पत्रांगासव: स्त्रियों का पावरफुल आयुर्वेदिक टोनिक | Patrangasava for gynecological conditions

पत्रांगासव (Patrangasava): आज हम यहां आपको आयुर्वेद के एक ऐसी दवा या आसव (पत्रांगासव) के बारे में बताएंगे जो वास्तव में स्त्रियों के लिए पावरफुल टॉनिक है। आयुर्वेद में पत्रांगासव के बारे में कहा भी गया है कि हर स्त्री को साल में दो या तीन बोतल पत्रांगासव की अवश्य ही पीनी चाहिए। पत्रांगासव के बारे में जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि वास्तव में आसव होता क्या है। तो चलिए सबसे पहले हम आपको यह बताते हैं कि आयुर्वेद में आसव किसे कहते हैं ।

आसव किसे कहते हैं | What is Asava in Ayurveda

साफ-सुथरी जड़ी बूटियां इकट्ठे करके बिना क्वाथ बनाएं अर्थात बिना उबाले कच्चे जल में औषधियों और गुड़, चीनी या मधु आदि मीठे पदार्थ सागवान की लकड़ी से बने पात्र में डालकर जो संधान किया जाता है उसे आसव कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार सागवान की लकड़ी के बने पात्र ही आसव बनाने के लिए उपयुक्त होते हैं क्योंकि इनमें लंबे समय तक आसव पड़े रहने से खराब नहीं होता और इन पात्रों पर गर्मी – सर्दी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता इसलिए काठ अर्थात लकड़ी के ही पात्र (बर्तन) ही आसव के लिए उपयोगी होते हैं।

आसव किसे कहते हैं यह तो हमने जान लिया है अब हम यहां आपको स्त्रियों के लिए पावरफुल टॉनिक पत्रांगासव के बारे में विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं क्या है पत्रांगासव

क्या है पत्रांगासव? | What is Patrangasava in Hindi

पत्रांगासव

पत्रांगासव कच्ची जड़ी बूटियों का रस निकालकर और उनमें गुड, मधु आदि मीठे पदार्थ डालकर तैयार किया गया द्रव या आसव है जो विशेष तौर से स्त्रियों के कटि अर्थात कमर के लिए एक पावर बूस्टर है।

क्योंकि स्त्रियों की तंदुरुस्ती या सुंदरता कटी प्रदेश अर्थात कमर पर ही निर्भर है। कमर जितनी निरोगी और स्वस्थ रहेगी तंदुरुस्ती भी उतनी ही अच्छी बनी रहेगी इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए। यह आसव गर्भाशय को भी बलवान बनाता है जिससे गर्भ न ठहरने या गर्भ रहकर कुछ समय बाद गर्भपात हो जाना आदि समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है।

पत्रांगासव क्या है यह जानने के बाद अब हम इसके घटक द्रव्य और इसे बनाने की विधि के बारे में जानेंगे तो चलिए जानते हैं पत्रांगासव के घटक द्रव्य और पत्रांगासव बनाने की विधि

पत्रांगासव के घटक द्रव्य और बनाने की विधि | Ingredients and Manufacturing Process

  • पतंगकाष्ठ
  • खैरसार
  • वासक मूल
  • सेमल के फूल
  • खरेंटी
  • शुद्ध भिलावा
  • सारिवा(अनन्तमूल ओर श्यामलता) दोनों
  • गुड़हल की कली
  • आम की गुठली की मींगी
  • दारुहल्दी
  • चिरायता
  • पोस्त के डोडे
  • सफेद जीरा
  • लोहचूर्ण या भस्म
  • रसोत
  • बेल गिरी
  • भांगरा
  • दालचीनी
  • केसर
  • लौंग

बनाने की विधि: प्रत्येक 4_4 तोला लेकर मोटा चूर्ण बनावे इसके पश्चात 2 सेर 8 तोला पानी में मुनक्का 1 सेर, धाय के फूल 64 तोला, खांड(चीनी) 5 सेर, शहद (अभाव में पुराना गुङ) 2सेर ओर उपरोक्त दवाओं का चूर्ण अच्छी तरह घोलकर उसे चिकने पात्र में भरकर सन्धान कर दें और एक महीने बाद छानकर रख लें ।

इस आसव को बनाने के लिए आचार्य की सहायता लेनी चाहिए और जहां तक हो इसे घर पर ना बना कर बाजार से ही खरीद लेना चाहिए क्योंकि आमतौर पर हमारे घरों में सागवान की लकड़ी के पात्र नहीं होते हैं और अन्य पात्रों में बनाने से यह खराब हो जाता है इस कारण इस आसव को आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर से खरीद लेना चाहिए यह वहां से आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

पत्रांगासव के गुण और उपयोग | Benefits and uses of Patrangasava

प्रदर रोगों में उपयोग: इसके सेवन से रक्त प्रदर, श्वेत प्रदर, दर्द के साथ रज निकलना, ज्वर, पांडुरोग, सूजन, अरुचि, मंद अग्नि, गर्भाशय के अवयवों की शिथिलता, कमजोरी और दुष्ट आर्तव आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।

कटि प्रदेश की मजबूती के लिए लाभदायक: इस आसव का प्रभाव स्त्रियों की कमर के अवयवों पर विशेष रूप से होता हैं। यह स्त्रियों के कटि (कमर) प्रदेश के अवयवों पर तो काम करता ही है साथ ही उन अवयवों में किसी तरह का विकार न हो उसे भी यह रोकता है अतः प्रत्येक स्त्री को लगातार एक _दो महीने अथवा साल भर में इसकी दो से तीन बोतल अवश्य पीनी चाहिए इससे स्त्रियों की तंदुरुस्ती तथा सुंदरता ठीक बनी रहती है क्योंकि स्त्रियों की तंदुरुस्ती या सुंदरता कटि प्रदेश पर ही निर्भर करती है। कटि प्रदेश जितना निरोगी होगा वह उतनी ही स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगी ।

गर्भाशय विकारों को दूर करने के लिए पत्रांगासव का उपयोग: यह आसव गर्भाशय को भी बलवान बनाता है। गर्भ नहीं रहना अथवा गर्भ रह कर असमय में ही गर्भपात हो जाना, मरा हुआ बच्चा पैदा होना, संतान होते ही मर जाना अथवा रोगी संतान होना आदि उपद्रव में भी इसका लगातार कुछ रोज तक बराबर सेवन करते रहने से अच्छा फायदा होता है इसके साथ चंद्रप्रभा वटी का भी उपयोग करने से विशेष लाभ होता है।

सम्पूर्ण स्त्री रोगों में लाभकारी पत्रांगासव: यह सभी स्त्री रोगों को दूर करता है इस कारण स्त्रियों के लिए एक पावरफुल टॉनिक है अतः सभी स्त्रियों को साल में कुछ समय के लिए पत्रांगासव का उपयोग करना चाहिए।

सवाल – जवाब | FAQ

Q: महिलाओं के लिए पत्रंगासव कितना लाभदायक है ?

Ans: महिला स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत लाभदायक है | महिलाओं के प्रदर रोग, कमर दर्द, गर्भाशय के विकार एवं प्रसूति विकारों में लाभदायक है |

Q: क्या पत्रांगासव माहवारी में फायदा करती है?

Ans: निश्चित रूप से पत्रांगासव महिला स्वास्थ्य के लिए एक उत्तम दवा है | यह महिलाओं में होने वाली पीरियड्स की प्रोब्लेम्स में अच्छा कार्य करती है | रुक – रुक कर माहवारी का आना, अधिक रक्त स्राव एवं माहवारी के समय पेडू दर्द में फायदेमंद है |

Q: पत्रांगासव की सेवन की मात्रा कितनी है?

Ans: इसका उपयोग वैद्य सलाह अनुसार 10 से 15 मिली की मात्रा में सुबह – शाम किया जा सकता है |

Q: सेवन की सावधानियां क्या है?

Ans: पत्रांगासव के कोई ज्ञात साइड इफेक्ट्स नहीं है | लेकिन फिर भी इसकी निर्धारित मात्रा ही सेवन करनी चाहिए | अधिकतम 30 मिली से ज्यादा खुराक नहीं लेनी चाहिए |

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