करीर (Caparis Decidua Edgew) आयुर्वेदिक परिचय

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Caparidaceae फॅमिली की यह वनस्पति पौधा झाड़ीनुमा होता है | यह कांटेदार, घना, बारीक़ शाखायुक्त 6 से 7 फीट ऊँची वनस्पति है | इसकी शाखा नाजुक काँटों से युक्त होती है | कांटे सीधे एवं युग्म में लगे रहते है |

करीर के पत्र केवल नयी शाखाओं पर ही आते है | ये आधा इंच लम्बे, रेखाकार एवं आगे से नुकीले होते है | इसके फुल गुलाबी रंग के गुच्छों में लगते है |

इसके फल गोलाकार आधा इंच व्यास के लाल या गुलाबी एवं छोटे वृंत पर आते है | इसका उत्पति स्थान राजस्थान, पंजाब, उत्तरप्रदेश और दक्षिणी भारत के शुष्क इलाकों में होते है |

करीर
LRBurdak [CC BY-SA 3.0 (https://creativecommons.org/licenses/by-sa/3.0)]

करीर के पर्याय

संस्कृत – क्रकरी पत्र, ग्रंथिल, मरूभूरूह |

हिंदी – करीर, करील, करेल |

राजस्थानी – कैर

मराठी – नेपती, किरल |

लैटिन – Capparis Decidua Edgew .

Family – Capparidaceae .

करीर के आयुर्वेदिक गुण धर्म

करीर: कटुकस्तिक्त: स्वेध्युष्ण भेदन: स्मृत: |

दुर्नामकफवातामगरशोथव्रणप्राणुत ||

भाव प्रकाश वटादीवर्ग

रस – कटु, तिक्त

गुण – लघु, रुक्ष

विपाक – कटु

वीर्य – उष्ण

दोषकर्म – कफ एवं वातहर

अन्यकर्म – विषघ्न, आमपाचन, स्वेद्जनन, भेदन,

त्वक के कर्म – स्वेदजनन, अर्शहर, शोथहर (सुजन दूर करने वाली)

कोमलपत्र – स्फोटजनन

फल – संग्राहक |

करीर के रोगोपयोग

  • अर्श में फायदेमंद है |
  • वातव्याधियों अर्थात अतिरिक्त वायु के कारण होने वाले दर्द एवं अन्य पीडाओं में आराम देती है |
  • विष में उपयोगी |
  • सुजन को दूर करती है |
  • करीर छाल से घाव को धोने से जल्द ही भरने लगता है |
  • कृमिरोग अर्थात पेट के कीड़ों में फायदेमंद औषधि है |
  • अतिसार (दस्त) में प्रयोग करवाई जाती है |
  • दांतों में दर्द हो तो करीर के ताजा पतों को चबाने से एवं शाखाओं को चबाने से आराम मिलता है |
  • फलों का आचार अर्श एवं अतिसार में दिया जाता है |

रासायनिक संगठन

Caparine, capparilline, capparidisine (alkaloids) एवं Glucoside आदि मिलते है |

प्रयोज्य अंग – जड़ की छाल , इसके फुल एवं फल |

सेवन की मात्रा – छाल का चूर्ण 1 से 2 ग्राम एवं क्वाथ को 40 मिली तक की मात्रा में सेवन किया जा सकता है |

विशिष्ट आयुर्वेदिक योग – करीर चूर्ण

Mr. Yogendra Lochib

Mr Yogendra Lochib is a experienced and qualified Ayurveda Nurse & Pharmacist. He was Graduated (2009-2013) from Dr Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University, Jodhpur.He has Good Knowledge about Ayurvedic Herbs, Medicine, Panchkarma Procedure & Naturopathy. The Author believes in sharing the knowledge of Ayurveda (As it was shared 5000 years ago orally) using online platforms, and he is doing well.

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