कार्बोहाइड्रेट्स – प्रकार , साधन और इसके कार्य

कार्बोहाइड्रेट्स

हमारे शरीर को विभिन्न गतिविधियों का संचालन करने और दैनिक क्रियाकलापों को संपन्न करने के लिए उर्जा की  आवश्यकता होती है | यह उर्जा हमारे शरीर को अधिकांश कार्बोज के द्वारा ही प्राप्त होती है | जो हम खाने में ग्रहण करते है जैसे चावल , मक्का , गेंहू, बाजरा , आलू , चुकंदर , गुड और शक्कर आदि वो सभी कार्बोज के अंतर्गत ही आते है | भारत जैसे देश में जहां बेरोजगारी और भुखमरी इतनी अधिक है , यहाँ ये पदार्थ ही हमारे शरीर की उर्जा का 90% भाग प्रदान करते है |

कार्बोहाइड्रेट्स का उपयोग
कार्बोहाइड्रेट्स

क्या होता है कार्बोहाइड्रेट्स

हमारे शरीर को 55% से 65% उर्जा कार्बोज के द्वारा ही प्राप्त होती है | कार्बोहाइड्रेट्स के मुख्य स्रोत वनस्पति जगत ही है | पेड़ पौधे प्रकाश संक्ष्लेषण की क्रिया द्वारा कार्बोज का निर्माण करते है | 8 वीं क्लास में भी आपने पढ़ा होगा की प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कैसे होती है | अगर याद नहीं है तो हम बता देते है | दर:शल प्रकाश संश्लेष्ण की क्रिया पेड़ की हरी पतियों द्वारा होती है |  पेड़ वातावरण से  कार्बनडाई ऑक्साइड ग्रहण करते है और ओक्सिजन छोड़ते है | पेड़ की पतियों में क्लोरोफिल नामक वर्णक उपस्थित होता है  | यह वर्णक पेड़ से जल और वातावरण से प्राप्त कार्बनडाई ऑक्साइड के साथ मिलकर सूर्य की रोशनी में कार्बोज का निर्माण करते है | इन कार्बोज को पौधे अपने तने , जड़ , फल, फुल और बीज आदि में संगृहीत करते है | जो स्टार्च और शक्कर के रूप में संगृहीत रहते है | अत: इस प्रकार कार्बोहाइड्रेट्स का निर्माण होता है |

कार्बोहाइड्रेट्स का वर्गीकरण

रासायनिक विशेषताओं के आधार पर कार्बोज को तीन भागों में बांटा जाता है – (1) मोनोसैकराईड्स (2)डाईसैकराईड्स (3) पोलीसैकराईड्स | निम्न सारणी के द्वारा  आप अच्छी तरह समझ सकते है |

मोनोसैक्राइड के भागडाईसैक्राइड केप्रकारपोलीसैक्राइड के प्रकार
ग्लूकोजसुक्रोजस्टार्च
ग्लैक्टोजमाल्टोजग्लैकोजन
फ्रुक्टोजलैक्टोजसेल्युलोज
हेमीसेल्युलोज
पेक्टिन

कार्बोहाइड्रेट्स के कार्य

1 . शरीर को उर्जा प्रदान करना

शरीर को उर्जा प्रदान करने एवं शरीर की समस्त गतिविधियों के सञ्चालन के लिए कार्बोहाइड्रेट्स अत्यंत आवश्यक है | विभिन्न शारीरिक गतिविधियों जैसे – चलना , फिरना , दौड़ना ,उठना, बैठना और सोना आदि कामो के लिए हमें उर्जा की आवश्यकता होती है | यह उर्जा हमें कार्बोज के द्वारा ही प्राप्त होती है | 1 ग्राम कार्बोज शरीर में प्रज्ज्वलित होकर 4.2 कैलोरी उर्जा प्रदान करती है | जब हमें भोजन ग्रहण करते है तो पाचन क्रिया के उपरांत स्टार्च ग्लूकोज में टूट जाता है | ये ग्लूकोज रक्तवाहिनियों द्वारा अवशोषित कर लिए जाते है |

2 .  प्रोटीन की बचत 

प्रोटीन का मुख्य काम शरीर की समस्त कोशिकाओं, उतकों, रक्त, मांसपेशियों, बाल, त्वचा आदि का निर्माण करना तथा टूटे-फूटे क्षतिग्रष्ट कोशिकाओं की मरम्मत करना है |प्रोटीन  शरीर की वर्द्धि और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है | परन्तु प्रोटीन कार्बोज एवं वसा की अनुपस्थिति में गौण हो जाता है | प्रोटीन मंहगे खाद्य पदार्थो में ही अधिकतर पाए जाते है | अत: प्रोटीन से उर्जा प्राप्त करना कोई बुद्धिमानी नहीं है | इसलिए आहार में प्रयाप्त मात्रा में कर्बोजयुक्त आहार लेना चाहिए ताकि शरीर की मांग के अनुसार कैलोरी मिलती रहे |

3 . विटामिन “B” समुह्ह के संश्लेषण में कार्बोहाइड्रेट्स का उपयोग 

लैक्टोज ( दुग्ध शर्करा ) विटामिन ‘B’ समूह के संश्लेषण के लिए आवश्यक होती है मनुष्य के छोटी आंत में कुछ एसे जीवाणु उपस्थित होते हैं जो विटामिन – ‘B’ समूह के संश्लेष्ण में सहायक होते है | इन जीवाणुओंके जीवित रहने तथा वर्द्धि – विकास करने के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है | इन्हें यह उर्जा लैक्टोज से प्राप्त होती है और लैक्टोज डाईसैक्राइड कार्बोज ही होता है | लैक्टोज की घुलनशीलता अन्य शर्कराओ की अपेक्षा कम होती है | इसलिए यह देर तक आंतो में उपस्थित रहता है तथा इस इस अवधि में विटामिन बी समूह के संश्लेषण में सहायता पंहुचाने वाले जीवाणुओं की भरण – पोषण एवं वर्द्धि करता है | इस तरह कार्बोज अप्रत्यक्ष रूप से विटामिन ‘बी’ समूह के संश्लेषक में महत्वपूरण भूमिका अदा करता है |

4 . कैल्शियम का अवशोषण करता है कार्बोहायड्रेट ( Carbohydrates works in Absorption of Calcium )

कैल्शियम के अवशोषण तथा उपयोगिता बढ़ाने के लिए लैक्टोज की आवश्यकता पड़ती है | लैक्टोज शर्करा केवल दूध में ही पाया जाता है एवं दूध में ही कैल्शियम की भी भरपूर मात्रा होती है | कैल्शियम की अवशोषण क्षमता को बढ़ाने के लिए लैक्टोज आवश्यक होता है

5 . पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में कारगर 

कार्बोहायड्रेट पाचन तंत्र को दुर्रस्त रखने में भी उपयोगी सिद्ध होता है | आहार में कार्बोज की उपस्थिति  आंतो की क्रमाकुंचन गति ( Peristaltic Movement ) को बढाता है एवं भोजन को आगे की और सरकता है | इस प्रकार जो भोज्य पदार्थ ( जैसे – मैदा के कण  , चावल के कण आदि ) आंतो से चिपक जाते है वे भी आंतो से छूटकर इनके साथ मिलजाते है और मल के निर्माण में सहायक होते है | रफेज में जल अवशोषित करने की विलक्षण क्षमता होती है | इस कारण यह मल की परिणाम को बढाता है | रफेज की उपस्थित के कारण मलाशय से मल सरलतापूर्वक सुगमता से बहार निकल जाता है | यह कब्ज से बचाता है | कब्ज से बचने के लिय आहार में प्रयाप्त मात्रा में रफेज होनी चाहिए |

6 . विषाक्त पदार्थो को हानिरहित बनाना 

कार्बोज कुछ विषाक्त पदार्थो को बिलकुल हानिरहित बना देता है | उदहारण के लिए पाचन क्रिया के दौरान ग्लैकुरोनिक अम्ल उत्पन्न होता है | यह अम्ल विषाक्त होता है | इस अम्ल को कार्बोज फिनोलिक हाइड्रोक्सिल समूह के साथ मिला देता है जिससे ग्लैकरुनिक अम्ल का विषैला प्रभाव नष्ट हो जाता है | यदि यह प्रतिक्रिया नहीं हो पाती है तो शरीर में यौन हार्मोन का अत्यधिक मात्रा में स्राव होने लगता है |

7 . यकृत को स्वस्थ रखने में  कार्बोज उपयोगी है 

यकृत को स्वस्थ बनाये रखने में कार्बोज की अहम् भूमिका होती है | यकृत विषैले तथा हानिकारक जीवाणुओं का नाश ग्लैकोजन की उपस्थिति में ही करता है | यदि यकृत में ग्लैकोजन की भरपूर मात्रा नहीं होती है तो विषैले पदार्थ, हानिकारक जीवाणु आदि जैविक अंगो के मुख्य तंतुओ तक पंहुचकर उन्हें क्षतिग्रष्ट कर सकते है | फलत: व्यक्ति रोगी हो सकता है | इसलिय यकृत में उच्च ग्लैकोजन स्तर को  बनाये रखना अत्यंत आवश्यक है | credit – Dr Vrinda Singh 

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