संतुलित आहार की परिभाषा, तत्व एवं असंतुलित आहार क्या है ? जानें

संतुलित आहार की परिभाषा, तत्व एवं असंतुलित आहार

व्यक्ति एक दिन में जितना भोजन ग्रहण करता है, भोजन की वह मात्रा एक दिन का आहार कहलाती है | लेकिन इस आहार में कुच्छ पौष्टिक तत्व होने अत्यंत आवश्यक है जो शरीर का वर्द्धन करें | इसीलिए  संतुलित एवं असंतुलित जैसे विचार को बल मिला |

हमारे देश में अधिकतर गरीबी एवं अज्ञानता के कारण भोजन में पौषक तत्वों की कमी रहती है , केवल कैलोरी की अधिकता (लगभग 90%) रहती है | इन्ही के कारण बच्चों में कुपोषण एवं वयस्कों में कई विकार उत्पन्न होते है | तभी हमारी सरकार द्वारा समय – समय पर कुपोषण उन्मोलन के लिए योजनायें बनाई जाती है |

संतुलित आहार

संतुलित आहार की परिभाषा एवं अर्थ 

वह आहार जिसमें पर्याप्त मात्रा में सभी पौष्टिक तत्व जैसे कार्बोज, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण एवं विटामिन विद्यमान हो , जो व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि एवं विकास के लिए आवश्यक हो , संतुलित आहार कहलाते है | इस प्रकार के आहार में जल एवं फाइबर की भी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए साथ ही भोजन आकर्षक एवं स्वादिष्ट भी हो ताकि ग्रहण करने में रूचि बने |

संतुलित आहार का अर्थ है – सम्पूर्ण या परिपूर्ण भोजन जिसमें व्यक्ति के विकास एवं वृद्धि के सभी पौषक तत्व विद्यमान हो |

संतुलित आहार के पौषक तत्व एवं उनके कार्य 

किसी एक भोज्य पदार्थ में सभी पौषक तत्व विद्यमान नहीं रहते है | इसीलिए संतुलित आहार के लिए एक से अधिक भोज्य पदार्थो को एक साथ सम्मिलित करना पड़ता है , जिससे सभी पौषक तत्वों की प्राप्ति हो सके | विभिन्न भोज्य पदार्थो में उपस्थित पौषक तत्व एवं उनके कार्य निचे बताये गए है –

  1. कार्बोज – आहार में  कार्बोज का होना अति आवश्यक होता है | कार्बोज का मुख्य कार्य शरीर में उर्जा प्रदान करना होता है | कार्बोहाइड्रेट्स को ही कार्बोज कहा जाता है | यह भोजन का मुख्य तत्व होता है | इसमे तीन तत्व कार्बन, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन होते है |
  2. वसा – भारतीय आहार का सबसे अधिक उर्जा प्रदायी तत्व होता है | हमारे देश में वसा आधारित भोजन को प्राथमिकता दी जाती है | क्योंकि यह उर्जा देने का कार्य करता है | लगभग 1 ग्राम वसा के सेवन से शरीर को 9 ग्राम कैलोरी मिलती है | इसके अधिक सेवन से शरीर में वसा का संचय होता रहता है |
  3. प्रोटीन – संतुलित आहार में प्रोटीन का होना अति आवश्यक होता है | कोई भी आहार बिना प्रोटीन के संतुलित नहीं कहा जा सकता है | शरीर की व्रद्धी एवं विकास का कार्य प्रोटीन की उपस्थिति में ही होता है | हमारे शरीर द्वारा निरंतर कार्य करने से प्रतिदिन कोशिकाएं, उतकों, तंतुओ आदि का टूटना लगा रहता है | प्रोटीन इनकी मरम्मत एवं निर्माण का कार्य करता है |
  4. विटामिन – संतुलित आहार का एक अन्य महत्वपूर्ण तत्व है | यह शरीर की विभिन्न प्रकार की जटिल रासायनिक क्रियाओं में भाग लेता है | साथ ही शरीर की समस्त क्रिया – कलापों, भरण – पोषण एवं वृद्धि के अतिआवश्यक तत्व है |
  5. खनिज लवण – शरीर का निर्माणात्मक कार्य जैसे अस्थियों, दांतों, कोमल तंतुओं, रक्त आदि का निर्माण करने एवं विभिन्न क्रियाओं के नियंत्रण का कार्य करते है | खनिज लवणों में कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम आदि आते है , जो विभिन्न भोज्य पदार्थों से प्राप्त होते है |
  6. रेशे (Fiber) – भोजन के पाचन में सहायता करने का कार्य इन्ही के द्वारा किया जाता है | ये अमाशय के क्रमनुकुंचन गति का कार्य करते है, जिससे भोजन आंतो में नहीं चिपकता एवं सरलता से इसका पाचन हो जाता है |
  7. जल – शरीर की सभी क्रियाओं जैसे अंतग्रहण, पाचन, अवशोषण, वहन, चयापचय एवं मल पदार्थो के उत्सर्जन के लिए महत्वपूर्ण घटक होता है | शरीर को प्रयाप्त मात्रा में जल की आवश्यकता भी होती है | यह शरीर के तापक्रम को नियंत्रित रखने का कार्य भी प्रमुखता से करता है |

असंतुलित आहार / Unbalanced Diet 

जब आहार में एक या एक से अधिक पौषक तत्वों की कमी या अधिकता हो जाये तो उस भोजन को असंतुलित भोजन कहते है | जैसे हमारे देश में वसा एवं कार्बोज आधारित भोजन अधिक किया जाता है | इसमें प्रोटीन एवं विटामिन्स की उपलब्धता पर ध्यान नहीं दिया जाता एवं इसके कारण ही शरीर को इन तत्वों की प्राप्ति नहीं होती एवं व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो जाता है |

विकसित देशों में भी असंतुलित आहार के कारण कुपोषण होता है लेकिन यहाँ पर भोजन के पौषक तत्वों की अधिकता के कारण व्यक्ति कुपोषण का शिकार होता है | इसे अतिपोषण की श्रेणी में रखा जाता है | इसके कारण मोटापा सबसे अधिक पनपता है जो कई अन्य प्रकार की बीमारियों जैसे हृदय विकार, हाई ब्लड प्रेस्सर, शुगर आदि का कारण बनता है |

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