आक के है इतने औषधिये गुण – आक (Calotropis gigantea) के देशी घरेलु उपयोग

आक  (Calotropis gigantea)

आक को मदार या आकौआ भी कहते है | इस औशाधिये पौधे के विषय में हमारे समाज में यह भ्रान्ति फैली हुई है की यह पौधा विषैला है , इसका सेवन मर्त्यु का कारण बन सकता है | इसमें कुछ सत्य भी है क्योकि आयुर्वेद के ग्रंथो में भी इसकी गणना उपविषों में की गई है | यदि इसका अधिक मात्रा में  सेवन किया जावे तो यह उलटी – दस्त आदि के दवारा मनुष्य की जान भी ले सकता है लेकिन अगर इसका उचित मात्रा में और शास्त्र समत सेवन किया जावे तो यह बहुत से रोगों में हमारे लिए लाभदायक हो सकता है | सामान्यतया आक की शाखाओ और पतों से जो दूध निकलता है वह विषेला होता है, इसका उपयोग सही मात्रा और वैध्य की देख रेख में करना चाहिए | 
आज हम आपको बताएँगे आक के घरेलु उपयोग और इसकी सेवन विधि 
1. दमा और प्लीहा रोग 
आक के थोड़े से पते और 10 ग्राम सेंधा नमक को कूट कर एक छोटी हांडी में रख कर उपर से मुंह को अच्छी तरह मुल्तानी मिटटी लगा कर बंद करदे | फिर इस हांड़ी को उपलों की आग में दबा दे | जब सारे उपले जल जावे तब इस हांड़ी को निकलकर ठंडा करले | हांड़ी में आपको चूर्ण मिलेगा जिसे किसी कांच की शीशी में भरले | इस चूर्ण को सुबह – शाम एक माशा की मात्रा में शहद के साथ नित्य सेवन करे दमा , खांसी , प्लीहा रोग ठीक हो जावेंगे |
2. खांसी 
आक की जड़ का चूर्ण 2 ग्राम , पुराना गुड़ 5 ग्राम एवं कालीमिर्च के 3 दाने – इन सब को पीसकर चने के बराबर गोलिया बना ले | प्रतिदिन दो गोलिया गरम पानी के साथ लेने से खांसी ठीक हो जाती है |
3. प्रदर रोग 
जिन महिलाओ को प्रदर रोग हो , उन्हें आक की जड़ का चूर्ण दो ग्राम सुबह दही के साथ नित्य सेवन करना चाहिए | इससे प्रदर रोग ठीक हो जाता है |
4. प्रमेह / मधुमेह 
आक की जड़ – 5 ग्राम , अस्वगंधा – 5 ग्राम , तथा बीज बंद – 6 ग्राम * | इन सब का चूर्ण बना कर , इसे गुलाब जल के साथ मर्दन करे जब तक यह फिर से सुखा चूर्ण न बन जावे | इस चूर्ण को एक माशा की मात्रा में शहद के साथ सेवन करे | 10 दिन में मधुमेह में आराम मिल जावेगा |
5. बवासिर 
आक के पत्ते और डंठल को आधा लीटर पानी में भिगोवे | फिर इसी पानी से गुदा को अच्छी तरह धोये | 
6. सिर दर्द 
आक के सूखे डंठल को एक तरफ से जला ले और दूसरी तरफ से आने वाली धुंवा को अपनी नाक से अन्दर खींचे | किसी भी प्रकार का सिरदर्द हो चला जावेगा |
7. आंख दुखती हो 
आक के दूध को अपने पैर के दाहिने अंगूठे पर लगा ले | आँखे दुखना बंद हो जावेगी |
8. बाल गिर रहे हो 
अगर खोरे के कारण बाल गिर रहे हो या गिर गए हो तो आक के दूध को सिर में मले | उड़े हुए बाल वापिस आने लगेंगे |
9. खाज खुजली या उंगलियों के सड़ने पर 
अगर अंगुलियों में खुजली , खाज या किसी चोट के कारण सदन पैदा हो गई हो तो – तिल्ली के तेल में थोडा सा आक का दूध मिला ले और इस तेल से उस जगह पर मालिश करे | खाज – खुजली या सडन चली जावेगी |
10. फोड़े – फुंसी 
आक की जड़ को पिस कर उसमे पानी मिला कर फोड़े – फुंसी पर लेप लगाने से जल्दी ही फोड़े – फुंसी मिट जाते है |
11. नासूर 
आक की जड़ की रख तथा पीपल की छल का भस्म नासूर पर लगावे , जल्दी ही नासूर ठीक हो जावेगा |
12. मिर्गी रोग में 
आक का दूध मिर्गी के रोगी के तलवो पर एक महीने तक मले | सदा के लिए मिर्गी रोग ठीक हो जावेगा |
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धन्यवाद 

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