अनानास की तासीर, विटामिन, खाने का समय और फायदे व नुकसान जानें

अनानास तो हम सभी ने खाया होगा या इसका जूस पिया होगा परन्तु हम यह नहीं जानते की यह फल जितना प्राक्रतिक मिटास लिए हुए है उतना ही यह ओषधियों गुणों को भी अपने अंदर समाये हुए है जिस प्रकार अनेक फलों के बीच में अनानास अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है अर्थात् फलों की टोकरी की सजावट में अनेक अलग प्रकार के रंग बिरंगे फल होते है परन्तु अनानास के बिना फलों की टोकरी की सजावट अधूरी होती है |

उसी प्रकार यह हमारे शरीर की सजावट अर्थात् सुंदरता में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है अन्नास अनेक प्रकार के त्वचा रोगों, कर्मी रोगों, श्वास रोगों, उदर रोगों, प्रजजनसंस्थान के रोग, अजीर्ण, प्लीहा रोग, मधुमेह, कुष्ठ रोग, सर्वशरीर रोगों में एक उतम ओषधि के रूप में कार्य करता है

अनानास की तासीर क्या है ?

इस फल की तासीर शीत या ठंड प्रक्रति की होती है इस कारण गर्मी के मोसम में इस फल को खाने या जूस पीने से शरीर को अंदर से ठंडक मिलती है

अन्नानास के फायदे

अनानास खाने का समय क्या है ?

हर फ़ूड या फल को खाने का सही समय होता है जिससे हमे उसे खाने से ज्यादा से ज्यादा लाभ हो पर अनानास ऐसा फल है जिसे एक बार में एक साथ पूरा कोई भी नहीं खा सकता है क्योकि इसे एक साथ खाने से मुह और गले में एक अजीब सी खराश होने लगती है इसी कारण इसे दिन में थोड़ा – थोड़ा करके कई बार खाया जा सकता है परन्तु अनानास को खाने का भी सही समय सुबह अर्थात् ब्रेकफास्ट का होता है जिससे हमे उसे खाने से बहुत फायदा होता है

अनानास में विटामिन हैं भरपूर

अनानास में विटामिन A और C भरपूर मात्रा में होते है इसके आलावा इसमे फायबर, पोटेशियम, फास्फोरस और केल्सियम भी भरपूर मात्रा में होते है |

अन्नानास रासायनिक संघटन

इसके फल में थायमिन, राइबोफ्लेबिन, सुक्रोस, निआसिन, ग्लूकोस, कैफिक अम्ल, साइट्रिक अम्ल, फेरुलिक अम्ल, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है इसके काण्ड ब्रोमेलेन नामक प्रोटीन विलायक Enzyme तथा स्टार्च पाया जाता है

अनानास का औषधीय प्रयोग, मात्रा व विधि

त्वचा रोग में अनानास का उपयोग –

अनानास में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है जो हमारी त्वचा को चमकदार बनाने में सहायता करता है इस कारण अनानास का जूस पीने या इसके फल के गुदे का चेहरे पर लेप करने से चेहरे के दाग – धब्बे दूर होते है और चेहरा चमकदार बनता है |

शरीर के किसी बाहरी हिस्से पर चोट लगने के कारण होने वाली सुजन पर अन्नास का रस का लेप करने पर बहुत फायदा होता है

कुष्ठ रोग में त्वचा पर होने वाले दाग – धब्बो पर भी अन्नास के ताजे फल के रस का लेप करने पर बहुत आराम मिलता है क्योकि यह कुष्ठ रोग में जलन को शातं करके ठंडक पहुचता है

पेट के रोगों के लिए रामबाण अनानास –

अजीर्ण में अनानास के पके फल के बारीक़ टुकड़े में सेंधानमक और काली मिर्च मिलाकर खाने से बहुत लाभ होता है

भोजन के बाद  यदि पेट फूल जाए, बैचेनी हो तो अनानास के 50-100 मिली रस के सेवन से तुरंत लाभ होता है

100 मिली पक्व अन्नास के रस में 1 -2 नग दाख और सेंधानमक मिलाकर पीने से अजीर्ण में लाभ होता है

100 मिली अनानास के पक्व रस में 65 मिग्रा यवक्षार ,250 -250 मिग्रा पीपल और हल्दी का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से प्लीहा, उदर रोग और गुल्म 7 दिन में नष्ट हो जाता है

अन्नास के पत्तो के रस में थोड़ा शहद मिलाकर रोज 2 मिली से 10 मिली तक सेवन करने से पेट के कीड़ो में बहुत आराम मिलता है

मासिक विकारो में अन्नास का चमत्कार –

40 – 60 मिली अन्नास के पत्तों के क्वाथ को पीने से मासिक धर्म की रुकावट दूर होती है    

अन्नास के कच्चे फलों के 10 -50 मिली रस में,पीपल की छाल का चूर्ण और गुड़ 1 -1ग्राम मिलाकर सेवन करने से  मासिक धर्म की रुकावट दूर हो जाती है

अन्नास के अपक्व फल को उबालकर पीने से सभी प्रकार के मासिक धर्म के विकारो में फायदा होता है

वक्ष या छाती के रोगों में अन्नास से उपचार –

श्वास और कास रोगों में अन्नास फल के 50 -100 मिली रस में 1 ग्राम छोटी कटेरी मूल चूर्ण,2 ग्राम आंवला चूर्ण और 500 मिग्रा जीरा चूर्ण तथा मधु मिलाकर सेवन करे

अन्नास के पके फल के 50 -100 मिली रस में पिपली मूल,सोंठ और बहेड़े का चूर्ण 2 -2 ग्राम   तथा भुना हुआ सुहागा व् मधु मिलाकर सेवन करने से श्वास और कास रोगों में फायदा होता है

अन्नास के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से श्वास रोगों में लाभ होता है

 यकृत एवं प्लीहा रोगों में अन्नास का उपयोग –

कमला रोग में अन्नास के पके फलों के 10 -15 मिली रस में 2 ग्राम हल्दी चूर्ण और 3 ग्राम मिश्री मिलाकर सेवन करने लाभ होता है

वृक्क संस्थान के रोगों में अन्नास के यूज से होने वाले फायदे –

अन्नास मधुमेह में बहुत लाभकारी फल है अन्नास के 100 मिली रस में तिल,आंवला ,बहेड़ा,हरध,गोखरू और जामुन के बीज 10 -10 ग्राम ले ,सूखने पर चूर्ण बनाकर रख ले,इस चूर्ण को सुबह –शाम 3 ग्राम सेवन करने से बहुमूत्र रोग और मधुमेह में गुणकारी लाभ होता है

सर्वशरीर रोगों में अन्नास का सेवन

सुजन – यदि सब अंगो में सुजन हो,मूत्र कम मात्रा में आता हो,मूत्र में एल्ब्यूमिन आता हो,य्क्र्त व्रधि हो,अग्निमाधं तथा नेत्रों के नीचे सुजन हो तो इच्छाअनुसार 7 -8 दिन अन्नास के रस का सेवन करने से लाभ होता है,15 -20 दिन तक सेवन करने से सम्पूर्ण लाभ होता है पथ्य में केवल दूध का सेवन करे

एकाग शोथ में अन्नास के पतों पर एरड तेल लगाकर कुछ गर्म करे और सुजन वाले स्थान पर बांध दे , पेरो की सुजन पर तुरंत आराम मिलता है

ज्वर –अन्नास के रस में 20 मिली शहद मिलाकर लेने से पसीना आता है और मूत्र खुलकर आता है जिससे ज्वर का वेग कम हो जाता है                                    

 मात्रा –25 -50 मिली रस या चिकित्सक के परामर्श अनुसार

अनानास के उपयोग से होने वाले नुकसान

अनानास फल का अत्यधिक मात्रा में सेवन कंठ के लिए हानिकारक है

अन्नास मासिक धर्म की रुकावट को दूर करता है परन्तु  अन्नास के कच्चे फल का रस आर्तवजन्न अर्थात्  आर्तव की मात्रा बढ़ाने वाला होता है जिससे गर्भपात का खतरा रहता है

यदि अन्नास से किसी प्रकार की  नुकसान होने की स्थिति उत्पन हो तो निम्बू का रस,चीनी और अदरक का रस लेना चाहिये |

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