Mail : treatayurveda@gmail.com

दशमूल काढ़ा / Dashmool Kadha : गर्भावस्था जन्य रोगों में चमत्कारिक औषधि (Updated))

दशमूल काढ़ा / Dashmool Kwath – स्वास्थ्य संवर्धन एवं रोग निवारण के लिए आयुर्वेद में कई विधाओं का उपयोग किया जाता है | जैसे रस – भस्म , वटी , चूर्ण , आसव , अरिष्ट , अवलेह एवं क्वाथ आदि | इनमे से आसव , अरिष्ट एवं क्वाथ तुरंत प्रभावी साबित होते है और इनमे से भी क्वाथ शीघ्र परिणाम देने वाला होता है | वर्तमान समय में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के कारण आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति विलुप्त होती जा रही है जबकि अंग्रेजी दवाइयों के कैप्सूल , इंजेक्शन ,सिरप एवं टॉनिक से कंही अधिक आयुर्वेद के क्वाथ प्रभावशाली होते है जो रोग में तुरंत लाभ देते है |

दशमूल क्वाथ

स्वदेशी उपचार की आज की इस पोस्ट में आपको आयुर्वेद की क्वाथ सूचि से दशमूल क्वाथ के लाभ एवं इसे उपयोग करने के तरीके बताएगे |

दशमूल क्वाथ कैसे बनता है ?

दशमूल क्वाथ जैसा की नाम से ज्ञात होता है – 10 वनस्पतियों के ( मूल ) जड़ो का योग | दशमूल क्वाथ का निर्माण 10 औषध द्रव्यों की जड़ो से होता है इनमे से 5 लघुमूल और 5 वृहदमूल अर्थात दशमूल का निर्माण लघुपंचमूल + वृहद पंचमूल के मिलने से होता है |

घटक द्रव 

लघुपंचमूल के द्रव 

  • शालपर्णी (सरिवन)
  • पृष्नपर्णी (पिठवन)
  • लघु कंटकारी (छोटी कटेरी)
  • वृहत कंटकारी (बड़ी कटेरी)
  • गोक्षुर (गोखरू)

वृहतपंचमूल 

  • बिल्व (बेल)
  • श्रीपर्णी (गम्भारी)
  • अग्निमंथ (अरनी)
  • श्योनाक (अरलु)
  • पाटला

इन सभी औषध द्रवों को सामान मात्रा में लिया जाता है | इन्हे यवकूट करले अर्थात दरदरा कुट्लें | इन सभी यवकूट औषधियों को आपस में मिलाने से दशमूल क्वाथ का निर्माण हो जाता है | इसका काढ़ा तैयार करते समय पानी को एक चौथाई बचे तब तक उबलना चाहिए |

दशमूल क्वाथ के उपयोग एवं फायदे 

  • इस काढ़े का प्रयोग वात एवं कफज व्याधियों में विशेषत: किया जाता है | काढ़े के सेवन से वात एवं कफ का विकार दूर होता है |
  • गर्भाशय शोधन एवं प्रसूता के रोगों में भी यह उत्तम आयुर्वेदिक औषधि है |
  • प्रसूति रोगों में : – दशमूल क्वाथ प्रसूति जन्य रोगों में बहुत ही लाभकरी होता है | बच्चे के जन्म के बाद महिलाओ में कई रोग उत्पन्न हो जाते है जैसे – शरीर में सुजन, खून की कमी, चिडचिडापन, चक्कर आना आदि | गर्भास्य शोधन एवं प्रसुत रोगों में दशमूल क्वाथ प्रसिद्ध एवं उपयोगी क्वाथ है | इस क्वाथ का प्रयोग बच्चा होने के दिन से लेकर 10 दिन तक प्रसूता को अवश्य करना चाहिये | क्योकि इन दिनों में प्रसूता को प्रसवजन्य अनेक तरह की वेदना एवं व्याधियां हो जाती है | इसके लिए उन्हें रोज 10 ग्राम दशमूल क्वाथ को 250 ml पानी में डालकर गरम करना चाहिए जब पानी एक चौथाई रह जावे तो उसे ठंडा करके छान कर उपयोग में लाना चाहिए | इसके सेवन से प्रसूति जन्य विकारो में लाभ मिलेगा एवं गर्भस्य में स्थित गंदगी भी बाहर आ जाएगी अर्थात गर्भाशय का शोधन हो जावेगा |
  • दशमूल क्वाथ की 10 ग्राम मात्रा में 2 ग्राम पिप्पली का चूर्ण मिला कर सेवन किया जावे तो प्रसूति जन्य ज्वर, मुखषोस, हाथ पैरो का ठंडा होना, भ्रम, अधिक पसीना आना, खांसी श्वास और हृदय रोगों में चमत्कारिक लाभ होता है |
  • वात एवं कफ रोगों में दशमूल काढ़े का उपयोग करना चाहिए | 10 ग्राम दशमूल क्वाथ को 250 ml पानी में उबाल ले | जब पानी 1/4  रह जाए तो ठंडा कर के छान कर उपयोग में लाना चाहिए |  इसके सेवन से वात के कारण होने वाले दर्द और सुजन से रहत मिलती है |
    वात रोगों के शमुल नाश के लिए साथ में महायोगराज गुग्गुलु और वृ. चिंतामणि रस आदि वात शामक औषधियों का उपयोग कर सकते है लेकिन इनका उपयोग अपने चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए |
  • दशमूल क्वाथ एंटीओक्सिडेंट गुणों से युक्त होता है |
  • अस्थमा एवं कफज व्याधियों में इसके सेवन से लाभ मिलता है |
  • रक्त की अशुद्धि में दशमूल काढ़े के सेवन से फायदा होता है | यह अपने एंटीओक्सिदेंट्स गुणों के कारण रक्त को सुद्ध करके विकारों से दूर रखता है |
  • गठिया, संधिवात एवं अन्य वातशूल (वात के कारण होने वाले दर्द) में दशमूल काढ़े के उपयोग से दर्द में लाभ मिलता है |

धन्यवाद |

Content Protection by DMCA.com
Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Shopping cart

0

No products in the cart.

+918000733602

असली आयुर्वेद की जानकारियां पायें घर बैठे सीधे अपने मोबाइल में ! अभी Sign Up करें

You have successfully subscribed to the newsletter

There was an error while trying to send your request. Please try again.

स्वदेशी उपचार will use the information you provide on this form to be in touch with you and to provide updates and marketing.