स्वदेशी उपचार परिचय

फ़रवरी 2017 में इस आयुर्वेदिक वेबब्लॉग की शुरुआत की गई . हमारा मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी पैतृक चिकित्सा पद्धति के फायदों एवं इसके सिद्धांतो से परिचित करवाना है |

By SWADESHI UPCHAR

भारत सदा से ही ज्ञान का खजाना रहा है | सैंकड़ो ऋषि – मुनियों ने तप एवं अपने ज्ञान से जनमानस का भला करने वाले आयुर्वेद के ग्रंथों का निर्माण किया एवं लोगों को निरोगी रहने का वरदान दिया |
आयुर्वेद के प्रशिद्ध ग्रन्थ जैसे चरक संहिता, शुश्रुत संहिता, भाव प्रकाश, माधव निदान एवं भैषज्य रत्नावली आदि दिव्य ग्रंथो का निर्माण इस धरा पर ही हुआ | लेकिन वर्तमान में लोगों ने पश्चिमी संस्कृति का अनुसरण करके इस दिव्य चिकित्सा एवं इसके सिद्धांतो को भुला दिया है | भले ही सरकार इसे बढ़ावा देने का ढोंग कर रही हो , लेकिन जब तक इस धरा के लोग अपनी पैतृक चिकित्सा के विश्वनीय फायदों के बारे में नहीं जानेंगे तब तक लोगों का भला नहीं हो सकता

“आयुर्वेद एक जीवन शास्त्र है – स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना एवं रोगी के रोग का शमन करना ही इस चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य है “

“स्वदेशी उपचार” को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य लोगों तक आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य की प्रमाणिक जानकारी पहुँचाना है |


आज अंग्रेजी चिकित्सा की दवाइयों के सेवन से होने वाले साइड इफेक्ट्स से सभी भली भांति परिचित है | इन चिकित्सा पद्धतियों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए आज या कल हमें अपनी पैतृक चिकित्सा पद्धति को और लौटना ही होगा |


परन्तु अगर वर्तमान में ही हम धीरे – धीरे आयुर्वेद को अपनाने लगे तो निश्चीत ही भविष्य के भयंकर शारीरिक दोषों से बच सकते है |

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अत: आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए यह हमारा छोटा सा प्रयास है | आप भी “स्वदेशी उपचार” से जुड़कर आयुर्वेद एवं परम्परागत भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने में सहयोगी बन सकते है |

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