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ईसबगोल – परिचय, गुण धर्म, फायदे एवं स्वास्थ्य उपयोग

ईसबगोल

ईसबगोल – परिचय, गुण धर्म, फायदे एवं स्वास्थ्य उपयोग

परिचय – पाचन विकार एवं कब्ज जैसी समस्याओं के लिए प्रत्येक भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध होने वाली एक आयुर्वेदिक औषधि है | वैसे यह भारत की मूल औषधि नहीं है इसका मूल स्थान मिश्र, ईरान एवं अफगानिस्तान आदि माना जाता है | हमारे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथो में भी इसका वर्णन नहीं मिलने का यह एक कारण है | यूनानी चिकित्सा पद्धति में ईसबगोल की भरपूर प्रसंसा की गई है | इसे कब्ज को दूर करने वाली, बवासीर में उपयोगी, पाचन को सुधारने वाली बेहतरीन औषधि माना है |

यूनानी ग्रंथो से ही बाद में इसका विस्तार भारत में हुआ | अब हमारे देश में भी पंजाब, हिमाचल एवं अन्य राज्यों में इसकी व्यवसायिक खेती की जाने लगी है | इसकी भूसी सफ़ेद रंग की नारियल के बुरादे जैसी होती है | यह स्वादहीन एवं गंदहीन होती है | इसमें पानी को सोखने की अद्भुद शक्ति होती है तभी जब इसे मुंह में रखा जाता है तो कुछ ही देर में मुंह में लुआब जैसा बनना शुरू हो जाता है |

ईसबगोल

हमारे यहाँ इसे अलग – अलग नामों से जाना जाता है, जैसे संस्कृत में स्निग्ध बीजम, मराठी में इसबगोल, गुजराती में उथमुंदिक आदि |

ईसबगोल के गुणधर्म 

स्वाद में यह स्वादहिन् या कषैला होती है | गुणों में यह लघु एवं स्निग्ध होती है | आयुर्वेद में इसे पुष्टिकारक, चिकनी, कसैली, वातकारक एवं कफ और पित का शमन करने वाली माना जाता है | ईसबगोल की तासीर ठंडी अर्थात शीतल होती है | पाचन के पश्चात इसका विपाक मधुर माना जाता है |

यह रक्तपित्त, रक्तातिसार, मलावरोध दूर करने वाली, अतिसार, पेचिश में गुणकारी, शुक्रमेह नाशक, मूत्राशय की पीड़ा एवं दमा रोग में फायदेमंद औषधि है |

जिन्हें कब्ज की शिकायत बनी रहती है वे इसे नियमित रूप से ले सकते है | यह पूर्णत: दुष्प्रभाव रहित है | औषध उपयोग में सामान्यत: इसकी 3 से 6 ग्राम की मात्रा एक समय में ली जाती है | अधिक कब्ज की स्थिति में गर्म जल के साथ इस मात्रा को बढाया भी जा सकता है | अनुपान के रूप में जल, दूध, दही आदि का प्रयोग किया जा सकता है |

ईसबगोल के विभिन्न रोगों में फायदे या स्वास्थ्य उपयोग 

1. आंवयुक्त पेचिश 

अगर पेचिश की समस्या में आंव बनती हो तो इसका सेवन करने से लाभ मिलता है | यह आंव का बनना बंद कर देती है | पेचिस में आधा भाग इसबगोल, एक चौथाई भुनी हुई सोंफ एवं एक चौथाई कच्ची सौंफ – इन तीनो को पीसकर दोनों समय भोजन के बाद सेवन करवाने से आशातीत लाभ मिलता है |

2. आंव 

एक कप गरम दूध में एक चम्मच ईसबगोल डालें, फूलने पर रात्रि में सेवन करें | सुबह एक कप दही में एक चम्मच इसबगोल डालकर अच्छी तरह फुल जाने दें | अब इसमें इच्छानुसार थोड़ा जीरा , नमक और सौंठ मिलाकर लगातार तीन दिन तक सेवन करने से आंव आने की समस्या खत्म हो जाती है |

3. संग्रहणी रोग में फायदे 

हरा बेलपत्र और ईसबगोल दोनों को सामान मात्रा में मिलाकर पिसलें | दो चम्मच की मात्रा गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने करें | यह प्रयोग कम से कम एक सप्ताह तक करें | काफी आराम मिलता है |

4. पेशाब में जलन – एक गिलास पानी में 2 चम्मच इसबगोल मिलाकर और साथ में स्वाद के अनुसार चीनी मिलाकर पिने से पेशाब में जलन की समस्या खत्म हो जाती है |

5. मुंह के छालों में फायदे 

एक गिलास पानी में एक चम्मच इसबगोल भिगोकर दो घंटे बाद कुल्ला करने से आराम महसूस होता है | इसका चिकना गुण मुंह के छालों में आराम पहुंचता है |

6. बवासीर 

बवासीर जैसे रोग में कब्ज आदि के कारण अधिक पीड़ा उठानी पड़ती है | अत: इसका सेवन करने से कब्ज की शिकायत में आराम मिलता है | जिससे बवासीर में कठोर मल के कारण होने वाली पीड़ा से मुक्ति मिलती है | साथ ही इसके बीजों को ठन्डे पानी में भिगोकर कुछ समय पश्चात् बने लुआब को पीने से खुनी बवासीर में लाभ मिलता है |

7. नकसीर – नाक से खून गिरने की समस्या में इसके बीजों को सिरके में मिलकर पिसलें | अच्छी तरह पीसने के बाद इसका लेप माथे एवं कनपटियों करने से नाक से खून आने की समस्या खत्म हो जाती है |

8. पेट में मरोड़ या एंठन – ताजा दही या छाछ में एक चम्मच ईसबगोल की भूसी मिलाकर सेवन करने से पेट में उठने वाली मरोड़ एवं एंठन से आराम मिलता है | यह प्रयोग दिन में तीन या चार बार तक किया जा सकता है |

धन्यवाद | 

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