आज की  यह पोस्ट स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित जी के द्वारा बताये गए , दूध पिने के सही नियमो का संकलन है |
राजीव दीक्षित को किसी सज्जन ने एक सभा में पूछा की “आयुर्वेदाचार्य वाग्भट जी ने कहा है  की खाना खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए क्योकि इससे जठराग्नि शांत होती है और इससे कई उदर रोग पनप सकते है तो दूध , मट्ठा ( छाछ ) ,फलो का रस आदि में भी तो पानी होता है  तो क्या इन्हें भी खाने के बाद नहीं पीना चाहिए |”

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अब पढ़िए राजीव दीक्षित जी ने इसका क्या उत्तर दिया और दूध पिने के क्या नियम बताये |

राजीव जी के शब्दों में ” यह प्रश्न आपने बहुत अच्छा पूछा मैं भी सोच रहा था की कोई यह प्रश्न उठाये तो मैं इसका सही व्यख्यान दूँ | यह सही है की दूध , छाछ , दही , जूस आदि में 95% पानी होता है लेकिन वाग्भट जी ने इसका बहुर ही सुन्दर एक्स्प्लानेसन (व्याख्या ) दिया है | वो कहते है की पानी को जो गुण है वो अपना कुछ नहीं , पानी को जिस पात्र में रखा है या जिस में पानी को मिलाया है उसी का गुण वो धारण कर लेता है |
आपने एक पुराना गाना भी सुना होगा – पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिस में मिला दो उस जैसा | तो आपने पानी को मिलाया दही में तो अब वह पानी का गुण नहीं अब वह दही का गुण धारण करेगा , किसी फल के जूस में आपने पानी मिलाया तो वह जूस का गुण धारण कर लेगा अर्थात फल के गुण पानी में आ जायेंगे और पानी है दूध में तो दूध के सारे गुण वो धारण कर लेगा | इस लिए खाना खाने के साथ या बाद में मट्ठा पिने की खुली छुट है जी भर के पियो | दूध भी पेट भर कर पियो | बस पीना नहीं है तो वो है सादा पानी | क्योकि अकेला पानी अग्नि को शांत करता है |

बिच में ही किसी ने पूछा की राजीव भाई आइसक्रीम खाने के बाद हम चाय या कॉफ़ी पी सकते है ?

राजीव दीक्षित जी ने कहा की ” सवा सत्यानाश इसका उत्तर बताऊंगा परसों | कभी भी आप गरम खाना खाते है जैसे गरम दूध पिया , गरम चाय पी , गरम कॉफ़ी पिया तो पेट फिर वही काम पे लग जाता है अब वह काम क्या है ? पहले ज्यादा गरम खाने को पेट अपने तापमान पर लाता है | पेट का तापमान वही है जो आपके मुंह का तापमान है अर्थात 38 से 39 डिग्री है , अगर आपके गरम खाने या चाय का तापमान 55 या 60 के आस – पास है तो पेट पहले उसे 38 डिग्री तक लायेगा फिर अचानक आपने कोई ठंडा खाना खा लिया तो अब पेट सोचेगा की गरम को ठंडा करू या ठन्डे को गरम | अब इससे कई प्रकार की समस्याएँ हो जाएँगी और शरीर में सर्द और गर्म वाली शिकायत हो जाएगी रोगों से जकड जाओगे | इसलिये कभी भी ठंडी आइसक्रीम के बाद गरम चाय या कॉफ़ी का सेवन न करे |

अब वापिस पहले प्रश्न पर आते है – इन्होने बहुत ही अच्छा प्रशन पूछा है की वाग्भट जी ने कहा है की दूध को शाम के समय ही पीना है और दूध में या चाय में पानी होता है तो क्या ये सही है ?

देखिये वाग्भट जी के शब्द कोष में चाय या काफी का जिक्र नहीं है क्यों की वाग्भट जी 3500 साल पहले हुए और चाय या काफी तो सिर्फ 250 साल पुरानी है | लेकिन हाँ उन्होंने काढ़े का जिक्र किया है, वो ये कहते है की जो काढ़ा आपके वातको कम करे , आपके कफ को कम करे और आपके पित्त को कम करे एसा कोई भी काढ़ा दूध के साथ मिला कर सेवन कर सकते है |

अत: जब भी आप दूध पिए तो इसे गुनगुना कर के अधिक गरम दूध भी न पीवे, रात के खाने के बाद आप दूध ग्रहण कर सकते है इससे कोई समस्या नहीं होगी बल्कि रात में खाना खाने के बाद दूध पिने से नींद भी अच्छी आती है और सुबह पेट भी अच्छी तरह से साफ़ होता है – हाँ याद रखे रात के समय कभी भी छाछ या दही का इस्तेमाल न करे | दोपहर के खाने के साथ आप मट्ठा ले सकते है यह आपकी जठराग्नि को शांत नहीं करेगा , बल्कि आपकी पाचन क्रिया को सही करेगा | सुबह के नाश्ते में आप दही का प्रयोग करे जो आपको कई रोगों से बचाता है | नियमित दही सेवन से पेट का कैंसर , अल्सर , गैस  और अन्य उदर रोगों से बचाता है |



धन्यवाद |

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