protein के नहीं हो सकता | अत: protein की कमी से मांसपेशियों भी कमजोर रह जाती है | भोजन में protein की अधिकता वाले आहार को शामिल करे |

8 . आँखों की रोशनी के लिए भी protein फायदेमंद होता है 

आँखों के द्रष्टि को सामान्य बनाये रखने के लिए रोदोप्सिन ( Rhodopsin ) नामक पिगमेंट जिम्मेदार होता है | इस Rhodopsin पिगमेंट में Opsin नामक तत्व होता है जिसका निर्माण Protein से होता है | अत: आँखों की सम्पूर्ण रोशनी बनाये रखने के लिए अपने आहार में protein से युक्त आहार को शामिल करना चाहिए |

 

प्रोटीन के श्रोत वर्गीकृत 

 

वैसे तो protein के श्रोतों के बारे में आप सभी को अच्छी तरह से पता होगा लेकिन हम आपको Protein की गुणवता के आधार पर इसके श्रोतो के बारे में बताएँगे

  1. उत्तम या पूर्ण protein के श्रोत

    पूर्ण protein अर्थात ये protein उच्च जैविकीय मूल्य वाले होते है | इसमें सभी आवश्यक अम्ल पर्याप्त मात्रा और उचित अनुपात में विद्यमान होते है | उत्तम protein के स्रोत है – दूध – दही , मांस , मछली, अंडा , यकृत आदि | इनके सेवन से आपको पूर्ण और उत्तम protein की प्राप्ति हो जाती है | इसके अलावा सूखे मेवे और सोयाबीन में भी पूर्ण protein उपलब्ध होता है |

  2. माध्यम या आंशिक प्रोटीन

    इस प्रकार के protein में कुछ ही आवश्यक एमिनो अम्ल उपस्थित होते है | अर्थात इसमें 1 या 2 आवश्यक एमिनो अम्ल की कमी रहती है | ये शरीर की जीवनी शक्ति को तो बनाये रखते है लेकिन शरीर की वर्द्धि और विकास में अधिक उपयोगी नहीं होते | इस प्रकार का protein शरीर में उत्तको और कोशिकाओं की टूट फुट को एक सिमित हद तक मरम्मत कर सकते है | मध्यम प्रकार के protein है – चने की दाल , उड़द की दाल , सोयाबीन एवं सभी प्रकार की दाले आंशिक पूर्ण protein में आती है |

  3. अपूर्ण प्रोटीन

    इस प्रकार के protein में आवश्यक एमिनो एसिड का पूर्ण रूप से आभाव होता है | अत: इनके सेवन और न सेवन से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता | अपूर्ण protein शरीर की वर्द्धि और विकास में बिलकुल भी सहायक नहीं होते | ये protein शरीर के उत्तको और कोशिकाओं की क्षति को भी ठीक नहीं कर सकते | इस प्रकार का protein – गेंहू , चावल , मक्का , मूंगफली , भात , दलिया और खीर आदि में होता है | protein की प्राप्ति करने के रूप में इनका सेवन व्यर्थ है |

 

अगर आपको यह पोस्ट लाभदायक लगे तो इसे शेयर जरुर करे एवं स्वास्थ्य से संबधित प्रमाणिक जानकारियों के लिए हमारा Facebook पेज Like करले ताकि आप तक हर नयी पोस्ट की अपडेट पहुँचती रहे |

धन्यवाद | cr- vrinda singh 

Related Post

आंवला – एक अमृतफल , आयुर्वेद का रसायन |... आंवला - एक अमृत फल आंवला को धात्री फल भी कहते है | यह बहुत ही पोष्टिक और गुणकारी है आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसे ज्यादातर रोगों में काम में लिया जाता ...
नारायण चूर्ण बनाने की विधि... नारायण चूर्ण नारायण चूर्ण बनाने की विधि - नारायण चूर्ण बनाने के लिए सबसे पहले छोटी पीपल - 10 ग्राम , निशोथ - 50 ग्राम और देशी कच्ची खांड - 100 ग्रा...
अमलतास – अमलतास के गुण एवं फायदे और औषध प्रय... अमलतास (आरग्वध) - Cassia fistula Linn परिचय - पीले व्रण के फूलो से अच्छादित रहने वाला | सड़क किनारे या बाग़ बगीचों में अपनी पीत वृणी छटा फैलता यह प...
नागकेशर के स्वास्थ्य लाभ... नागकेशर एक सदाबहार वृक्ष है जो अधिकतर भारत में असम और बर्मा , बांग्लादेश ,श्रीलंका आदि देशो में बहुतायत से पाया जाता है | नागकेशर की पतिया पतली और घ...
Content Protection by DMCA.com

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.