बेल (बिल्व फल) – औषधीय गुणों की खान | बेल पत्र के फल से घरेलु उपचार एवं फायदे

बेल (बिल्व फल) के फायदे

बेल (बिल्व) को आयुर्वेद में बहुत ही उपयोगी माना गया है | हमारी भारतीय संस्कृति में भी बेल को पवित्र पौधा माना जाता है | इसके पतों से शिवजी का अभिषेक किया जाता है | बेल का पेड़ हिमालय की तराई वाले क्षेत्रो में , मध्य और दक्षिणी भारत के जंगलो में अधिकता में पाए जाते है | इसके अलावा बिल्व भारत में ज्यादातर प्रान्तों में उगाये जाते है |

आयुर्वेद में बेल फल को काफी लाभप्रद मन जाता है | इसका पक्का फल मधुर, पाचक, शीतल और रुचिकर होता है एवं इसका उपयोग शरबत या जूस बनाने में किया जाता है | बिल्व का कच्चा फल रुखा, पाचक , गर्म और शूल , वात-कफ नाशक होता है एवं इसका उपयोग आयुर्वेदिक चूर्ण बनाने या औषधि बनाने में लिया जाता है |

 

बेल फल के स्वास्थ्य लाभ और विभिन्न रोगों में फायदे

  • आयुर्वेद में बेल (बिल्व) को उदर विकारो में रामबाण औषधि माना जाता है | कब्ज या बदहजमी में बेल के नियमित सेवन से लाभ मिलता है | बेल के फल का जूस रोज पिने से पुराणी से पुराणी कब्जी भी टूट जाती है एवं नियमित सेवन से आंतो की सफाई भी होती है |
  • अतिसार में बिल्व चूर्ण को 5-10 ग्राम की मात्रा में ठन्डे पानी के साथ सेवन करने से जल्दी ही अतिसार रुक जाते है | बिल्व का चूर्ण बनाने की लिए इसके गुदे को धुप में सुखा दे और इसमें से बिज निकाल ले जब अच्छी तरह सुख जावे तब इस गुदे को पिस ले बस यही बिल्व चूर्ण है |
  • अगर आपके शरीर में खून की कमी है तो पक्के हुए बेल के फल के गुदे से चूर्ण बना ले और रोज रात को सोते समय गाय के दूध के साथ सेवन करे | आपके शरीर में खून का निर्माण होने लगेगा और रक्ताल्पता की समस्या जाती रहेगी |
  •  अगर आप को आंव आने की समस्या है अर्थात पाचन शक्ति की कमजोरी के कारण आंव आती है तो बेल फल की गिरी और आम की गुठली की गिरी को सामान मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना ले | इस चूर्ण का सेवन आधा ग्राम की मात्रा में चावल के मांड के साथ  दिन में तीन समय करे | जल्दी ही समस्या से छुटकारा मिलेगा |
  • दमा रोगी के शरीर से कफ निकालने के लिए बेल की पतियों का काढ़ा बना कर शहद के साथ देवे | शरीर से कफ छुटने लगेगा |
  • अगर मुंह में छाले हो गए हो तो बिल्व के हरे पतों को पानी में उबल कर , इस पानी से रोज कुल्ला करवाए |
  • बहरेपन की समस्या में 20 ग्राम बेल का गुदा , 50 ग्राम बकरी का दूध और 10 ग्राम गोमूत्र – इन तीनो को सरसों के तेल में पका कर | इसे कान में डाले बहरापन दूर हो जायेगा |
  • दिल की बढ़ी हुई धड़कन के लिए बेल की छाल को पानी में डालकर अच्छी तरह पक्काए जब पानी आधा रह जावे तो उसे छान कर पिला दे | हृदय की बढ़ी हुई धड़कन सामान्य हो जाएगी |
  • शरीर में पसीने या अन्य किसी कारण से दुर्गन्ध आती हो तो बेल के पतों के रस को तिल्ली के तेल में मिला कर मालिश करे | शरीर महकने लगेगा |
  • अगर बिल्व फल के जूस का नियमित सेवन किया जावे तो उदर के सभी रोगों में लाभ मिलता है | जैसे आंव , पेट दर्द , कब्ज , अग्निमंध्य , अजीर्ण , अपच , अतिसार या दस्त आदि |
धन्यवाद |

 

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