तुलसी ( ocimum sanctum ) – अनेक रोगों की एक औषधि, फायदे(updated)

तुलसी (Ocimum Sanctum)

update on – 08/11/2017

तुलसी एक दिव्या पौधा है जो भारत के हर घर में मिलजाता है | भारतीय संस्कृति में तुलसी का बहुत महत्वपूरण स्थान है | आयुर्वेद में भी तलसी को अमृतदायी माना गया है क्यों की यह सर्व्रोग्नशिनी पौधा है | जिस घर में तुलसी का पौधा होता है वंहा निर्धनता और रोग दोनों ही नहीं बसते |

तुलसी के फायदे

तुलसी की कई प्रजातीय होती है लेकिन औषधीय रूप में हम सर्व शुलभ पवित्र तुलसी ( ocimum sanctum ) का प्रयोग करते है जो दो प्रकार की होती है – श्वेत तुलसी ( हरी पतियों वाली और श्वेताभ शाखाओ वाली ) और दूसरी श्यामा तुलसी ( बैंगनी पतियों वाली और गहरे रंग की शाखाओ वाली ) |

तुलसी के गुण – धर्म एवं इसके प्रकार

गुण धर्म में समान होते हुए भी काली तुलसी को अच्छा माना गया है | श्यामा तुलसी में कफ निस्सारक एवं ज्वरनाgशक गुण श्वेत तुलसी से अधिक होते है | फिर भी दोनो ही तलसी समान गुण धर्म वाली होती है | माना जाता है की जिस घर में तुलसी होती है उस घर पर कभी बिजली नहीं गिरती क्यों की तुलसी में एक प्रबल विद्युत शक्ति होती है जो उसके चारो और दो सौ गज तक प्रवाहित होती रहती है जिसके कारण आकाशीय बिजली नहीं गिरती | जिस घर में तुलसी होगी उस घर में मच्छर और विषाणु नहीं फैलेगे | इसी लिए तुलसी को भारतीय संस्कृति में इतना ऊँचा स्थान प्राप्त है और लगभग सभी घरो में इसकी पूजा की जाती है |

लगभग हर रोग में तुलसी का प्रयोग किया जाता है और हर रोग में आशातीत लाभ भी मिलता है | लेकिन फिर भी तुलसी का प्रयोग करने से पहले रोगी की आयु – रोग की अवस्था – रोगी की प्रकृति और मौसम को ध्यान में रखते हुए तुलसी की पतियों की मात्रा का निर्धारण कर लेना चाहिए – जैसे तुलसी की प्रकृति गरम होति है इसलिए गरमियों में कम और सर्दियों में अधिक मात्रा का सेवन करना चाहिए |

विभिन्न रोगों में तुलसी के फायदे / लाभ

सर्दी जुकाम में तुलसी के फायदे 

सर्दी जुकाम में तुलसी चमत्कारिक लाभ देती है | खांसी – जुकाम की ज्यादातर कफ सिरप में तलसी का प्रयोग किया जाता है | अगर जुकाम से परेशान है तो तुलसी की साफ की हुई 10-12 पतियों को दूध या चाय में उबाल कर पिए लाभ होगा |

फीवर ( बुखार ) में तुलसी का प्रयोग 

बुखार में 10-15 तुलसी की साफ़ पतियों को एक  कप पानी में उबाल ले साथ में एज चम्मच इलाइची पाउडर डाल कर काढ़ा आना ले और सुबह – शाम इसका सेवन करे | बुखार होने पर आप तुलसी अर्क जो बाजार में मिलजाता है उसका भी सेवन कर सकते है |

लीवर की समस्या में – लीवर के लिए भी तुलसी बहुत फायदेमंद होती है | रोज तुलसी की 10 पतिया खाए खाए लीवर की समस्या में आशातीत लाभ मिलेगा |

पाचन सम्बंधित रोगों में तुलसी के फायदे  – पाचन सम्बंधित समस्या में तुलसी के 10-12 साफ पतों और एक चुटकी सेंधा नमक दोनों को एक कप पानी में उबल कर काढ़ा बना ले और इसका सेवन करे |

श्वास रोग में तुलसी के लाभ  – श्वास रोगों में तुलसी का बहुत उपयोग है श्वास रोगी को तुलसी – अदरक और शहद से बनाया हुआ काढ़ा उपयोग में लेना चाहिये | अवश्य लाभ होता है |

गुर्दे की पत्थरी – गुर्दे के लिए भी तुलसी बहुत उपयोगी होती है | अगर किसी की गुर्दे की पत्थरी है तो उसे शहद के साथ तुलसी अर्क का उपयोग करना चाहिये |

हृदय रोग – तुलसी खून में स्थित कोलेस्ट्रोल को घटती है इसलिए हृदय रोगियों को तुलसी का सेवन करना चाहिए |

मानसिक तनाव – तुलसी की खुसबू में तनावरोधी गुण होते है इसलिए रोज सुबह तुलसी के सेवन से मनुष्य मानसिक तनाव से बच सकता है |

कैंसर में तुलसी के फायदे 

7 से 21 तुलसी की पतियों को साफ़ पत्थर पर पिस कर चटनी की तरह लुग्धि बना ले | अब 50  से 125 ग्राम दही ( जो बिलकुल खट्टा न हो ) के साथ 2 से 3 महीने तक लगातार सेवन करे | इस चटनी की पहली मात्रा नित्य क्रम से निपट कर नास्ते से आधा घंटा पहले ले | यह मात्रा दिन में दो से तीन बार ले सकते है |

हाई ब्लड प्रेसर – उच्च रक्त चाप के रोगियों को तुलसी का सेवन करना चाहिए | क्योकि यह कोलेस्ट्रोल को घटा कर रक्तचाप को सामान्य करटी है |

मुंह की दुर्गन्ध – जिनको श्वास में दुर्गन्ध आती हो उनको तुलसी के सूखे पतों के चूर्ण में सरसों का तेल मिला कर मंजन करनी चाहिए | समस्या से निजत मिलेगी |

वात रोग – तुलसी के साथ कालीमिर्च का सेवन करना से वात व्याधि ठीक होती है |

सिरदर्द – तुलसी के काढ़े के सेवन से सिरदर्द से बचा जा सकता है |

आयुर्वेद के अनुसार तुलसी हलकी उष्ण , तिक्षण , कटु  और रक्ष स्वभाव की होती है | यह पाचन शक्ति बढ़ाने वाली ,कृमि नाशक , दुर्गन्ध नाशक , दूषित कफ और वात को ठीक करने वाली , हृदय के लिए हितकारी ,मुत्रक्रिछ को मिटने वाली , विष विकार , कोढ़ – चर्म रोग , श्वास – काश रोग को ठीक करने वाली और उलटी – हिचकी – खांसी रोग को मिटने वाली होती है |

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धन्यवाद |

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