योगेंद्र रस क्या है – गुण, फायदे, घटक द्रव्य एवं निर्माण विधि (भैषज्य रत्नावली – वातरोगाधिकार)

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योगेंद्र रस जैसा नाम से ही पता चलता है कि यह भगवान् इंद्र के नाम पर इसका नाम रखा गया है | जिस प्रकार इंद्र देव अपने शत्रुओं पर विजय हासिल करते है | उसी प्रकार योगेंद्र रस भी वात व्याधियों पर पूर्ण विजय हासिल करने वाली आयुर्वेदिक दवा है |

सामान्यरूप से समझें कि यह एक प्रशिद्ध आयुर्वेदिक दवा है | इसका निर्माण जड़ी – बूटियों एवं विभिन्न खनिज द्रव्यों के योग द्वारा किया जाता है |

आज इस आर्टिकल में हम आपको योगेंद्र रस से सम्बंधित सभी जानकारियां उपलब्ध करवाएंगे | अगर आप योगेंद्र रस के गुण, फायदे , इंग्रिडेंट्स एवं कैसे बनती है की जानकारी चाहते है तो आर्टिकल को पूरा पढ़ें |

योगेंद्र रस क्या है

योगेंद्र रस

यह आयुर्वेद की शास्त्रोक्त दवा है जो वातव्याधियों, मधुमेह, सभी प्रकार के प्रमेह आदि में प्रयोग की जाती है | इसका निर्माण स्वर्ण भस्म, कान्त लौह भस्म, मोती आदि आयुर्वेदिक द्रव्यों के समायोजन से किया जाता है |

वात एवं पित्त विकारों को साम्यावस्था में लाने के लिए भी इसका प्रयोग प्रमुखता से किया जाता है | उत्तम वीर्यवान औषधि होने के कारण मधुमेह, स्वप्न प्रमेह, इन्द्रिय कमजोरी, वातशूल (दर्द), अर्श, भगन्दर, जोड़ो के दर्द आदि में प्रयोग की जाती है |

चलिए अब जानते है कि योगेंद्र रस का निर्माण किन – किन द्रव्यों से मिलकर होता है |

योगेंद्र रस के घटक द्रव्य / Ingredients

  • शुद्ध पारद – 10 ग्राम
  • शुद्ध गंधक – 10 ग्राम
  • स्वर्ण भस्म – 05 ग्राम
  • लौह भस्म – 05 ग्राम
  • अभ्रक भस्म – 05 ग्राम
  • शुद्ध मुक्त – 05 ग्राम
  • वंग भस्म – 05 ग्राम
  • भावनार्थ द्रव्य – कुमारी स्वरस (ग्वारपाठा रस)

निर्माण विधि / Method of Manufacture

उपयुक्त सभी घटक द्रव्यों को निर्देशित मात्रा में लिया जाता है | इस दवा में खनिज द्रव्य काम में आते है | अत: सभी खनिज द्रव्यों का प्रयोग करने से पहले उन्हें आयुर्वेद शास्त्रों में वर्णित तरीकों के माध्यम से शुद्ध किया जाता है ताकि शरीर पर इनका दुष्प्रभाव न पड़े | दरशल पारद एवं गंधक जैसे द्रव्य अशुद्ध ले लिया जाये तो जान भी जा सकती है |

अत: इनका प्रयोग दवा निर्माण में करने से पहले शुद्ध किया जाता है ताकि ग्रहण की जा सके |

निर्माण करने के लिए उपयुक्त सभी द्रव्यों को निर्देशित मात्रा में लेकर घृतकुमारी स्वरस में भावना दी जाती है |

अच्छी तरह भावना देने के पश्चात इनकी गुटिका बनाली जाती है | इस प्रकार से योगेंद्र रस का निर्माण होता है |

योगेंद्र रस के फायदे / Yogendra Rasa Benefits in Hindi

  1. मधुमेह रोग में फायदेमंद दवा है |
  2. मूत्र विकार जैसे पेशाब कम या ज्यादा उतरना आदि में भी प्रयोग करवाई जाती है |
  3. फिस्टुला, पाइल्स में फायदेमंद है |
  4. मिर्गी, पागलपन जैसे मानसिक विकारों में फायदेमंद है |
  5. वातशूल जैसे पेट में गैस का दर्द, जोड़ो का दर्द आदि में फायदेमंद है |
  6. यौन विकारों में लाभदायक है |
  7. दाह (जलन), निद्रानाश में उपयोगी |
  8. यह नर्वस सिस्टम एवं मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है |

सेवन की विधि एवं मात्रा

योगेंद्र रस रसोंष्धियों की श्रेणी की दवा है | अत: आयुर्वेद की सभी रस औषधियों का सेवन चिकित्सक के निर्देशन में करना चाहिए | इसका सेवन 1 से 2 गोली की मात्रा में सुबह – शाम वैद्य निर्देशित अनुपान के साथ सेवन करना चाहिए |

योगेंद्र रस के नुकसान

आयुर्वेद की सभी रस औषधियों का सेवन अगर अधिक मात्रा में कर लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक सिद्ध हो सकती है | निर्देशित मात्रा से अधिक सेवन लिवर की समस्या एवं यकृत विकार उतपन्न कर सकते है |

धन्यवाद ||

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