क्यों अक्षय कुमार follow करते है आयुर्वेद || जाने क्या है आयुर्वेद और क्यों जरुरी है

वर्तमान समय में हम आधुनिकता के कारण इतने मुर्ख बन चुके है की जिस धरती पर आयुर्वेद का जन्म हुआ उसी धरा के लोगो ने इस चिकित्सा पद्धति को भुला दिया | आयुर्वेद सम्पूर्ण विश्व की पहली चिकित्सा पद्धति है जिसने मनुष्य को निरोगी रहना सिखाया | आयुर्वेद का मूल प्रयोजन है “स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और आतुर ( रोगी ) के रोग का शमन (मिटाना) करना” | वर्तमान में हम आयुर्वेद से दूर होते जा रहे है और विदेशी जिनकी पाश्च्यात्य चिकित्सा पद्धति के पीछे हम पड़े है वो आयुर्वेद की तरफ आकर्षित हो रहे है | आखिर क्यों ? इसका जवाब है की उन्होंने आयुर्वेद को समझ लीया और हमें आज तक ये भी नहीं पता की आयुर्वेद होता क्या है ! अभी हाल ही में बॉलीवुड के कलाकार अक्षय कुमार ने एक video post किया था जिसमे उन्होंने भी आयुर्वेद को अपनाने की बात कही और अपने अनुभव पब्लिक के साथ  share किये | video निचे दिया गया है | 
अब समझे क्या है आयुर्वेद 

क्या है आयुर्वेद ?

आयुर्वेद दो शब्दों से मिलकर बना है – आयु + वेद | 
अर्थात जो वेद हित और अहित आयु का ज्ञान करवाता हो वह आयुर्वेद कहलाता है |
हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।
मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥ 
अर्थात जो शास्त्र हित आयु ( जीवन के अनुकूल ), अहित आयु ( जीवन के प्रतिकूल ), सुख आयु ( स्वस्थ जीवन ), दुःख आयु ( रोग की अवस्था ) के बारे में बताता हो वही आयुर्वेद है |

सम्पूर्ण विश्व के चिकित्सा विज्ञान में आयुर्वेद सबसे पुराना और प्रबल चिकित्सा शास्त्र है | आयुर्वेद का इतिहास सिर्फ 5000 हजार साल पुराना ही नहीं वरन जब से स्रष्टि का निर्माण हुआ तब से ही आयुर्वेद का चलन है | यह ज्ञान प्रकति की उत्पत्ति के साथ ही उत्पन्न हुआ लेकिन भगवान् धन्वन्तरी ने इसे नाम दिया | भगवान् धन्वन्तरी ने इसे 2 भागो में विभक्त किया – 1. औषधि चिकित्सा 2. शल्य चिकित्सा | 
इसके बाद आयुर्वेद के कुछ प्रगांड विद्वानों ने आगे के अध्यन के लिए इसको आठ भागो में विभक्त किया जो निम्न लिखित है –
1. काय चिकित्सा 
2. बाल चिकित्सा 
3. भूत विद्या (वायरस से होने वाली बीमारियों की चिकित्सा )
4. स्पर्श चिकित्सा 
5. शल्य चिकित्सा 
6. शालाक्य तंत्र 
7. मंत्र चिकित्सा 
8. रसायन और बाजीकरण तंत्र 
मुख्यतया आयुर्वेद में आपके तन – मन और आत्मा के बिच संतुलन बैठाया जाता है | आयुर्वेद रोग का उपचार ही नहीं करता बल्कि उसके कारणों से भी आपको बचाता है | आयुर्वेद का मुख्या सिद्धांत आपके वात – पित – कफ को सही करना है | अगर आपके त्रिदोष ( वात,पित,कफ ) में से कोई भी बढ़ा हुआ है तो आपको कोई न कोई रोग अवश्य होता है | इसलिए आयुर्वेद में सबसे पहले त्रिदोष को संतुलित किया जाता है | आयुर्वेद रोग की जड़ को पकड़ कर उसका उपचार करता है जिससे की वह रोग भविष्य में फिर से न पनपे | आयुर्वेद अंग्रेजी दवाइयों की तरह रोग को दबाता नहीं है बल्कि उससे जड़ से निकलने की प्रक्रिया अपनाता है |
हमारी परम्परागत चिकित्सा पद्धति को यु ही न बर्बाद होने दे | एक बार आयुर्वेद को अपना कर देखे |
धन्यवाद 
Team – Swadeshi Upchar
आप सभी से निवेदन है की इस post को जितना हो सके share जरुर करे ताकि किसी अन्य को भी हमारी परम्परागत चिकित्सा पद्धति की आवश्यकता के बारे में पता चले |

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