गैस और कब्ज की 9 आयुर्वेदिक दवा | Top 9 Ayurvedic medicine for gas and constipation

गैस और कब्ज की आयुर्वेदिक दवा: आयुर्वेद में कहा जाता है कि मनुष्य के हर रोग का संबंध उसके पेट से होता है अर्थात पेट साफ हो तो हर रोग दफा हो जाता है।

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और गलत आहार-विहार के कारण मनुष्य में गैस और कब्ज की समस्या होना आम बात हो गई है। आजकल हर कोई गैस और कब्ज की समस्या से परेशान है।

आज हम यहां इस लेख में आपको गैस और कब्ज की 9 आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में विस्तार से बताएंगे। जिनके प्रयोग से आपको गैस और कब्ज से तो राहत मिलेगी ही साथ ही में इन दवाओं का आपके शरीर पर कोई भी साइड इफेक्ट नहीं होगा। तो चलिए जानते हैं आयुर्वेद की गैस और कब्ज की 9 आयुर्वेदिक दवा के बारे मे

गैस और कब्ज की आयुर्वेदिक दवा

गैस और कब्ज की 9 आयुर्वेदिक दवा की सूचि

  1. त्रिफला चूर्ण
  2. हरीतकी चूर्ण
  3. ईसबगोल चूर्ण
  4. पंचसकार चूर्ण
  5. चित्रकादि वटी
  6. अभयारिष्ट
  7. कुमार्यासव
  8. तरुणी कुसुमाकर चूर्ण
  9. एरंड भ्रष्ट हरीतकी चूर्ण

त्रिफला चूर्ण कब्ज एवं गैस के लिए | Triphala Churna for Constipation and Gas

हरड़ का छिलका ,बहेड़ा का छिलका और आंवला गुठली रहित प्रत्येक को समान भाग लेकर कूटकर और पीसकर चूर्ण बना लें इसे ही त्रिफला चूर्ण कहते हैं।

यह आयुर्वेद की कब्ज नाशक उत्तम दवा है जो अपना प्रभाव अवश्य ही दिखाती है। कब्ज का नाश करने के साथ साथ यह हमारे शरीर में गैस को भी नहीं बनने देती है। यह गैस और कब्ज की आयुर्वेदिक दवा के रूप में प्रशिद्ध है |

हरीतकी चूर्ण | Haritaki Powder

आयुर्वेद में हरड़ को हरीतकी के नाम से जाना जाता है। हरीतकी के अंदर पाचक गुण विद्यमान होते हैं जो हमारे शरीर में भोजन को सही तरह से पचा देते हैं और अपने इन्हीं गुणों के कारण हरीतकी चूर्ण का उपयोग गैस और कब्ज को दूर करने के लिए किया जाता है।

यह पाचक अग्नि को बढाती है | आंतो को स्वस्थ रखती है एवं कब्ज और गैस की समस्या को दूर करने में अच्छा कार्य करती है | आयुर्वेद की कब्ज नाशक औषधियों में हरीतकी भी एक घटक के रूप में उपस्थित रहती है | यह पेट के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक चूर्ण है |

ईसबगोल चूर्ण | Isabgol Musk Powder

इसबगोल की खेती भारत में सभी जगह की जाती है। इसबगोल के अंदर मृदु विरेचक गुण होने के कारण यह कब्ज और गैस के लिए एक उत्तम औषधि है। एक या दो चम्मच की मात्रा में इसबगोल की भूसी को रात को सोते समय गर्म दूध के साथ लेने से कब्ज और गैस की समस्या दूर हो जाती है।

इसे गरम दूध या पानी के साथ लेने से कब्ज टूटती है एवं अगर दस्त लग रहें हो तो ठन्डे दही के साथ खाने से दस्त रुक जाते है | अगर आपको कब्ज अधिक है तो त्रिफला चूर्ण के साथ इसबगोल चूर्ण का सेवन करने से तुरंत राहत मिलती है |

पंचसकार चूर्ण | Panchsakar Churna

सनाय की पत्ती, सेंधा नमक, सौंफ और जो हरड़ को कूट कर और छानकर चूर्ण बनाते हैं इसे पंचसकार चूर्ण के नाम से जानते हैं। यह चूर्ण अग्नि को प्रदीप्त करने वाला और पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला है | इस चूर्ण का उपयोग विरेचन अर्थात दस्त लगाने के लिए किया जाता है। कब्ज को नष्ट करने के लिए उत्तम गुणकारी एवं सुप्रसिद्ध चूर्ण है।

चित्रकादि वटी | Chitrakadi Vati

चित्रक मूल की छाल, पीपला मूल, सजी खार, यवkshar, सेंधा नमक, sonchrनमक, काला नमक, समुंदर नमक, सांभर नमक, कालीमिर्च, छोटी पीपल, घी में सेकी हुई हींग, अल्मोdaa, चव्य आदि दलों को समान भाग लेकर कूट छानकर चूर्ण बनाकर डार्लिंग के रस में मर्दन करके गोलियां बनाने पर चित्रकादि वटी बनती है।

अमाशय के बिगड़ जाने पर भोजन का पाचन ठीक से नहीं होता है । बिना बचा हुआ भोजन हमारे शरीर में गैस को उत्पन्न करता है। इस वटी के सेवन से अग्नि प्रदीप हो जाती है और भूख खुलकर लगने लगती है। खाया हुआ भोजन का पाचन भी ठीक प्रकार से होने लगता है और गैस व कब्ज दूर हो जाते हैं।

अभयारिष्ट | Abhayarisht Syrup

इसका उपयोग विशेषकर बवासीर के रोग में किया जाता है। बवासीर बहुत ही परेशान करने वाली बीमारी है। बवासीर में दस्त और कब्ज हो जाना प्रधान लक्षण है। अभयारिष्ट बवासीर में होने वाली कब्ज को शीघ्र ही दूर कर देता है यह गुदा प्रदेश की सूजन को भी कम कर देता है। बवासीर का संदेह होते ही अथवा प्रारंभिक अवस्था में ही अभयारिष्ट का सेवन करा दिया जाए तो यह रोग आगे ना बढ़ कर वहीं रुक जाता है।

कुमार्यासव | Kumaryasav for Constipation and Gas

इसका उपयोग विशेषकर पेट के विकारों में बच्चों से लेकर बूढ़े तक सब के लिए किया जाता है। शुरुआत में इसकी मात्रा थोड़ी ही देनी चाहिए जैसे जैसे बर्दाश्त होती जाए वैसे वैसे मात्रा बढ़ाते जाने से अच्छा फायदा मिलता है। इसमें विशेषकर ग्वारपाठे के रस का उपयोग किया जाता है ग्वारपाठे के अंदर विशेषकर पाचन गुण होता है जो भोजन को पचा देता है और शरीर में वायु नहीं बनने देता।

तरुणी कुसुमाकर चूर्ण | Taruni Kusumakar Churna

गुलाब पत्ती, सेंधा नमक, काला नमक, सफेद जीरा, काला जीरा, यवksar, हरड़, बहेड़ा, आमला, snth, काली मिर्च, पीपल, सुहागा, छोटी इलायची और सनाय आदि औषधियों को मिलाकर तरुणी कुसुमाकर चूर्ण तैयार किया जाता है।

यह चूर्ण आयुर्वेद की उत्तम गुणकारी मृदु विरेचक औषधि है। जिसका पूर्णता असर कब्ज व गैस की समस्या पर पड़ता है। गैस और कब्ज को दूर करने के साथ-साथ यह पेट मे आफरा की भी औषधि है।

एरंड भ्रष्ट हरीतकी चूर्ण | Erand Bhrisht Haritaki Churna

यह एरंड तेल में हरीतकी को भुनकर तैयार की जाने वाली आयुर्वेदिक दवा है | हरीतकी एवं एरंड दोनों ही कोष्ठबद्धता को खत्म करने वाले घटक है | अत: उत्तम कब्ज नाशक औषधि में एरंड भृष्ट हरीतकी को गिना जाता है | यह मध्यम प्रकार की विरेचक औषधि है | अत: कुछ समय के लिए एवं अधिक कब्ज की समस्या में इसका सेवन किया जाता है | लम्बे समय तक एरंड भृष्ट हरीतकी का प्रयोग वैद्यों द्वारा नहीं करवाया जाता |

महत्वपूर्ण कब्ज नाशक टिप्स

कब्ज की समस्या में उपरोक्त वर्णित सभी औषधियाँ प्रभावी एवं फायदेमंद है | इस समस्या में सबसे पहले मृदु विरेचक दवाओं का ही प्रयोग करना चाहिए | सर्वप्रथम पाचन को सुधारने का कार्य किया जाना चाहिए | अगर आपका पाचन दुरस्त रहेगा तो कब्ज एवं गैस जैसी समस्याएँ कम होंगी |

कहा जाता है कि कब्ज अपने साथ अनगिनत अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी साथ लेकर आती है | अत: कब्ज बनने ही ना दें | सुबह जल्दी उठकर गुनगुना पानी पियें और थोड़ी सैर करें | रात्रि में गुनगुने जल के साथ त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी कर सकते है | यह आपके कब्ज और गैस को खत्म करने के साथ – साथ अन्य स्वास्थ्य लाभ भी देता है |

अगर आपको कब्ज की समस्या अधिक है तो आप अपने स्तर पर एरंड भृष्ट हरीतकी तक जा सकते है | इससे तीव्र विरेचक औषधी जैसे इच्छाभेदी रस आदि दवाओं का प्रयोग बिना वैद्य सलाह न करें | हमें काफी बार हमारे हेल्पलाइन पर मेसेज प्राप्त होते है कि “इच्छाभेदी रस का सेवन करने से दस्त नहीं रुक रहे एवं तीव्र अतिसार जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है” | तो उन सभी रोगियों के लिए हमारी सलाह है कि अगर आपको क्रोनिक कोंस्तिपेसन है तो कृपया नजदीकी वैद्य से उपचार लें | स्वयं द्वारा तीव्र विरेचक औषधियों का प्रयोग न करें |

धन्यवाद |

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